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पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने से युवाओं को मिलेगा रोजगार : कटवाल

Thu, 21 Dec 2023 04:35 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 21 Dec 2023 04:35 PM IST
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Bilaspur
assembly session
water sports
- विधानसभा शीतसत्र में भाजपा विधायक ने उठाया बिलासपुर में वाटर स्पोटर्स को बढ़ावा देने का मुद्दा
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- वाटर स्पोटर्स के लिए झंडूता सबसे बेहतर क्षेत्र, तीन ओर से गोबिंद सागर झील से घिरा
- बोले, इस क्षेत्र को बनाया जा सकता है गोल्डन गेट ऑफ हिमाचल

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। झंडूता विधायक जीतराम कटवाल ने कहा कि हिमाचल में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर इस पर्वतीय राज्य के हर इलाके में कोई न कोई खूबी है। झंडूता विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यह तीन ओर से गोबिंद सागर झील से घिरा है। 98 किलोमीटर लंबी इस झील में कई तरह की गतिविधियां हो सकती हैं। हर क्षेत्र की खूबियों के आधार पर पर्यटन को बढ़ावा देने से जहां हिमाचल आर्थिक रूप से समृद्ध होगा, वहीं युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
विधायक ने कहा कि इसके लिए पर्यटन नीति में आवश्यक बदलाव किए जाने जरूरी हैं। सरकार को इस दिशा में कारगर कदम उठाने चाहिए। खुद पहल करके उसे लोगों की सहभागिता भी सुनिश्चित करनी होगी। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान पर्यटन को लेकर चर्चा में भाग लेते हुए जीतराम कटवाल ने कहा कि यूरोप का छोटा सा देश स्विट्जरलैंड पर्यटन के लिए विश्व विख्यात है। पर्यटन की वजह से ही इसका नाम विश्व के सबसे समृद्ध देशों में शामिल है। भारत में गोवा जैसा छोटा सा राज्य भी पर्यटन का बेहतरीन उदाहरण है। जम्मू-कश्मीर आतंक से उभरकर अब फिर से पर्यटन के लिहाज से विकसित हो रहा है। सेब के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हिमाचल की पहचान फल राज्य की है। कुल्लू-मनाली व शिमला का नाम पर्यटन के मानचित्र पर है। यहां तक कि कसौली जैसा छोटा सा शहर भी पर्यटन के लिए विख्यात है। हिमाचल के अन्य क्षेत्रों में भी कोई न कोई खूबी है। इन खूबियों की मदद से पूरे प्रदेश को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा सकता है। बड़ी संख्या में लोग केरल में बैक वाटर देखने के लिए जाते हैं।
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विधायक ने कहा कि साठ के दशक में भाखड़ा बांध के निर्माण की वजह से अस्तित्व में आई यह झील 98 किलोमीटर लंबी है। इसकी गहराई 45 से 125 मीटर तक है। इसका 62 किलोमीटर हिस्सा वाटर ट्रांसपोर्ट के लिए नियमित तौर पर प्रयोग किया जाता है। गहराई की वजह से इस झील में न केवल वाटर स्पोटर्स गतिविधियों का सफल आयोजन होता है, बल्कि हाउसबोट व शिकारे भी चलाए जा सकते हैं। इसी क्षेत्र में बाबा बालक नाथ मंदिर और झील के दूसरी ओर प्रसिद्ध शक्तिपीठ नयना देवी हैं। इन दोनों धार्मिक स्थानों में हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। किरतपुर-नेरचौक फोरलेन बनने से दूरियां काफी सिमट गई हैं। बागछाल पुल बनकर तैयार हो चुका है। इससे झंडूता क्षेत्र से किरतपुर की दूरी केवल 20 किलोमीटर रह गई है। कांगड़ा व हमीरपुर की दूरी 42 किलोमीटर कम हुई है। इन सारी खूबियों के चलते इस क्षेत्र को निचले हिमाचल का कुल्लू-मनाली बनाने के साथ ही गोल्डन गेट ऑफ हिमाचल भी बनाया जा सकता है। इसके लिए दूसरी जगहों की पर्यटन नीति की नकल करने या बनी-बनाई नीति थोपने के बजाए प्रदेश की भौगोलिक व अन्य परिस्थितियों के लिहाज से कारगर नीति बनाई जानी चाहिए। इससे बेरोजगारी की समस्या भी काफी हद तक दूर होगी।
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