{"_id":"6586c21b6292810f4d02c64d","slug":"bilaspur-sadar-first-installment-of-disaster-released-only-to-16-out-of-542-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-10556-2023-12-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिलासपुर सदर : 542 में से मात्र 16 को जारी हुई आपदा की पहली किस्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिलासपुर सदर : 542 में से मात्र 16 को जारी हुई आपदा की पहली किस्त
विज्ञापन
-गहरी दरारें आने से सुरक्षित नहीं हैं कई मकान, फिर भी नहीं है आपदा प्रभावितों की सूची में नाम
-लोनिवि को चला रहे आपदा में अवसर ढूंढने वाले चुनिंदा ठेकेदार, वही तय कर रहे कहां होगा काम
-त्रिलोक जमवाल ने आपदा राहत से जुड़े कार्यों के लिए पटवारी, प्रधान व सेक्रेटरी की रिपोर्ट की अनिवार्यता पर भी घेरी सरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बिलासपुर सदर के विधायक त्रिलोक जमवाल ने आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रभावितों को राहत प्रदान करने में हो रही देरी को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार सदर विधानसभा क्षेत्र में 542 मकान, गोशालाएं और रसोईघर क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें से कई पूरी तरह से ढहे हैं, जबकि कइयों को आंशिक नुकसान हुआ है।
उन्होंने कहा कि हैरानी इस बात की है कि कई माह बीत जाने के बावजूद अभी तक केवल 16 लोगों को पहली किस्त जारी हुई है। कई मकान ऐसे भी हैं, जिनमें गहरी दरारें आ गई हैं। वे रहने के लिए सुरक्षित नहीं हैं। इसके बावजूद उनके नाम आपदा प्रभावितों की सूची में नहीं है। आपदा प्रभावितों को राहत व पुनर्वास को लेकर विधानसभा में चर्चा में भाग लेते हुए त्रिलोक जमवाल ने कहा कि सदर विधानसभा क्षेत्र का ऐसा एक भी इलाका नहीं है, जहां आपदा में नुकसान नहीं हुआ हो। सरकार ने 72 घंटे के भीतर सड़कों की बहाली का दावा किया था, लेकिन ग्रामीण इलाकों की कई सड़कें अभी भी बहाल नहीं हो पाई हैं। बिलासपुर में लोक निर्माण विभाग को चुनिंदा ठेकेदार चला रहे हैं। आपदा में अवसर ढूंढने वाले यह ठेकेदार तय कर रहे हैं कि जेसीबी मशीनें किस सड़क पर भेजी जाएंगी। हरलोग, मल्यावर, भलस्वाए व हवाण आदि पंचायतों में कई संपर्क सड़कें बंद पड़ी हैं। लोनिवि कहता है कि यह सड़कें उसकी नहीं हैं, जबकि ब्लॉक से फंड न होने का जवाब दिया जाता है। कुछ सड़कें ड्रमों और मिट्टी की बोरियों के सहारे अस्थायी तौर पर बहाल की गई हैं। उन पर बसें नहीं चल रही हैं। इससे स्कूल-कॉलेज के बच्चों, कर्मचारियों व अन्य लोगों को परेशानी हो रही है। यही हाल पानी व बिजली की आपूर्ति का है। कई जगह लोगों को 4-5 दिन बाद पानी मिल रहा है। बिजली की अनियमित आपूर्ति रही-सही कसर पूरी कर रही है।
राजस्व विभाग द्वारा जारी एक अधिसूचना को लेकर सरकार पर तीखा हमला करते हुए त्रिलोक जमवाल ने कहा कि आपदा राहत से जुड़े कार्यों को विधायक विकास ऐच्छिक निधि से करवाने के लिए पटवारी, प्रधान और सेक्रेटरी की रिपोर्ट अनिवार्य कर दी गई है। यह कैसा व्यवस्था परिवर्तन है कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि को सर्टिफिकेट लेने के लिए पटवारी, प्रधान और सेक्रेटरी के पास जाना पड़ेगा। तब कहीं जाकर किसी भी मंत्री या विधायक द्वारा स्वीकृत किया जाने वाला पैसा पात्र लोगों तक पहुंच सकेगा। इससे ऐसा लग रहा है कि सरकार को अपने मंत्रियों और विधायकों पर विश्वास नहीं है। यह अधिसूचना विधानसभा की गरिमा के खिलाफ भी है। इसे तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाना चाहिए, ताकि जनप्रतिनिधि आपदा प्रभावितों को जल्द राहत उपलब्ध करवा सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन
-लोनिवि को चला रहे आपदा में अवसर ढूंढने वाले चुनिंदा ठेकेदार, वही तय कर रहे कहां होगा काम
-त्रिलोक जमवाल ने आपदा राहत से जुड़े कार्यों के लिए पटवारी, प्रधान व सेक्रेटरी की रिपोर्ट की अनिवार्यता पर भी घेरी सरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बिलासपुर सदर के विधायक त्रिलोक जमवाल ने आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रभावितों को राहत प्रदान करने में हो रही देरी को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार सदर विधानसभा क्षेत्र में 542 मकान, गोशालाएं और रसोईघर क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें से कई पूरी तरह से ढहे हैं, जबकि कइयों को आंशिक नुकसान हुआ है।
उन्होंने कहा कि हैरानी इस बात की है कि कई माह बीत जाने के बावजूद अभी तक केवल 16 लोगों को पहली किस्त जारी हुई है। कई मकान ऐसे भी हैं, जिनमें गहरी दरारें आ गई हैं। वे रहने के लिए सुरक्षित नहीं हैं। इसके बावजूद उनके नाम आपदा प्रभावितों की सूची में नहीं है। आपदा प्रभावितों को राहत व पुनर्वास को लेकर विधानसभा में चर्चा में भाग लेते हुए त्रिलोक जमवाल ने कहा कि सदर विधानसभा क्षेत्र का ऐसा एक भी इलाका नहीं है, जहां आपदा में नुकसान नहीं हुआ हो। सरकार ने 72 घंटे के भीतर सड़कों की बहाली का दावा किया था, लेकिन ग्रामीण इलाकों की कई सड़कें अभी भी बहाल नहीं हो पाई हैं। बिलासपुर में लोक निर्माण विभाग को चुनिंदा ठेकेदार चला रहे हैं। आपदा में अवसर ढूंढने वाले यह ठेकेदार तय कर रहे हैं कि जेसीबी मशीनें किस सड़क पर भेजी जाएंगी। हरलोग, मल्यावर, भलस्वाए व हवाण आदि पंचायतों में कई संपर्क सड़कें बंद पड़ी हैं। लोनिवि कहता है कि यह सड़कें उसकी नहीं हैं, जबकि ब्लॉक से फंड न होने का जवाब दिया जाता है। कुछ सड़कें ड्रमों और मिट्टी की बोरियों के सहारे अस्थायी तौर पर बहाल की गई हैं। उन पर बसें नहीं चल रही हैं। इससे स्कूल-कॉलेज के बच्चों, कर्मचारियों व अन्य लोगों को परेशानी हो रही है। यही हाल पानी व बिजली की आपूर्ति का है। कई जगह लोगों को 4-5 दिन बाद पानी मिल रहा है। बिजली की अनियमित आपूर्ति रही-सही कसर पूरी कर रही है।
विज्ञापन
राजस्व विभाग द्वारा जारी एक अधिसूचना को लेकर सरकार पर तीखा हमला करते हुए त्रिलोक जमवाल ने कहा कि आपदा राहत से जुड़े कार्यों को विधायक विकास ऐच्छिक निधि से करवाने के लिए पटवारी, प्रधान और सेक्रेटरी की रिपोर्ट अनिवार्य कर दी गई है। यह कैसा व्यवस्था परिवर्तन है कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि को सर्टिफिकेट लेने के लिए पटवारी, प्रधान और सेक्रेटरी के पास जाना पड़ेगा। तब कहीं जाकर किसी भी मंत्री या विधायक द्वारा स्वीकृत किया जाने वाला पैसा पात्र लोगों तक पहुंच सकेगा। इससे ऐसा लग रहा है कि सरकार को अपने मंत्रियों और विधायकों पर विश्वास नहीं है। यह अधिसूचना विधानसभा की गरिमा के खिलाफ भी है। इसे तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाना चाहिए, ताकि जनप्रतिनिधि आपदा प्रभावितों को जल्द राहत उपलब्ध करवा सकें।
विज्ञापन