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Bilaspur News: आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण का आरोप नहीं हुआ साबित, दो आरोपी बरी

Sat, 27 Jun 2026 11:36 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Sat, 27 Jun 2026 11:36 PM IST
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Charge of abetment of suicide not proved, two accused acquitted
घुमारवीं की अतिरिक्त सत्र अदालत ने मामले में सुनाया फैसला
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कथित सुसाइड नोट की विश्वसनीयता पर जताया संदेह

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं की अतिरिक्त सत्र अदालत ने वर्ष 2021 के एक आत्महत्या मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण के आरोप में नामजद दोनों आरोपियों को बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष भारतीय दंड संहिता की धारा 306 एवं 34 के तहत आरोप साबित नहीं कर सका।
अदालत ने कहा कि अभियोजन ने 22 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। लेकिन ये साक्ष्य आरोपियों द्वारा मृतक को आत्महत्या के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उकसाने को साबित करने में पर्याप्त नहीं थे। 29 नवंबर 2021 को तलाई के एक गेस्ट हाउस में एक युवक का शव फंदे से लटका मिला था। कमरे से एक डायरी मिली थी, जिसमें कथित सुसाइड नोट था। पुलिस ने आरोप लगाया था कि मृतक का विवाह प्रस्ताव एक विवाहित महिला से था। उसे तलाक के बाद विवाह का आश्वासन दिया गया था। मृतक ने आरोपियों के खातों में पैसे जमा कराए थे, जो वापस नहीं मिले। इससे वह मानसिक तनाव में आ गया और उसने आत्महत्या कर ली। पुलिस ने इसी आधार पर अदालत में चालान पेश किया था।
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साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर संदेह
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन के कई साक्ष्य भरोसेमंद नहीं थे। कथित सुसाइड नोट की विश्वसनीयता पर संदेह बना रहा। शिकायतकर्ता ने मृतक की हस्तलिपि अपने बच्चों की कॉपी से दी थी, जो स्पष्ट नहीं थी। डायरी की सीलिंग को लेकर भी अभियोजन और शिकायतकर्ता के बयानों में विरोधाभास था। इन परिस्थितियों में केवल सुसाइड नोट के आधार पर दोष सिद्ध करना सुरक्षित नहीं था।
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गवाहों का मुकरना और वित्तीय साक्ष्य
अभियोजन जिन दो स्वतंत्र गवाहों पर निर्भर था, वे अदालत में अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। ये गवाह विवाह के प्रस्ताव और पैसे वापस न मिलने की बात साबित करने वाले थे। आरोपियों के बैंक खातों से भी मृतक द्वारा कोई बड़ी राशि जमा कराने का ठोस साक्ष्य नहीं मिला। सामान्य बैंकिंग लेन-देन तो मिले, पर उन्हें मृतक से जोड़ने वाला प्रमाण नहीं था। अदालत ने कहा कि आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण तभी बनता है जब आरोपी का कृत्य स्पष्ट हो।
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