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Bilaspur News: बरमाणा में ढाबे हो गए बंद, कुछ तैयारी में
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बरमाणा में ढाबा संचालक मस्तराम ग्राहक आने का इंतजार करते हुए।
- फोटो : BILASPUR
बिलासपुर। बरमाणा सीमेंट प्लांट के बंद होने से कामगारों और ट्रक चालकों पर ही मार नहीं पड़ी है, बल्कि आसपास क्षेत्र के करीब 100 ढाबे भी बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। ये ढाबे कामगारों और ट्रक चालकों पर ही आश्रित थे। ढाबा संचालकों पर दोहरी मार पड़ी है। एक तो काम धंधा ठप हो गया, दूसरा उन्हें बंद दुकान का किराया भी भरना पड़ेगा। काम धंधा ठप होने से कई ढाबे तो बंद कर दिए हैं। कुछ को बंद करने की तैयारी चल रही है।
बरमाणा सीमेंट प्लांट में करीब 800 कामगार कार्यरत थे। प्लांट से करीब 3,800 ट्रक ढुलाई करते हैं। इन ट्रकों के चालकों और कामगारों पर आश्रित 100 से ज्यादा से ढाबे बरमाणा कस्बे और आसपास के क्षेत्रों में चलते हैं। प्लांट में सभी गतिविधियां बंद होने के बाद कामगार और कर्मचारी घरों की तरफ लौट गए हैं। ढुलाई का काम बंद होने से ट्रकों के चालक भी घरों में हैं। बरमाणा में बाहर के कई लोग ढाबा चलाते हैं। उन्होंने दुकानें किराए पर ली हैं। शुक्रवार को बरमाणा में रोजाना खुलने वाले कई ढाबे बंद रहे। जो खुले थे वे भी बंद करने की तैयारी कर रहे हैं।
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100 से अधिक कामगार करते थे भोजन : मस्तराम
बरमाणा में प्लांट के साथ ढाबा चलाने वाले डैहर गांव निवासी मस्तराम ने बताया कि प्लांट में काम बंद है। उनके ढाबे पर रोजाना 100 से अधिक कामगार भोजन करते थे, लेकिन अब धंधा ठप पड़ गया है। ऐसी नौबत पहले कभी नहीं आई। दुकान किराए पर ली है।
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किराए का ही कमरा ले रखा है। उन्हें अब बंद दुकान का किराया भी भरना पड़ेगा। प्लांट लंबे समय तक बंद रहा तो भरण पोषण करना मुश्किल हो जाएगा। उनके आसपास के ढाबे भी बंद हो गए हैं। उनको चलाने वाले भी घरों को लौट गए हैं।
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बरमाणा सीमेंट प्लांट में करीब 800 कामगार कार्यरत थे। प्लांट से करीब 3,800 ट्रक ढुलाई करते हैं। इन ट्रकों के चालकों और कामगारों पर आश्रित 100 से ज्यादा से ढाबे बरमाणा कस्बे और आसपास के क्षेत्रों में चलते हैं। प्लांट में सभी गतिविधियां बंद होने के बाद कामगार और कर्मचारी घरों की तरफ लौट गए हैं। ढुलाई का काम बंद होने से ट्रकों के चालक भी घरों में हैं। बरमाणा में बाहर के कई लोग ढाबा चलाते हैं। उन्होंने दुकानें किराए पर ली हैं। शुक्रवार को बरमाणा में रोजाना खुलने वाले कई ढाबे बंद रहे। जो खुले थे वे भी बंद करने की तैयारी कर रहे हैं।
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100 से अधिक कामगार करते थे भोजन : मस्तराम
बरमाणा में प्लांट के साथ ढाबा चलाने वाले डैहर गांव निवासी मस्तराम ने बताया कि प्लांट में काम बंद है। उनके ढाबे पर रोजाना 100 से अधिक कामगार भोजन करते थे, लेकिन अब धंधा ठप पड़ गया है। ऐसी नौबत पहले कभी नहीं आई। दुकान किराए पर ली है।
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किराए का ही कमरा ले रखा है। उन्हें अब बंद दुकान का किराया भी भरना पड़ेगा। प्लांट लंबे समय तक बंद रहा तो भरण पोषण करना मुश्किल हो जाएगा। उनके आसपास के ढाबे भी बंद हो गए हैं। उनको चलाने वाले भी घरों को लौट गए हैं।