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नघ्यार पंचायत प्रधान और झबोला पंचायत उपप्रधान हुए निलंबित
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बिलासपुर। तलाई ग्राम सेवा सहकारी सभा में 33 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में हिरासत में रहे 2 पंचायत प्रतिनिधियों को अपने पद से हाथ धोना पड़ा है। पंचायती राज अधिनियम के तहत 14 दिनों से अधिक समय के लिए हिरासत में रहे पंचायत पदाधिकारियों को पद से हटाने का प्रावधान है। इसी के आधार पर उपायुक्त राजेश्वर गोयल ने नघ्यार पंचायत प्रधान सुशील कुमार और झबोला पंचायत उपप्रधान अश्विनी कुमार को पद से निलंबित कर दिया है। उन्हें पंचायत से संबंधित किसी भी तरह की संपत्ति या दस्तावेज सचिव को सौंपने के आदेश दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि तलाई ग्राम सेवा सहकारी सभा में करोड़ों रुपये का घोटाला उजागर हुआ है। इसकी गाज सभा के कई सदस्यों पर गिर चुकी है। पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इनमें नघ्यार पंचायत प्रधान सुशील कुमार और झबोला के उपप्रधान अश्विनी कुमार भी शामिल थे। इन दोनों पंचायत प्रतिनिधियों के साथ ही सभा के अन्य सदस्य एक माह से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहे हैं। अब उन्हें जमानत मिल चुकी है।
जानकारी के अनुसार पंचायती राज अधिनियम के तहत 14 दिनों से अधिक समय तक हिरासत में रहने पर पंचायत प्रतिनिधियों को पद से हटाया जा सकता है। नघ्यार पंचायत प्रधान व झबोला के उपप्रधान के एक माह से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहने की वजह से उन्हें गत 22 अक्तूूबर को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। हालांकि उन्होंने इसका जवाब भी दिया लेकिन वह तथ्यों के विपरीत और असंतोषजनक पाया गया।
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ताजा घटनाक्रम में उपायुक्त ने पंचायती राज अधिनियम के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए नघ्यार के प्रधान सुशील कुमार व झबोला के उपप्रधान अश्विनी कुमार को तत्काल प्रभाव से पद से निलंबित कर दिया है। उन्हें यह भी आदेश दिया गया है कि यदि उनके पास पंचायत से संबंधित किसी भी तरह की चल-अचल संपत्ति है तो वे उसे पंचायत सचिव को सौंप दें।
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उल्लेखनीय है कि तलाई ग्राम सेवा सहकारी सभा में करोड़ों रुपये का घोटाला उजागर हुआ है। इसकी गाज सभा के कई सदस्यों पर गिर चुकी है। पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इनमें नघ्यार पंचायत प्रधान सुशील कुमार और झबोला के उपप्रधान अश्विनी कुमार भी शामिल थे। इन दोनों पंचायत प्रतिनिधियों के साथ ही सभा के अन्य सदस्य एक माह से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहे हैं। अब उन्हें जमानत मिल चुकी है।
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जानकारी के अनुसार पंचायती राज अधिनियम के तहत 14 दिनों से अधिक समय तक हिरासत में रहने पर पंचायत प्रतिनिधियों को पद से हटाया जा सकता है। नघ्यार पंचायत प्रधान व झबोला के उपप्रधान के एक माह से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहने की वजह से उन्हें गत 22 अक्तूूबर को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। हालांकि उन्होंने इसका जवाब भी दिया लेकिन वह तथ्यों के विपरीत और असंतोषजनक पाया गया।
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ताजा घटनाक्रम में उपायुक्त ने पंचायती राज अधिनियम के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए नघ्यार के प्रधान सुशील कुमार व झबोला के उपप्रधान अश्विनी कुमार को तत्काल प्रभाव से पद से निलंबित कर दिया है। उन्हें यह भी आदेश दिया गया है कि यदि उनके पास पंचायत से संबंधित किसी भी तरह की चल-अचल संपत्ति है तो वे उसे पंचायत सचिव को सौंप दें।