{"_id":"625effbc3d490249256a141f","slug":"buses-in-poor-conditions-bilaspur-news-sml406196332","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले में सड़कों पर दौड़ रहीं परिवहन निगम की 50 फीसदी खटारा बसें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले में सड़कों पर दौड़ रहीं परिवहन निगम की 50 फीसदी खटारा बसें
विज्ञापन
बिलासपुर में निगम की बस में शीशे की जगह लगाई लोहे की शीट। पहले पॉलिथीन की शीट लगाकर रूट पर भेजी जा ?
- फोटो : BILASPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिलासपुर। प्रदेश सरकार ने परिवहन निगम की बसों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी किराया तो माफ कर दिया है, लेकिन सफर करना कितना सुरक्षित है इसकी कोई गारंटी नहीं है। जिले में निगम की 50 फीसदी बसें खटारा हैं जो सड़कों पर सवारियां लेकर दौड़ रही हैं। अधिकतर बसें तय मानकों को ताक पर रखकर सड़कों पर चलाई जा रही हैं।
बिलासपुर जिले में आयेदिन हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसें रूट पर चलते हुए खराब होना आम बात हो गई है। स्थायी समाधान करने की जगह निगम उस रूट पर दूसरी बस भेजकर सवारियों को गंतव्य तक पहुंचाता है। पिछले एक माह में पांच मामले ऐसे सामने आए हैं जिसमें निगम की बसों की कहीं ब्रेक फेल हुई तो कहीं इंजन खराब हो गए। हाल ही में तो बड़ा हादसा होने से टला। स्वारघाट के पास बस का डीजल टैंक ही गिर गया। ऐसे में परिवहन निगम की बसों में सफर कितना सुरक्षित है, इस पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
बिलासपुर डिपो में वर्तमान में 123 बसें लोकल और बाहरी रूटों पर चलती हैं। करीब 60 बसें ही पूरी तरह से फिट हैं। इनमें जीएस फोर बसें जो जीएस बाली के समय में खरीदी गई थीं, केवल वहीं मानकों के अनुसार सड़कों पर चल रही हैं। इसके अलावा अधिकतर बसों को मानकों को ताक पर रखकर चलाया जा रहा है।
विज्ञापन
परिवहन निगम की बसों के लिए मानक तय हैं। आठ लाख किलोमीटर बस चलने के बाद उसे निष्क्रिय घोषित कर दिया जाता है लेकिन निगम में पिछले करीब छह साल से नई बसों की खरीद नहीं हुई है। बिलासपुर डिपो में पुरानी बसों को ही जुगाड़ से चलाया जा रहा है और लोगों की जिंदगी को दाव पर लगाया जा रहा है। बंदला रूट पर चलने वाली बसें लगातार खराब होती हैं और इसके लिए लोग हंगामा भी कर चुके हैं। इसी माह घुमारवीं रूट पर चलने वाली बस के इंजन में खराबी आ गई थी। बस स्टैंड से बस को पिछले शीशे की जगह पॉलीथिन लगाकर रूट पर भेजा दिया गया। सोमवार को स्वारघाट के पास परिवहन निगम की बस का डीजल टैंक ही निकल गया। इसके बाद भी परिवहन निगम इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है। खटारा बसों को ही जुगाड़ से रूटों पर भेजा जा रहा है।
कोट्स
डिपो के सभी चालकों को हिदायत दी गई है कि वे रूट पर जाने से पहले बस को सही से चेक करें। चालक को अगर बस में कोई दिक्कत लगे तो उसे दूसरी बस दी जाएगी। बस का डीजल टैंक निकलना रूटीन की घटना नहीं, टैंक का नेट ढीला था जिस कारण वह निकल गया। बसों में छोटी-मोटी समस्या आती रहती है जिसकी मरम्मत कर दी जाती है।
विनोद ठाकुर, आरएम, बिलासपुर
विज्ञापन
बिलासपुर जिले में आयेदिन हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसें रूट पर चलते हुए खराब होना आम बात हो गई है। स्थायी समाधान करने की जगह निगम उस रूट पर दूसरी बस भेजकर सवारियों को गंतव्य तक पहुंचाता है। पिछले एक माह में पांच मामले ऐसे सामने आए हैं जिसमें निगम की बसों की कहीं ब्रेक फेल हुई तो कहीं इंजन खराब हो गए। हाल ही में तो बड़ा हादसा होने से टला। स्वारघाट के पास बस का डीजल टैंक ही गिर गया। ऐसे में परिवहन निगम की बसों में सफर कितना सुरक्षित है, इस पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
विज्ञापन
बिलासपुर डिपो में वर्तमान में 123 बसें लोकल और बाहरी रूटों पर चलती हैं। करीब 60 बसें ही पूरी तरह से फिट हैं। इनमें जीएस फोर बसें जो जीएस बाली के समय में खरीदी गई थीं, केवल वहीं मानकों के अनुसार सड़कों पर चल रही हैं। इसके अलावा अधिकतर बसों को मानकों को ताक पर रखकर चलाया जा रहा है।
विज्ञापन
परिवहन निगम की बसों के लिए मानक तय हैं। आठ लाख किलोमीटर बस चलने के बाद उसे निष्क्रिय घोषित कर दिया जाता है लेकिन निगम में पिछले करीब छह साल से नई बसों की खरीद नहीं हुई है। बिलासपुर डिपो में पुरानी बसों को ही जुगाड़ से चलाया जा रहा है और लोगों की जिंदगी को दाव पर लगाया जा रहा है। बंदला रूट पर चलने वाली बसें लगातार खराब होती हैं और इसके लिए लोग हंगामा भी कर चुके हैं। इसी माह घुमारवीं रूट पर चलने वाली बस के इंजन में खराबी आ गई थी। बस स्टैंड से बस को पिछले शीशे की जगह पॉलीथिन लगाकर रूट पर भेजा दिया गया। सोमवार को स्वारघाट के पास परिवहन निगम की बस का डीजल टैंक ही निकल गया। इसके बाद भी परिवहन निगम इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है। खटारा बसों को ही जुगाड़ से रूटों पर भेजा जा रहा है।
कोट्स
डिपो के सभी चालकों को हिदायत दी गई है कि वे रूट पर जाने से पहले बस को सही से चेक करें। चालक को अगर बस में कोई दिक्कत लगे तो उसे दूसरी बस दी जाएगी। बस का डीजल टैंक निकलना रूटीन की घटना नहीं, टैंक का नेट ढीला था जिस कारण वह निकल गया। बसों में छोटी-मोटी समस्या आती रहती है जिसकी मरम्मत कर दी जाती है।
विनोद ठाकुर, आरएम, बिलासपुर