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Bilaspur News: सदियों पुराने प्राकृतिक जल स्रोत नष्ट होने का खतरा

Thu, 19 Feb 2026 11:36 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Thu, 19 Feb 2026 11:36 PM IST
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Centuries-old natural water sources are in danger of being destroyed.
गोबिंद सागर झील के किनारे स्थित बावड़ी, जिसमें रेलवे निर्माण के कारण भर गई है मिट्टी। स्रोत: जाग
रेल लाइन निर्माण से प्राकृतिक झरनों पर बना संकट
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर में गोबिंद सागर झील के समीप रेलवे लाइन निर्माण के लिए बनाए जा रहे विशाल खंभों के कारण कई शताब्दियों पुराने प्राकृतिक जल स्रोत, झरने और चश्मे बर्बादी के कगार पर हैं। नागरिकों और वरिष्ठ समाजसेवियों का कहना है कि यदि इन बहुमूल्य ठंडे और स्वच्छ जल के स्रोतों को संरक्षित नहीं किया गया, तो बिलासपुर शहर और इसके आसपास के लाखों लोग इस धरोहर से वंचित रह जाएंगे।

वरिष्ठ नागरिकों और समाजसेवियों की टीम ने सतलुज नदी के किनारे इन जल स्रोतों का निरीक्षण किया। इसमें पूर्व विधायक केके कौशल, समाजसेवी केश पठानिया, केशव नरयाल, रामपाल डोगरा, हंस राज कपिल और एसआर आजाद शामिल रहे। बताया कि कुछ प्राकृतिक झरने पहले ही नष्ट हो चुके हैं, जबकि अन्य अभी भी खतरे में हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से अपील की कि रेलवे निर्माण कंपनी को सचेत किया जाए और शताब्दियों पुराने सभी जल स्रोतों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए जाएं। कहा कि बिलासपुर नगर ऊंचे पठार पर स्थित होने के कारण पेयजल समस्या से जूझ रहा है। नगर के कई क्षेत्र पानी की कमी के चलते अभावग्रस्त हैं। यदि इन प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण किया जाए और उनका जल एकत्रित करने की योजना बनाई जाए, तो बिलासपुर के पेयजल संकटग्रस्त क्षेत्रों की आपूर्ति आसानी से पूरी की जा सकती है। इसके लिए अन्य किसी भी योजना की अपेक्षा कम लागत में ही समाधान संभव है। सुझाव दिया कि सभी झरनों और चश्मों का संरक्षण कर उनके जल का एकत्रीकरण किया जाए। साथ ही रेलवे निर्माण कंपनी को जिम्मेदारी दी जाए कि निर्माण कार्य के दौरान किसी भी जल स्रोत को नुकसान न पहुंचे। केके कौशल ने कहा कि यह हमारी शताब्दियों पुरानी विरासत है। यदि इसे बचाया नहीं गया तो आने वाली पीढ़ियों के लिए यह मूल्यवान जल धरोहर खो जाएगी। प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
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