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नौकरी से निकाले गए वर्करों की योजना के जेई से हुई कहासुनी
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बरठीं (बिलासपुर)। सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग की उठाऊ पेयजल योजना मलारी बल्हसीणा के अंतर्गत पिछले आठ वर्षों से आउटसोर्स पर ठेकेदार के माध्यम से कार्यरत वर्करों और पेयजल योजना के कनिष्ठ अभियंता के बीच सोमवार सुबह कहासुनी हो गई। योजना से निकाले गए वर्करों में विभाग और सरकार के खिलाफ रोष है।
उल्लेखनीय है कि उक्त आठ वर्कर पिछले आठ साल से इस पेयजल योजना में कार्यरत हैं। वहीं आठ साल बाद विभाग ने एकाएक इनको निकाल दिया। इससे उक्त वर्करों के परिवारों पर रोजी-रोटी की बन गई है। योजना से निकाले हुए वर्करों निर्मल सिंह, मदन सिंह, बलबीर सिंह, सुनील कुमार, पवन कुमार, प्रीतम सिंह, राकेश कुमार व पवन कुमार ने कहा कि वे पिछले आठ सालों से सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग उपमंडल कलोल के अंतर्गत उठाऊ पेयजल योजना मलारी बल्हसीणा में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि कार्यकाल का एग्रीमेंट 28 मार्च 2020 तक है। लेकिन आईपीएच विभाग ने राजनीतिक दबाव के चलते एकाएक अपनी किसी चहेती अन्य कंपनी को टेंडर दे दिया है। इस कारण उन्हें नौकरी से निकालने का फरमान दे दिया है।
वर्करों ने कहा कि विभाग ने लिखित में नहीं बल्कि मौखिक रूप से फिटर के माध्यम से फरमान दिया है कि उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। सोमवार सुबह पेयजल योजना पर कनिष्ठ अभियंता और इन कर्मचारियों के बीच नोंकझोंक भी हुई। इन कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें जेई ने पुलिस के हवाले करने की बात कही। इन लोगों ने बताया कि अगर रोजी रोटी छीनी गई तो अपने परिवार सहित सड़कों पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। ठेकेदार किशोरी लाल ने बताया कि टेंडर तो 28 मार्च 2020 तक है लेकिन विभाग ने इसे खत्म कर दिया है। कनिष्ठ अभियंता कृष्ण लाल गुलेरिया ने बताया कि कंपनी का टेंडर खत्म हो चुका है और अगर वे अवैध रूप से जबरदस्ती स्कीम पर आएंगे तो उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जबकि अधिशाषी अभियंता देवराज चौहान ने बताया कि पहले वाली कंपनी का टेंडर खत्म हो चुका है और नई कंपनी को टेंडर दिया गया है। इस कारण नए कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है।
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उल्लेखनीय है कि उक्त आठ वर्कर पिछले आठ साल से इस पेयजल योजना में कार्यरत हैं। वहीं आठ साल बाद विभाग ने एकाएक इनको निकाल दिया। इससे उक्त वर्करों के परिवारों पर रोजी-रोटी की बन गई है। योजना से निकाले हुए वर्करों निर्मल सिंह, मदन सिंह, बलबीर सिंह, सुनील कुमार, पवन कुमार, प्रीतम सिंह, राकेश कुमार व पवन कुमार ने कहा कि वे पिछले आठ सालों से सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग उपमंडल कलोल के अंतर्गत उठाऊ पेयजल योजना मलारी बल्हसीणा में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि कार्यकाल का एग्रीमेंट 28 मार्च 2020 तक है। लेकिन आईपीएच विभाग ने राजनीतिक दबाव के चलते एकाएक अपनी किसी चहेती अन्य कंपनी को टेंडर दे दिया है। इस कारण उन्हें नौकरी से निकालने का फरमान दे दिया है।
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वर्करों ने कहा कि विभाग ने लिखित में नहीं बल्कि मौखिक रूप से फिटर के माध्यम से फरमान दिया है कि उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। सोमवार सुबह पेयजल योजना पर कनिष्ठ अभियंता और इन कर्मचारियों के बीच नोंकझोंक भी हुई। इन कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें जेई ने पुलिस के हवाले करने की बात कही। इन लोगों ने बताया कि अगर रोजी रोटी छीनी गई तो अपने परिवार सहित सड़कों पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। ठेकेदार किशोरी लाल ने बताया कि टेंडर तो 28 मार्च 2020 तक है लेकिन विभाग ने इसे खत्म कर दिया है। कनिष्ठ अभियंता कृष्ण लाल गुलेरिया ने बताया कि कंपनी का टेंडर खत्म हो चुका है और अगर वे अवैध रूप से जबरदस्ती स्कीम पर आएंगे तो उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जबकि अधिशाषी अभियंता देवराज चौहान ने बताया कि पहले वाली कंपनी का टेंडर खत्म हो चुका है और नई कंपनी को टेंडर दिया गया है। इस कारण नए कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है।
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