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Bilaspur News: लघट महिला मंडल पर एफआईआर के विरोध में भाजपा का धरना 30 को
Sat, 27 Dec 2025 11:26 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 27 Dec 2025 11:26 PM IST
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परिधि गृह बिलासपुर में प्रैस वार्ता करते विधायक त्रिलोक जमवाल। संवाद
सदर भाजपा विधायक ने पुलिस, सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
बोले- चिट्टे के खिलाफ आवाज उठाने पर सरकार ने दिया महिलाओं को इनाम
एफआईआर करवाने वाले नेता का नाम सार्वजनिक व पुलिस अधिकारी को सस्पेंड करने की मांग की
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बरमाणा पंचायत के लघट गांव में नशे के खिलाफ संघर्ष कर रही महिलाओं पर दर्ज एफआईआर ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था, पुलिस की कार्यप्रणाली और सरकार की नीयत पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। चिट्टा (हेरोइन) तस्करी के खिलाफ आवाज उठा रही ग्रामीण महिलाओं के समर्थन में भाजपा खुलकर सामने आ गई है, जबकि सरकार और पुलिस प्रशासन कठघरे में खड़े नजर आ रहे हैं।
बिलासपुर परिधि गृह में भाजपा विधायक त्रिलोक जमवाल ने प्रेसवार्ता की। कहा कि यदि महिलाओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर तुरंत रद्द, एफआईआर करवाने वाले नेता का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया और जिम्मेदार पुलिस अधिकारी को निलंबित नहीं किया गया और नशे के खिलाफ खड़ी महिलाओं को सम्मानित नहीं किया, तो 30 दिसंबर को सदर भाजपा बड़े स्तर पर धरना देगी। कहा कि यदि इसके बाद भी सरकार नहीं जागी, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ चिट्टे की सूचना देने वालों पर एफआईआर दर्ज की जा रही है, जबकि दूसरी तरफ नशे के कारोबारियों के साथ नरमी बरती जा रही है। बताया कि 22 दिसंबर को लघट गांव में तीन युवक आपस में चिट्टे के लिए पैसों को लेकर झगड़ रहे थे। युवक एक-दूसरे से एक हजार रुपये मांग रहे थे और खुलेआम विवाद कर रहे थे। गांव की महिलाओं ने हालात को भांपते हुए साहस दिखाया, युवकों को रोका, उनका वीडियो बनाया और तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर बरमाणा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने युवकों के बयान भी दर्ज किए और उन महिलाओं के भी बयान लिए जिन्होंने नशे के खिलाफ कार्रवाई की थी। महिलाओं को उम्मीद थी कि चिट्टा कारोबारियों पर सख्त कार्रवाई होगी, लेकिन इसके उलट उसी दिन शाम करीब पांच बजे तक महिलाओं के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी गई। सवाल उठाया कि एक आम नागरिक की एफआईआर दर्ज करने में पुलिस कई बार हफ्तों और महीनों तक टालमटोल करती है, लेकिन यहां कुछ ही घंटों में महिलाओं पर केस दर्ज कर दिया गया। इतना ही नहीं, बरमाणा थाना के एसएचओ स्वयं मौके पर पहुंचकर बयान दर्ज करते रहे। महिलाओं पर ऐसी गंभीर धाराएं लगाई गईं, जिसमें सात साल तक की सजा का प्रावधान है।
इनसेट
शिकायत देने वाले नशे के सप्लायर
विधायक ने कहा कि जिन लोगों की शिकायत पर महिलाओं पर एफआईआर हुई है, वे स्वयं नशे के कारोबारी हैं और उन पर पहले से एनडीपीएस एक्ट के मामले दर्ज हैं। इसके बावजूद पुलिस ने बिना निष्पक्ष जांच के महिलाओं को आरोपी बना दिया। आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई एक कांग्रेस नेता के इशारे पर की गई है। उद्देश्य साफ है कि नशे के खिलाफ खड़ी महिलाओं को डराना, मानसिक रूप से प्रताड़ित करना और भविष्य में किसी भी तरह के विरोध से पीछे हटने पर मजबूर करना। जब प्रशासन और सरकार चिट्टा जैसे खतरनाक नशे को रोकने में पूरी तरह विफल हो गए, तब गांव की महिलाओं ने अपने बच्चों और समाज को बचाने की जिम्मेदारी खुद उठाई। लेकिन आज वही महिलाएं पुलिस की कार्रवाई का शिकार बन रही हैं।
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इनसेट
सरकार की कथनी करनी में फर्क
भाजपा विधायक ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार मंचों से नशा मुक्ति की बातें कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार और बरमाणा पुलिस चिट्टा माफिया के साथ मिली हुई प्रतीत होती है। महिलाओं पर की गई कार्रवाई इसका सबसे बड़ा प्रमाण है।
इनसेट
अभियान में सरकार के साथ है भाजपा, सरकार की मंशा पर सवाल
भाजपा विधायक ने कहा कि चिट्टे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में भाजपा ने सबसे पहले सरकार का समर्थन किया था। इसके बावजूद 26 दिसंबर को हुए सरकारी कार्यक्रम में जिले के तीन भाजपा विधायकों में से किसी एक को भी आमंत्रित नहीं किया गया। इससे साफ है कि सरकार वास्तव में नशे के खिलाफ एकजुटता नहीं चाहती।
इनसेट
महिलाओं को इनाम में मिली एफआईआर
मुख्यमंत्री द्वारा चिट्टे की सूचना देने वालों को इनाम देने की घोषणा पर कटाक्ष करते हुए विधायक ने कहा कि लघट की महिलाओं को इनाम के रूप में एफआईआर मिली है। उन्होंने ऐलान किया कि सरकार चाहे जो करे, लेकिन वे महिलाओं का मनोबल बढ़ाने के लिए अपनी ओर से 20 हजार रुपये की सहायता देंगे।
इनसेट
तीन साल बाद
सरकार को तीन साल बाद नशे के खिलाफ अभियान चलाने और बच्चों को जागरूक करने की याद आई है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि बिलासपुर जिले में वर्तमान में कितने नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र (रिहैब सेंटर) कार्यरत हैं और वर्ष 2023 के बाद कितने नए केंद्र खोले गए हैं। आरोप लगाया कि 26 दिसंबर को जब मुख्यमंत्री बच्चों को नशे के खिलाफ जागरूक करने आए थे, तब उनके आसपास चिट्टा माफिया, खनन माफिया और कॉन्ट्रैक्ट किलिंग माफिया मौजूद थे।
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बोले- चिट्टे के खिलाफ आवाज उठाने पर सरकार ने दिया महिलाओं को इनाम
एफआईआर करवाने वाले नेता का नाम सार्वजनिक व पुलिस अधिकारी को सस्पेंड करने की मांग की
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बरमाणा पंचायत के लघट गांव में नशे के खिलाफ संघर्ष कर रही महिलाओं पर दर्ज एफआईआर ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था, पुलिस की कार्यप्रणाली और सरकार की नीयत पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। चिट्टा (हेरोइन) तस्करी के खिलाफ आवाज उठा रही ग्रामीण महिलाओं के समर्थन में भाजपा खुलकर सामने आ गई है, जबकि सरकार और पुलिस प्रशासन कठघरे में खड़े नजर आ रहे हैं।
बिलासपुर परिधि गृह में भाजपा विधायक त्रिलोक जमवाल ने प्रेसवार्ता की। कहा कि यदि महिलाओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर तुरंत रद्द, एफआईआर करवाने वाले नेता का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया और जिम्मेदार पुलिस अधिकारी को निलंबित नहीं किया गया और नशे के खिलाफ खड़ी महिलाओं को सम्मानित नहीं किया, तो 30 दिसंबर को सदर भाजपा बड़े स्तर पर धरना देगी। कहा कि यदि इसके बाद भी सरकार नहीं जागी, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ चिट्टे की सूचना देने वालों पर एफआईआर दर्ज की जा रही है, जबकि दूसरी तरफ नशे के कारोबारियों के साथ नरमी बरती जा रही है। बताया कि 22 दिसंबर को लघट गांव में तीन युवक आपस में चिट्टे के लिए पैसों को लेकर झगड़ रहे थे। युवक एक-दूसरे से एक हजार रुपये मांग रहे थे और खुलेआम विवाद कर रहे थे। गांव की महिलाओं ने हालात को भांपते हुए साहस दिखाया, युवकों को रोका, उनका वीडियो बनाया और तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर बरमाणा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने युवकों के बयान भी दर्ज किए और उन महिलाओं के भी बयान लिए जिन्होंने नशे के खिलाफ कार्रवाई की थी। महिलाओं को उम्मीद थी कि चिट्टा कारोबारियों पर सख्त कार्रवाई होगी, लेकिन इसके उलट उसी दिन शाम करीब पांच बजे तक महिलाओं के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी गई। सवाल उठाया कि एक आम नागरिक की एफआईआर दर्ज करने में पुलिस कई बार हफ्तों और महीनों तक टालमटोल करती है, लेकिन यहां कुछ ही घंटों में महिलाओं पर केस दर्ज कर दिया गया। इतना ही नहीं, बरमाणा थाना के एसएचओ स्वयं मौके पर पहुंचकर बयान दर्ज करते रहे। महिलाओं पर ऐसी गंभीर धाराएं लगाई गईं, जिसमें सात साल तक की सजा का प्रावधान है।
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शिकायत देने वाले नशे के सप्लायर
विधायक ने कहा कि जिन लोगों की शिकायत पर महिलाओं पर एफआईआर हुई है, वे स्वयं नशे के कारोबारी हैं और उन पर पहले से एनडीपीएस एक्ट के मामले दर्ज हैं। इसके बावजूद पुलिस ने बिना निष्पक्ष जांच के महिलाओं को आरोपी बना दिया। आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई एक कांग्रेस नेता के इशारे पर की गई है। उद्देश्य साफ है कि नशे के खिलाफ खड़ी महिलाओं को डराना, मानसिक रूप से प्रताड़ित करना और भविष्य में किसी भी तरह के विरोध से पीछे हटने पर मजबूर करना। जब प्रशासन और सरकार चिट्टा जैसे खतरनाक नशे को रोकने में पूरी तरह विफल हो गए, तब गांव की महिलाओं ने अपने बच्चों और समाज को बचाने की जिम्मेदारी खुद उठाई। लेकिन आज वही महिलाएं पुलिस की कार्रवाई का शिकार बन रही हैं।
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सरकार की कथनी करनी में फर्क
भाजपा विधायक ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार मंचों से नशा मुक्ति की बातें कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार और बरमाणा पुलिस चिट्टा माफिया के साथ मिली हुई प्रतीत होती है। महिलाओं पर की गई कार्रवाई इसका सबसे बड़ा प्रमाण है।
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अभियान में सरकार के साथ है भाजपा, सरकार की मंशा पर सवाल
भाजपा विधायक ने कहा कि चिट्टे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में भाजपा ने सबसे पहले सरकार का समर्थन किया था। इसके बावजूद 26 दिसंबर को हुए सरकारी कार्यक्रम में जिले के तीन भाजपा विधायकों में से किसी एक को भी आमंत्रित नहीं किया गया। इससे साफ है कि सरकार वास्तव में नशे के खिलाफ एकजुटता नहीं चाहती।
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महिलाओं को इनाम में मिली एफआईआर
मुख्यमंत्री द्वारा चिट्टे की सूचना देने वालों को इनाम देने की घोषणा पर कटाक्ष करते हुए विधायक ने कहा कि लघट की महिलाओं को इनाम के रूप में एफआईआर मिली है। उन्होंने ऐलान किया कि सरकार चाहे जो करे, लेकिन वे महिलाओं का मनोबल बढ़ाने के लिए अपनी ओर से 20 हजार रुपये की सहायता देंगे।
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तीन साल बाद
सरकार को तीन साल बाद नशे के खिलाफ अभियान चलाने और बच्चों को जागरूक करने की याद आई है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि बिलासपुर जिले में वर्तमान में कितने नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र (रिहैब सेंटर) कार्यरत हैं और वर्ष 2023 के बाद कितने नए केंद्र खोले गए हैं। आरोप लगाया कि 26 दिसंबर को जब मुख्यमंत्री बच्चों को नशे के खिलाफ जागरूक करने आए थे, तब उनके आसपास चिट्टा माफिया, खनन माफिया और कॉन्ट्रैक्ट किलिंग माफिया मौजूद थे।