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रुद्र पूजा करने से दूर होते है ग्रह, कर्म, पितृ और वास्तु दोष : आदित्य
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- आर्ट ऑफ लिविंग ने बाबा विश्वकर्मा मंदिर में कराई रुद्र पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से बाबा विश्वकर्मा मंदिर परिसर में रुद्र पूजा का आयोजन किया गया। इस अनुष्ठान में ब्रह्मचारी आदित्य के सानिध्य में पूजा-अर्चना संपन्न हुई। पंडित करुणाकर और पंडित किशोर जी ओडिसा से वैदिक पाठ द्वारा पूजा की गई।
ब्रम्हाचारी आदित्य ने रुद्र पूजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रुद्र अर्थात भगवान शिव जो सभी दुखों का विनाश कर देते हैं। पूजा का मतलब पूर्णता जन्म लेना है, अर्थात जो भाव पूर्णता से जन्म लेता है उसे पूजा कहते हैं। उन्होंने बताया कि रुद्र पूजा प्राचीन सनातन संस्कृति की वैदिक पद्धति है। इसमें सबसे पहले गुरु पूजा, गणपति पूजा, सूर्य, भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा क्रम से की जाती है। ईश्वर एक है, लेकिन उनके रूप अनेक हैं जो अलग-अलग शक्ति को दर्शाता है। रुद्र पूजा में पारिवारिक, सामाजिक एवं संपूर्ण प्रकृति की सुरक्षा और सुंदरता को बनाए रखने के लिए पहले गुरु से प्रार्थना की जाती है और फिर भगवान शिव की स्तुति करते हैं। उन्होंने बताया कि रुद्र पूजा से ग्रह दोष, कर्म दोष, पितृ, प्रकृति और वास्तु दोष दूर हो जाते हैं। इस अवसर पर संस्था के आयोजक एवं शिक्षक आर्ट ऑफ लिविंग रचना मेहता, कनिका, शगुन, प्रियंका, मीरा भोगल आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से बाबा विश्वकर्मा मंदिर परिसर में रुद्र पूजा का आयोजन किया गया। इस अनुष्ठान में ब्रह्मचारी आदित्य के सानिध्य में पूजा-अर्चना संपन्न हुई। पंडित करुणाकर और पंडित किशोर जी ओडिसा से वैदिक पाठ द्वारा पूजा की गई।
ब्रम्हाचारी आदित्य ने रुद्र पूजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रुद्र अर्थात भगवान शिव जो सभी दुखों का विनाश कर देते हैं। पूजा का मतलब पूर्णता जन्म लेना है, अर्थात जो भाव पूर्णता से जन्म लेता है उसे पूजा कहते हैं। उन्होंने बताया कि रुद्र पूजा प्राचीन सनातन संस्कृति की वैदिक पद्धति है। इसमें सबसे पहले गुरु पूजा, गणपति पूजा, सूर्य, भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा क्रम से की जाती है। ईश्वर एक है, लेकिन उनके रूप अनेक हैं जो अलग-अलग शक्ति को दर्शाता है। रुद्र पूजा में पारिवारिक, सामाजिक एवं संपूर्ण प्रकृति की सुरक्षा और सुंदरता को बनाए रखने के लिए पहले गुरु से प्रार्थना की जाती है और फिर भगवान शिव की स्तुति करते हैं। उन्होंने बताया कि रुद्र पूजा से ग्रह दोष, कर्म दोष, पितृ, प्रकृति और वास्तु दोष दूर हो जाते हैं। इस अवसर पर संस्था के आयोजक एवं शिक्षक आर्ट ऑफ लिविंग रचना मेहता, कनिका, शगुन, प्रियंका, मीरा भोगल आदि मौजूद रहे।
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