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Bilaspur News: 12 साल बाद सड़क हादसे में बुजुर्ग की मौत पर 5.30 लाख मुआवजा देने के आदेश
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ट्रिब्यूनल ने चालक की लापरवाही मानी, गाड़ी का नहीं था बीमा
चालक और पंजीकृत मालिक दोनों जिम्मेदार
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण घुमारवीं ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। करीब 12 साल पुराने सड़क हादसे में मौत के मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण घुमारवीं ने मृतक के आश्रितों को 5,30,300 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। अधिकरण के अध्यक्ष डॉ. मोहित बंसल ने 16 फरवरी को यह अवार्ड पारित किया। यह मुआवजा वाहन चालक और पंजीकृत मालिक दोनों को देना होगा।
याचिका बिमला देवी व अन्य की ओर से मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत दायर की गई थी। मृतक बालक राम की पत्नी और तीन बेटों ने 25 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। अदालत में प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार 15 फरवरी 2014 को गांव बकरोआ निवासी बालक राम पैदल अपने किराना स्टोर की ओर जा रहे थे। सुबह करीब नौ बजे घुमारवीं की ओर से आ रही मोटरसाइकिल ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे में गंभीर रूप से घायल बालक राम को पहले क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर ले जाया गया, जहां से पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया, लेकिन उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस थाना घुमारवीं में एफआईआर दर्ज हुई थी। चालक ने दलील दी कि उसे आपराधिक मामले में बरी किया जा चुका है, लेकिन ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि मुआवजा मामलों में प्रमाण का स्तर अलग होता है। उपलब्ध साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शी गवाही के आधार पर चालक की लापरवाही साबित मानी गई। परिवार ने मृतक की आय 20 हजार रुपये प्रतिमाह बताई, लेकिन दस्तावेज पेश नहीं किए गए। अदालत ने 2014 की न्यूनतम मजदूरी 5100 रुपये प्रतिमाह मानकर आय निर्धारित की। मृतक की आयु पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार 65 वर्ष मानी गई और उसी आधार पर मल्टीप्लायर लगाया गया। प्रतिवादियों ने कहा कि बेटे वयस्क और विवाहित हैं, इसलिए आश्रित नहीं हैं। अदालत ने माना कि भारतीय पारिवारिक व्यवस्था में संयुक्त रूप से रहने की संभावना को देखते हुए पत्नी और बेटों को आश्रित माना जाएगा, क्योंकि अलग रहने का कोई प्रमाण पेश नहीं हुआ।
वाहन मालिक ने दावा किया कि मोटरसाइकिल पहले ही चालक को बेच दी थी, लेकिन वाहन का पंजीकरण उसके नाम पर ही था। अदालत ने कहा कि मोटर वाहन कानून के अनुसार पंजीकृत मालिक ही जिम्मेदार माना जाएगा। दुर्घटना के समय वाहन का बीमा भी प्रभावी नहीं था। ऐसे में चालक और पंजीकृत मालिक दोनों को संयुक्त रूप से मुआवजा देने का आदेश दिया गया।
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अदालत ने आय हानि 3,21,300 रुपये तय की। इसके अलावा अंतिम संस्कार खर्च, संपत्ति हानि और चारों आश्रितों को कंसोर्टियम मिलाकर कुल 5,30,300 रुपये मुआवजा निर्धारित किया गया।
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चालक और पंजीकृत मालिक दोनों जिम्मेदार
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण घुमारवीं ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। करीब 12 साल पुराने सड़क हादसे में मौत के मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण घुमारवीं ने मृतक के आश्रितों को 5,30,300 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। अधिकरण के अध्यक्ष डॉ. मोहित बंसल ने 16 फरवरी को यह अवार्ड पारित किया। यह मुआवजा वाहन चालक और पंजीकृत मालिक दोनों को देना होगा।
याचिका बिमला देवी व अन्य की ओर से मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत दायर की गई थी। मृतक बालक राम की पत्नी और तीन बेटों ने 25 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। अदालत में प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार 15 फरवरी 2014 को गांव बकरोआ निवासी बालक राम पैदल अपने किराना स्टोर की ओर जा रहे थे। सुबह करीब नौ बजे घुमारवीं की ओर से आ रही मोटरसाइकिल ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे में गंभीर रूप से घायल बालक राम को पहले क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर ले जाया गया, जहां से पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया, लेकिन उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस थाना घुमारवीं में एफआईआर दर्ज हुई थी। चालक ने दलील दी कि उसे आपराधिक मामले में बरी किया जा चुका है, लेकिन ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि मुआवजा मामलों में प्रमाण का स्तर अलग होता है। उपलब्ध साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शी गवाही के आधार पर चालक की लापरवाही साबित मानी गई। परिवार ने मृतक की आय 20 हजार रुपये प्रतिमाह बताई, लेकिन दस्तावेज पेश नहीं किए गए। अदालत ने 2014 की न्यूनतम मजदूरी 5100 रुपये प्रतिमाह मानकर आय निर्धारित की। मृतक की आयु पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार 65 वर्ष मानी गई और उसी आधार पर मल्टीप्लायर लगाया गया। प्रतिवादियों ने कहा कि बेटे वयस्क और विवाहित हैं, इसलिए आश्रित नहीं हैं। अदालत ने माना कि भारतीय पारिवारिक व्यवस्था में संयुक्त रूप से रहने की संभावना को देखते हुए पत्नी और बेटों को आश्रित माना जाएगा, क्योंकि अलग रहने का कोई प्रमाण पेश नहीं हुआ।
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वाहन मालिक ने दावा किया कि मोटरसाइकिल पहले ही चालक को बेच दी थी, लेकिन वाहन का पंजीकरण उसके नाम पर ही था। अदालत ने कहा कि मोटर वाहन कानून के अनुसार पंजीकृत मालिक ही जिम्मेदार माना जाएगा। दुर्घटना के समय वाहन का बीमा भी प्रभावी नहीं था। ऐसे में चालक और पंजीकृत मालिक दोनों को संयुक्त रूप से मुआवजा देने का आदेश दिया गया।
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अदालत ने आय हानि 3,21,300 रुपये तय की। इसके अलावा अंतिम संस्कार खर्च, संपत्ति हानि और चारों आश्रितों को कंसोर्टियम मिलाकर कुल 5,30,300 रुपये मुआवजा निर्धारित किया गया।