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श्रीमद् भागवत कथा श्रवण मात्र से हृदय में विराजते हैं श्रीहरि : रसिक
Fri, 14 Feb 2025 11:17 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 14 Feb 2025 11:17 PM IST
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बिलासपुर के हीरापुर गांव में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में भजन कीर्तन करते श्रद्धालु । संवाद
-कथा में भागवत पुराण के महत्व का किया वर्णन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बिलासपुर की ग्राम पंचायत औहर के हीरापुर गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन करते हुए कथावाचक रसिक जी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा का महत्व बताया। उन्होंने बताया कि महर्षि वेद व्यास द्वारा संक्षेप में भागवत पुराण के स्थान, विषय और महत्व का वर्णन किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह पुराण हिंदू धर्म के आधारभूत ग्रंथों में से एक है और भगवान विष्णु के अवतारों की कथाएं इसमें विस्तृत रूप से प्रस्तुत हैं। भागवत पुराण के श्लोक और अध्यायों की संख्या के कारण इसे अष्टादश पुराणों में गिना जाता है। उन्होंने कहा कि इस पुराण के स्कंधों में विष्णु के अवतारों का संपूर्ण वर्णन है। स्कंध एक में सृष्टि का विस्तृत वर्णन है, जिसमें वेदों का महत्व और धर्म का उपदेश दिया गया है। स्कंध दो से दस तक में विष्णु के विभिन्न अवतारों की चरित्र कथाएं हैं, जिनमें श्रीकृष्ण का जीवन विशेष रूप से विस्तारपूर्वक बताया गया है। यहां पर उनके बाल लीलाएं, गोपियों के संग वन भ्रमण, रासलीला, कंस वध, गीता उपदेश, ब्रजवासियों के साथ नीति नियमों का पालन आदि का वर्णन मिलता है। उन्होंने कहा कि भागवत पुराण में रसभाव की अद्भुतता और भक्ति रस की अमृतधारा विद्यमान है। इसमें विभिन्न रसों के मधुर संगम से भरे गीत, विरह, मिलन, श्रृंगार, हास्य, भय, वीर, करुण आदि के अनेक विशेष उपाख्यान हैं, जो अध्यात्म तथा साहित्य के रंगों में भरे हुए हैं। श्रीमद् भागवत साक्षात भगवान का स्वरूप है। इसलिए श्रद्धापूर्वक इसकी पूजा-अर्चना की जाती है। इसके पठन और श्रवण से भोग और मोक्ष दोनों सुलभ हो जाते हैं। मन की शुद्धि के लिए इससे बड़ा कोई साधन नहीं है। भागवत के पाठ से कलियुग के समस्त दोष नष्ट हो जाते हैं। इसके श्रवण मात्र से हरि हृदय में आ विराजते हैं। कथा समापन पर भजन कीर्तन के बाद प्रसाद वितरण किया गया।
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बिलासपुर। बिलासपुर की ग्राम पंचायत औहर के हीरापुर गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन करते हुए कथावाचक रसिक जी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा का महत्व बताया। उन्होंने बताया कि महर्षि वेद व्यास द्वारा संक्षेप में भागवत पुराण के स्थान, विषय और महत्व का वर्णन किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह पुराण हिंदू धर्म के आधारभूत ग्रंथों में से एक है और भगवान विष्णु के अवतारों की कथाएं इसमें विस्तृत रूप से प्रस्तुत हैं। भागवत पुराण के श्लोक और अध्यायों की संख्या के कारण इसे अष्टादश पुराणों में गिना जाता है। उन्होंने कहा कि इस पुराण के स्कंधों में विष्णु के अवतारों का संपूर्ण वर्णन है। स्कंध एक में सृष्टि का विस्तृत वर्णन है, जिसमें वेदों का महत्व और धर्म का उपदेश दिया गया है। स्कंध दो से दस तक में विष्णु के विभिन्न अवतारों की चरित्र कथाएं हैं, जिनमें श्रीकृष्ण का जीवन विशेष रूप से विस्तारपूर्वक बताया गया है। यहां पर उनके बाल लीलाएं, गोपियों के संग वन भ्रमण, रासलीला, कंस वध, गीता उपदेश, ब्रजवासियों के साथ नीति नियमों का पालन आदि का वर्णन मिलता है। उन्होंने कहा कि भागवत पुराण में रसभाव की अद्भुतता और भक्ति रस की अमृतधारा विद्यमान है। इसमें विभिन्न रसों के मधुर संगम से भरे गीत, विरह, मिलन, श्रृंगार, हास्य, भय, वीर, करुण आदि के अनेक विशेष उपाख्यान हैं, जो अध्यात्म तथा साहित्य के रंगों में भरे हुए हैं। श्रीमद् भागवत साक्षात भगवान का स्वरूप है। इसलिए श्रद्धापूर्वक इसकी पूजा-अर्चना की जाती है। इसके पठन और श्रवण से भोग और मोक्ष दोनों सुलभ हो जाते हैं। मन की शुद्धि के लिए इससे बड़ा कोई साधन नहीं है। भागवत के पाठ से कलियुग के समस्त दोष नष्ट हो जाते हैं। इसके श्रवण मात्र से हरि हृदय में आ विराजते हैं। कथा समापन पर भजन कीर्तन के बाद प्रसाद वितरण किया गया।
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