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अच्छे कर्मों से मिलता है मनुष्य जीवन : कथावाचक
Sun, 14 Jul 2024 11:39 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 14 Jul 2024 11:39 PM IST
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-टिहरा में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन लोगों ने किया अमृत वचनों का रसपान
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। बरठीं की बड़गांव पंचायत के टिहरा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथावाचक देवानंद ने कहा कि मनुष्य जीवन अच्छे कर्मों के कारण ही मिलता है। इस जीवन का प्रयोग हमें माता-पिता की सेवा करने, बड़ों की आज्ञा का पालन करने, पेड़-पौधों की रक्षा करने, बच्चों से प्यार करने सहित अन्य कार्यों में करना चाहिए।
इन कर्मों को करने से मानव जीवन में अनजाने से किए गए सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन को सफल बनाने के लिए काम, क्रोध, लोभ, मोह का त्याग करके अच्छे कर्म करें। उन्होंने श्रीकृष्ण की जन्म कथा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान ने अपने भक्तों का उद्धार और पृथ्वी को दैत्य शक्तियों से मुक्त कराने के लिए अवतार लिया था। जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग और उनके जन्म लेने के रहस्यों को सुनाया। उन्होंने कहा कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वह स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और श्री कृष्ण गोकुल पहुंच गए। इस मौके पर श्री कृष्ण के बाल रूप की झांकी भी निकाली गई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। बरठीं की बड़गांव पंचायत के टिहरा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथावाचक देवानंद ने कहा कि मनुष्य जीवन अच्छे कर्मों के कारण ही मिलता है। इस जीवन का प्रयोग हमें माता-पिता की सेवा करने, बड़ों की आज्ञा का पालन करने, पेड़-पौधों की रक्षा करने, बच्चों से प्यार करने सहित अन्य कार्यों में करना चाहिए।
इन कर्मों को करने से मानव जीवन में अनजाने से किए गए सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन को सफल बनाने के लिए काम, क्रोध, लोभ, मोह का त्याग करके अच्छे कर्म करें। उन्होंने श्रीकृष्ण की जन्म कथा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान ने अपने भक्तों का उद्धार और पृथ्वी को दैत्य शक्तियों से मुक्त कराने के लिए अवतार लिया था। जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग और उनके जन्म लेने के रहस्यों को सुनाया। उन्होंने कहा कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वह स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और श्री कृष्ण गोकुल पहुंच गए। इस मौके पर श्री कृष्ण के बाल रूप की झांकी भी निकाली गई।
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