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पुरानी पेंशन बहाली के लिए 24 को प्रदेश भर में गरजेगी एनपीएसईए
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बिलासपुर। पुरानी पेंशन बहाली के लिए एनपीएसईए 24 अक्तूबर को प्रदेशभर में सांकेतिक धरना देकर सरकार को चेताएंगे। संघ ने साफ किया कि सरकार कर्मचारियों के धरना प्रदर्शनों को हल्के में न ले। इस बार अगर मांगों पर सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया तो इस आंदोलन को उग्र किया जाएगा। प्रदेश के करीब 1.40 लाख कर्मी अपने हकों की लड़ाई लडे़ंगे। कहा कि उन्हें किसी निजी संस्थान से नहीं बल्कि सरकारी खाते से पेंशन दी जाए।
एनपीएसईए के जिला प्रधान राजेंद्र कुमार वर्धन ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली को लेकर 24 अक्तूबर को बिलासपुर में जिलाधीश कार्यालय के सामने सांकेतिक धरना-प्रदर्शन करेंगे। इसमें विभिन्न विभागों के कर्मचारी भाग लेंगे। 24 अक्तूबर को हर जिला मुख्यालय में प्रदर्शन होगा। बिलासपुर में रोष प्रदर्शन श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर से शुरू होगा। इसके बाद जिलाधीश कार्यालय में लगभग दो घंटे का सांकेतिक धरना प्रदर्शन होगा। वर्धन ने कहा कि केंद्र सरकार ने साल 2003 में न्यू पेंशन स्कीम शुरू की थी। एक निजी एजेंसी को कांट्रेक्ट दिया गया है। कंपनी कर्मचारियों को शेयर मार्केट के हिसाब से पेंशन दे रही है। जोकि प्रतिमाह 2 हजार रुपये से भी कम है। इससे बुढ़ापे की जरूरतें पूरी करना तो दूर लेकिन एक माह की रोजी रोटी चलाना भी मुमकिन नहीं है।
राज्य कार्यकारिणी के मुख्य सलाहकार अश्वनी राणा ने कहा कि केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2004 से अपने कर्मचारियों के लिए एनपीएस को लागू किया। लेकिन प्रदेश सरकार ने 15 मई 2003 से इस काले कानून को कर्मचारियों पर थोप दिया। कहा कि 2003 के बाद देश में सिर्फ दो ही कैटेगिरी के लोगों को पेंशन के अधीन रखा गया है। इनमें राजनेता और आर्मी शामिल है। पैरा मिल्ट्री के जवानों को भी इस दायरे से बाहर रखा गया है। संगठन चाहता है कि सरकार किसी एजेंसी की जगह खुद कर्मचारियों को पेंशन का भुगतान करे। पुरानी पेंशन स्कीम को लागू करे। राज्य कोषाध्यक्ष शशी पाल शर्मा ने कहा कि सरकारी कर्मचारी को निजी काम करने का अधिकार नहीं है। सरकार तीन या पांच बजे के बाद उन्हें अपनी मर्जी से अन्य कार्य करने का अधिकार दे। ताकि वे अपने बुढ़ापे को सुरक्षित कर सकें। संगठन ने मांग की कि प्रदेश सरकार पारिवारिक पेंशन की केंद्र सरकार की 2009 की अधिसूचना को जल्द लागू करे। इस मौके पर जिला उपप्रधान भूपेंद्र, राज्य प्लानिंग कमेटी के सलाहकार जावेद इकबाल, राज्य कोषाध्यक्ष शशीपाल शर्मा, एनपीएसईए सदर खंड के प्रधान अजय कुमार डोड मौजूद रहे।
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एनपीएसईए के जिला प्रधान राजेंद्र कुमार वर्धन ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली को लेकर 24 अक्तूबर को बिलासपुर में जिलाधीश कार्यालय के सामने सांकेतिक धरना-प्रदर्शन करेंगे। इसमें विभिन्न विभागों के कर्मचारी भाग लेंगे। 24 अक्तूबर को हर जिला मुख्यालय में प्रदर्शन होगा। बिलासपुर में रोष प्रदर्शन श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर से शुरू होगा। इसके बाद जिलाधीश कार्यालय में लगभग दो घंटे का सांकेतिक धरना प्रदर्शन होगा। वर्धन ने कहा कि केंद्र सरकार ने साल 2003 में न्यू पेंशन स्कीम शुरू की थी। एक निजी एजेंसी को कांट्रेक्ट दिया गया है। कंपनी कर्मचारियों को शेयर मार्केट के हिसाब से पेंशन दे रही है। जोकि प्रतिमाह 2 हजार रुपये से भी कम है। इससे बुढ़ापे की जरूरतें पूरी करना तो दूर लेकिन एक माह की रोजी रोटी चलाना भी मुमकिन नहीं है।
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राज्य कार्यकारिणी के मुख्य सलाहकार अश्वनी राणा ने कहा कि केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2004 से अपने कर्मचारियों के लिए एनपीएस को लागू किया। लेकिन प्रदेश सरकार ने 15 मई 2003 से इस काले कानून को कर्मचारियों पर थोप दिया। कहा कि 2003 के बाद देश में सिर्फ दो ही कैटेगिरी के लोगों को पेंशन के अधीन रखा गया है। इनमें राजनेता और आर्मी शामिल है। पैरा मिल्ट्री के जवानों को भी इस दायरे से बाहर रखा गया है। संगठन चाहता है कि सरकार किसी एजेंसी की जगह खुद कर्मचारियों को पेंशन का भुगतान करे। पुरानी पेंशन स्कीम को लागू करे। राज्य कोषाध्यक्ष शशी पाल शर्मा ने कहा कि सरकारी कर्मचारी को निजी काम करने का अधिकार नहीं है। सरकार तीन या पांच बजे के बाद उन्हें अपनी मर्जी से अन्य कार्य करने का अधिकार दे। ताकि वे अपने बुढ़ापे को सुरक्षित कर सकें। संगठन ने मांग की कि प्रदेश सरकार पारिवारिक पेंशन की केंद्र सरकार की 2009 की अधिसूचना को जल्द लागू करे। इस मौके पर जिला उपप्रधान भूपेंद्र, राज्य प्लानिंग कमेटी के सलाहकार जावेद इकबाल, राज्य कोषाध्यक्ष शशीपाल शर्मा, एनपीएसईए सदर खंड के प्रधान अजय कुमार डोड मौजूद रहे।
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