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प्रदेश में 2400 करोड़ की लागत से विकसित होंगे पर्यटन स्थल : सीएम
Fri, 11 Apr 2025 10:51 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 11 Apr 2025 10:51 PM IST
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कोलबांध वाटर स्पोर्ट्स सहित आठ परियोजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन करते हुए सीएम। डीपीआरओ
-कोलबांध में वाटर स्पोटर्स गतिविधियां शुरू, गोबिंद सागर की तर्ज पर चलेंगे शिकारे
-सीएम ने ऑनलाइन किए जिले की आठ परियोजनाओं का किया लोकार्पण, शिलान्यास
- 70 लाख से बने 110 किलोवाट के सौर ऊर्जा चालित रूफटॉप प्लांट का उद्घाटन किया
-40 लाख रुपये की लागत से बनीं चार स्पेस प्रयोगशालाएं भी स्कूलों को सौंपी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से बिलासपुर जिले के लिए आठ बड़ी विकासात्मक परियोजनाओं के शुभारंभ और शिलान्यास किए। इन सभी परियोजनाओं से जिले के पर्यटन, रोजगार और हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। इनमें विशेष रूप से कोलबांध झील में वाटर स्पोटर्स गतिविधियों को शुरू किया गया। वहीं मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 2400 करोड़ रुपये की लागत से नए पर्यटन स्थलों का विकास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कोलबांध में वाटर स्पोटर्स गतिविधियों का शुभारंभ, 70 लाख रुपये की लागत से बने 110 किलोवाट के सौर ऊर्जा चालित रूफटॉप प्लांट का उद्घाटन किया। इस प्लांट के लगने से उपायुक्त कार्यालय बिलासपुर प्रदेश का पहला हरित उपायुक्त कार्यालय बन गया है। इसके अलावा, 4.5 करोड़ रुपये की लागत से तैयार शहरी आजीविका केंद्र, 40 लाख रुपये की लागत से बनीं चार स्पेस प्रयोगशालाएं और 2.5 करोड़ रुपये की लागत से मॉडल कॅरिअर सेंटर का लोकार्पण भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोबिंद सागर के बाद कोलबांध झील में शुरू हुई जल आधारित साहसिक गतिविधियों से जिले को पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार पर्यटन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और इसे हिमाचल की आय का मुख्य स्रोत बनाने की दिशा में काम कर रही है। धार्मिक, पारंपरिक, जल और स्वास्थ्य पर्यटन को मिलाकर आकर्षक पैकेज तैयार किए जा रहे हैं।
विकास की योजनाओं के बारे में कहा कि पहले चरण में वैलनेस सेंटर बनाए जाएंगे और निजी निवेशकों को प्रोत्साहित कर तीन से सात सितारा होटल विकसित किए जाएंगे। श्री नयना देवी जी मंदिर में सुविधाओं के उन्नयन के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जबकि धर्मशाला में 200 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक कन्वेंशन सेंटर बनेगा। गोबिंद सागर झील समेत अन्य जलाशयों में क्रूज, शिकारा, हाउस बोट, जेट स्की, मोटर बोट और वाटर स्कूटर जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। प्रदेश सरकार राज्य के युवाओं को होम स्टे और होटल निर्माण के लिए मिलने वाले ऋण पर 5 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान करने पर विचार कर रही है। इससे स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे और पर्यटन को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने प्रदेश के पहले 110 किलोवाट के सौर ऊर्जा चालित रूफटॉप प्लांट का उद्घाटन किया। इस प्लांट के लगने से उपायुक्त कार्यालय बिलासपुर प्रदेश का पहला हरित उपायुक्त कार्यालय बन गया है।
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इनसेट
बिजली बिल में सालाना 10 लाख की बचत : धर्माणी
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि बिलासपुर के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि उपायुक्त कार्यालय परिसर में लगे सौर ऊर्जा संयंत्र से प्रतिदिन 440 यूनिट और मासिक 13,200 यूनिट बिजली उत्पादन होगा, जिससे सालाना 10 लाख रुपये की बिजली बचत होगी।
इनसेट
विकास में मील का पत्थर साबित होंगी ये परियोजनाएं : उपायुक्त
उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा लोकार्पित परियोजनाएं जिले में पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार के लिए मील का पत्थर साबित होंगी।
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-सीएम ने ऑनलाइन किए जिले की आठ परियोजनाओं का किया लोकार्पण, शिलान्यास
- 70 लाख से बने 110 किलोवाट के सौर ऊर्जा चालित रूफटॉप प्लांट का उद्घाटन किया
-40 लाख रुपये की लागत से बनीं चार स्पेस प्रयोगशालाएं भी स्कूलों को सौंपी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से बिलासपुर जिले के लिए आठ बड़ी विकासात्मक परियोजनाओं के शुभारंभ और शिलान्यास किए। इन सभी परियोजनाओं से जिले के पर्यटन, रोजगार और हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। इनमें विशेष रूप से कोलबांध झील में वाटर स्पोटर्स गतिविधियों को शुरू किया गया। वहीं मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 2400 करोड़ रुपये की लागत से नए पर्यटन स्थलों का विकास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कोलबांध में वाटर स्पोटर्स गतिविधियों का शुभारंभ, 70 लाख रुपये की लागत से बने 110 किलोवाट के सौर ऊर्जा चालित रूफटॉप प्लांट का उद्घाटन किया। इस प्लांट के लगने से उपायुक्त कार्यालय बिलासपुर प्रदेश का पहला हरित उपायुक्त कार्यालय बन गया है। इसके अलावा, 4.5 करोड़ रुपये की लागत से तैयार शहरी आजीविका केंद्र, 40 लाख रुपये की लागत से बनीं चार स्पेस प्रयोगशालाएं और 2.5 करोड़ रुपये की लागत से मॉडल कॅरिअर सेंटर का लोकार्पण भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोबिंद सागर के बाद कोलबांध झील में शुरू हुई जल आधारित साहसिक गतिविधियों से जिले को पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार पर्यटन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और इसे हिमाचल की आय का मुख्य स्रोत बनाने की दिशा में काम कर रही है। धार्मिक, पारंपरिक, जल और स्वास्थ्य पर्यटन को मिलाकर आकर्षक पैकेज तैयार किए जा रहे हैं।
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विकास की योजनाओं के बारे में कहा कि पहले चरण में वैलनेस सेंटर बनाए जाएंगे और निजी निवेशकों को प्रोत्साहित कर तीन से सात सितारा होटल विकसित किए जाएंगे। श्री नयना देवी जी मंदिर में सुविधाओं के उन्नयन के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जबकि धर्मशाला में 200 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक कन्वेंशन सेंटर बनेगा। गोबिंद सागर झील समेत अन्य जलाशयों में क्रूज, शिकारा, हाउस बोट, जेट स्की, मोटर बोट और वाटर स्कूटर जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। प्रदेश सरकार राज्य के युवाओं को होम स्टे और होटल निर्माण के लिए मिलने वाले ऋण पर 5 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान करने पर विचार कर रही है। इससे स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे और पर्यटन को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने प्रदेश के पहले 110 किलोवाट के सौर ऊर्जा चालित रूफटॉप प्लांट का उद्घाटन किया। इस प्लांट के लगने से उपायुक्त कार्यालय बिलासपुर प्रदेश का पहला हरित उपायुक्त कार्यालय बन गया है।
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बिजली बिल में सालाना 10 लाख की बचत : धर्माणी
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि बिलासपुर के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि उपायुक्त कार्यालय परिसर में लगे सौर ऊर्जा संयंत्र से प्रतिदिन 440 यूनिट और मासिक 13,200 यूनिट बिजली उत्पादन होगा, जिससे सालाना 10 लाख रुपये की बिजली बचत होगी।
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विकास में मील का पत्थर साबित होंगी ये परियोजनाएं : उपायुक्त
उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा लोकार्पित परियोजनाएं जिले में पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार के लिए मील का पत्थर साबित होंगी।