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Bilaspur News: सिविल अस्पताल बरठीं के चिकित्सकों के आवास बने खंडहर
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- चिकित्सक किराए के मकान में रहने को हुए मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। सिविल अस्पताल बरठीं में चिकित्सकों के लिए 60 के दशक में बनाए गए आवास आज खंडहर बन चुके हैं। 25 पंचायतों को स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले यह चिकित्सक किराए के कमरों में रहने को मजबूर हैं। राजनीतिक दल अथाह विकास करवाने के खोखले दावे करते हैं, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है।
सरकारी रिहायशी मकानों की आज तक किसी भी भाजपा और कांग्रेस के नेता ने सुध नहीं ली। लोगों ने बताया कि लगभग पांच चुनावों से लगातार वे भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के सामने सीएच में चल रही असुविधाओं को उठाते रहे हैं। सभी नेता जीतने के बाद समस्या को हल करने का वायदा तो करते हैं, लेकिन जीत जाने के बाद समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं। मकान खंडहर हो चुके हैं। कुछ को तो नाम मात्र मरम्मत करवा लिया गया है, लेकिन मुख्य चिकित्सक का आवास लगभग 21 साल से रहने योग्य नहीं है। कई बार विभाग की ओर से लिखित में लोक निर्माण विभाग से इसका प्राक्कलन तैयार कर उच्चाधिकारियों और सरकार को भेजा जा चुका है, लेकिन किसी भी नेता या सरकार ने इसकी सुध नहीं ली। रोगी कल्याण समिति की बैठक में विधायक के समक्ष हर बार भवन को गिराए जाने और उसकी मरम्मत करने के लिए कहा गया, लेकिन हालात जस के तस हैं। भवन में मात्र दीवारें खड़ी हैं। छत पर घास उगी हुई है। दरवाजे-खिड़कियों का नामोनिशान नहीं है। सिविल अस्पताल को जाते समय गेट के बिल्कुल सामने यह खंडहर भवन मरीजों का स्वागत करता है। सरकार न तो इसकी आज तक मरम्मत करा सकी और न ही इसको गिराने के लिए कोई कार्रवाई की गई। उधर सिविल अस्पताल के प्रभारी डॉक्टर अरविंद टंडन ने बताया कि भवन को गिराने के लिए इससे पहले दो बार बोली लगाई गई, लेकिन रेट ज्यादा होने के कारण कोई भी व्यक्ति लेने को तैयार नहीं हुआ उन्होंने बताया कि उच्चाधिकारियों से बातचीत कर जल्द ही भवन को गिराने के लिए कम रेट में ऑक्शन कराई जाएगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। सिविल अस्पताल बरठीं में चिकित्सकों के लिए 60 के दशक में बनाए गए आवास आज खंडहर बन चुके हैं। 25 पंचायतों को स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले यह चिकित्सक किराए के कमरों में रहने को मजबूर हैं। राजनीतिक दल अथाह विकास करवाने के खोखले दावे करते हैं, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है।
सरकारी रिहायशी मकानों की आज तक किसी भी भाजपा और कांग्रेस के नेता ने सुध नहीं ली। लोगों ने बताया कि लगभग पांच चुनावों से लगातार वे भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के सामने सीएच में चल रही असुविधाओं को उठाते रहे हैं। सभी नेता जीतने के बाद समस्या को हल करने का वायदा तो करते हैं, लेकिन जीत जाने के बाद समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं। मकान खंडहर हो चुके हैं। कुछ को तो नाम मात्र मरम्मत करवा लिया गया है, लेकिन मुख्य चिकित्सक का आवास लगभग 21 साल से रहने योग्य नहीं है। कई बार विभाग की ओर से लिखित में लोक निर्माण विभाग से इसका प्राक्कलन तैयार कर उच्चाधिकारियों और सरकार को भेजा जा चुका है, लेकिन किसी भी नेता या सरकार ने इसकी सुध नहीं ली। रोगी कल्याण समिति की बैठक में विधायक के समक्ष हर बार भवन को गिराए जाने और उसकी मरम्मत करने के लिए कहा गया, लेकिन हालात जस के तस हैं। भवन में मात्र दीवारें खड़ी हैं। छत पर घास उगी हुई है। दरवाजे-खिड़कियों का नामोनिशान नहीं है। सिविल अस्पताल को जाते समय गेट के बिल्कुल सामने यह खंडहर भवन मरीजों का स्वागत करता है। सरकार न तो इसकी आज तक मरम्मत करा सकी और न ही इसको गिराने के लिए कोई कार्रवाई की गई। उधर सिविल अस्पताल के प्रभारी डॉक्टर अरविंद टंडन ने बताया कि भवन को गिराने के लिए इससे पहले दो बार बोली लगाई गई, लेकिन रेट ज्यादा होने के कारण कोई भी व्यक्ति लेने को तैयार नहीं हुआ उन्होंने बताया कि उच्चाधिकारियों से बातचीत कर जल्द ही भवन को गिराने के लिए कम रेट में ऑक्शन कराई जाएगी।
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