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Bilaspur News: विकास की भेंट चढ़ गई आस्था, छांव और इतिहास से जुड़ी सदियों पुरानी विरासत

Thu, 28 Aug 2025 11:47 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Thu, 28 Aug 2025 11:47 PM IST
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Centuries old heritage related to faith, shade and history became a victim of development
विनायकघाट में फोरलेन के लिए काटे गए वटवृक्ष। संवाद
शिमला-मटौर फोरलेन निर्माण की जद में आए विनायक घाट, ब्रह्मपुखर के पीपल-वट वृक्ष
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स्थानीय लोगों को पेड़ों से रहा है गहरा भावनात्मक लगाव, जताया दुख
गर्मियों में उनकी घनी छांव के नीचे बैठकर थकान मिटाते थे लोग व मुसाफिर
गोपाल शर्मा
जुखाला(बिलासपुर)। शिमला-मटौर फोरलेन निर्माण कार्य जून से शुरू हो गया है। शुरुआती चरण में भवनों और पेड़ों को हटाने की कार्रवाई चल रही है। इसी प्रक्रिया में प्राचीन धरोहरें भी खतरे में पड़ गई हैं। विनायक घाट और ब्रह्मपुखर के सैकड़ों साल पुराने पीपल और बट वृक्ष सड़क चौड़ीकरण की जद में आ गए हैं। इनमें से विनायक घाट के दो पेड़ पहले ही काट दिए हैं, जबकि बाकी पर आरी चलना तय है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन पेड़ों से उनका गहरा भावनात्मक लगाव रहा है। गर्मियों में इनकी घनी छांव के नीचे बैठकर लोग व मुसाफिर अपनी थकान मिटाते थे। बंदला प्रणाली, मंझोत, पनदोह और स्याहोला सहित आसपास के गांवों के लोग यहां विश्राम किया करते थे। बुजुर्गों ने इन्हें इसी उद्देश्य से लगाया था कि आने वाली पीढ़ियां लाभ उठा सकें। ग्रामीण बताते हैं कि ये वृक्ष न सिर्फ शीतल छांव देते थे, बल्कि 24 घंटे शुद्ध ऑक्सीजन का स्रोत भी थे। इन वृक्षों के साथ ही विनायक घाट का लखु राम चौधरी का शीतल जल का परो भी लोगों की प्यास बुझाने के लिए प्रसिद्ध था। अब पेड़ों के काटने और परो के खत्म हो जाने से यह पूरा स्थान केवल बीते समय की यादों में रह जाएगा। ब्रह्मपुखर का नाम ही पीपल (ब्रह्मा) के नाम पर पड़ा था। यहां कभी पानी की एक पुखर हुआ करती थी, जिसे 1980 के दशक में चौक बनाते समय बंद कर दिया गया था। अब इन प्राचीन पीपल और वट वृक्षों पर आरी चलने से क्षेत्र की बची-खुची पहचान भी समाप्त हो जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल पेड़ों का कटना नहीं है, बल्कि एक ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर का अंत है।
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ग्रामीणों ने कहा कि एनएचएआई ने फोरलेन का नक्शा बनाते समय यदि इन वृक्षों को बचाने पर ध्यान दिया होता, तो यह धरोहर सुरक्षित रह सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना बनाने में लापरवाही बरती गई और अब आस्था व इतिहास दोनों विकास की भेंट चढ़ रहे हैं। इस मामले में एसडीएम सदर राजवीर सिंह ने बताया कि उन्होंने एनएचएआई को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि फोरलेन निर्माण के दौरान जहां तक संभव हो, ऐसे पेड़ों को बचाने का प्रयास किया जाए। संवाद

विनायकघाट में फोरलेन के लिए काटे गए वटवृक्ष। संवाद

विनायकघाट में फोरलेन के लिए काटे गए वटवृक्ष। संवाद

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