फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Bilaspur News ›   Bilaspur's health under private surveillance, 1.20 lakh rupees looted daily in the name of ultrasound

Bilaspur News: बिलासपुर की सेहत पर निजी पहरा, अल्ट्रासाउंड के नाम पर रोज 1.20 लाख की लूट

Mon, 02 Feb 2026 11:17 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Mon, 02 Feb 2026 11:17 PM IST
विज्ञापन
Bilaspur's health under private surveillance, 1.20 lakh rupees looted daily in the name of ultrasound
क्षेत्रीय अस्प्ताल बिलासपुर अल्ट्रासाउंड कमरा में लगा ताला। संवाद
पड़ताल
विज्ञापन


जिले के एक भी सरकारी अस्पताल में नहीं सुविधा, निजी क्लीनिकों की चांदी
निजी क्लीनिकों से अनुबंध पर कर रहे गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड
स्वास्थ्य सेवाओं के दावे हवा, साल भर में मरीजों के 4 करोड़ रुपये स्वाहा

धर्मेंद्र सिंह बोज्ञाटो
बिलासपुर। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर इस समय निजी क्लीनिकों का सीधा पहरा नजर आ रहा है। हालत यह है कि जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड जैसी अनिवार्य जांच सुविधा पूरी तरह ठप पड़ी हुई है, जबकि निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर इस मजबूरी को कमाई का जरिया बना चुके हैं। क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर सहित जिले के चारों सिविल अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध न होने से हजारों मरीजों को निजी क्लीनिकों में जाना पड़ रहा है।
सरकारी अस्पतालों में जांच सुविधा न होने का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है। जिले में रोजाना 120 से अधिक मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए निजी क्लीनिकों में भेजा जा रहा है। औसतन 1000 रुपये प्रति जांच के हिसाब से मरीजों की जेब से रोज करीब 1 लाख 20 हजार रुपये निकाले जा रहे हैं। यही नहीं, साल भर में यह आंकड़ा करीब 4 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच रहा है। जिले के घुमारवीं सिविल अस्पताल में प्रतिदिन 40 से अधिक, क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में 50 से ज्यादा अल्ट्रासाउंड लिखे जा रहे हैं। इसके अलावा अन्य सिविल अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से भी रोजाना 10 से 15 मरीज निजी जांच केंद्रों में रेफर किए जा रहे हैं। सरकारी पर्ची पर लिखा गया यह रेफरल निजी क्लीनिकों के लिए रोजाना कमाई का पक्का जरिया बन चुका है। निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों में एक जांच के लिए 800 से 1200 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। न तो फीस तय है और न ही किसी तरह की निगरानी। मरीजों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें यह रकम चुकानी पड़ रही है, क्योंकि सरकारी अस्पतालों में कोई विकल्प मौजूद ही नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं के तहत कई गर्भवती महिलाओं की अल्ट्रासाउंड जांच का भुगतान बाद में सरकार को रिवर्स करना पड़ता है। यानी एक तरफ सरकारी अस्पतालों में मशीनें और विशेषज्ञ नहीं हैं, दूसरी तरफ निजी क्लीनिकों में करवाई गई जांच का बोझ सीधे सरकारी खजाने पर पड़ रहा है। यह व्यवस्था सरकार और जनता दोनों के लिए नुकसान का सौदा साबित हो रही है। संवाद
विज्ञापन

इनसेट
इस व्यवस्था की सबसे बड़ी मार गर्भवती महिलाओं पर पड़ रही है। झंडूता क्षेत्र की गर्भवती महिला सीमा देवी बताती हैं कि सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड न होने से उन्हें हर बार निजी क्लीनिक जाना पड़ता है। कई बार सरकार की ओर से मान्य क्लीनिकों में उनकी जांच निशुल्क हो जाती है, वहीं, कई बार उन्हें निजी केंद्रों में इसके लिए शुल्क देना पड़ता है। गर्भवती महिला की कम से कम तीन बार अल्ट्रासाउंड जांच होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इनसेट
ग्रामीण इलाकों में हालात सबसे खराब
समाजसेवी बलराम शर्मा ने कहा कि ग्रामीण मरीजों के लिए यह समस्या और गंभीर है। सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं सिर्फ कागजों में हैं। एक साधारण अल्ट्रासाउंड भी नहीं होता। मजबूरी में निजी क्लीनिक में जाना पड़ता है, जहां मनमानी फीस वसूली जाती है।
इनसेट
नयना देवी क्षेत्र की महिला मंडल सदस्य सुनीता ठाकुर ने बताया कि कई महिलाएं पैसों के अभाव में समय पर जांच नहीं करवा पातीं। समय पर अल्ट्रासाउंड न हो तो जटिलताएं बढ़ जाती हैं। कई मामलों में मां और बच्चे दोनों की जान खतरे में पड़ जाती है।
इनसेट
अस्पताल में जांच कराने पहुंचे संजीव कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग मशीनों की कमी, तकनीकी स्टाफ और रेडियोलॉजिस्ट की अनुपलब्धता को इस समस्या की वजह बताता है। लेकिन सवाल यह है कि वर्षों से यह स्थिति बनी होने के बावजूद समाधान क्यों नहीं निकाला गया? सरकारी अस्पतालों में मशीनें या तो उपलब्ध ही नहीं हैं या लंबे समय से बंद पड़ी धूल फांक रही हैं।
इनसेट
जिले में एक क्षेत्रीय अस्पताल, चार सिविल अस्पताल, आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 36 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। क्षेत्रीय अस्पताल सहित चारों सिविल अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड सुविधा नहीं। घुमारवीं, मार्कंडेय, झंडूता और नयना देवी क्षेत्रों के मरीज निजी क्लीनिकों पर निर्भर।

कोट
जिला अस्पताल में मशीन है, लेकिन वहां रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। अगले बैच से यहां तैनाती होगी। इसके अलावा घुमारवीं में जो मशीन है वो कई साल पुरानी है। उपयोग की नहीं है। विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत कराया है। उम्मीद है समस्या का हल होगा। - डॉ. शशि दत्त शर्मा, सीएमओ बिलासपुर।

क्षेत्रीय अस्प्ताल बिलासपुर अल्ट्रासाउंड कमरा में लगा ताला। संवाद

क्षेत्रीय अस्प्ताल बिलासपुर अल्ट्रासाउंड कमरा में लगा ताला। संवाद

क्षेत्रीय अस्प्ताल बिलासपुर अल्ट्रासाउंड कमरा में लगा ताला। संवाद

क्षेत्रीय अस्प्ताल बिलासपुर अल्ट्रासाउंड कमरा में लगा ताला। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed