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बरमाणा फायरिंग मामला: आठ साल बाद दो आरोपी बरी
Wed, 22 Jul 2026 11:42 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 22 Jul 2026 11:42 PM IST
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अदालत से
घायल शिकायतकर्ता ने अदालत में नहीं की हमलावरों की पहचान
गवाहों के मुकरने से कमजोर हुआ अभियोजन पक्ष का मामला
अदालत ने कहा,संदेह नहीं,दोष साबित करने के लिए चाहिए ठोस सबूत
-2018 में बरमाणा थाना क्षेत्र में दर्ज हुआ था फायरिंग का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बरमाणा थाना क्षेत्र में वर्ष 2018 की फायरिंग घटना में अतिरिक्त सत्र न्यायालय बिलासपुर ने फैसला सुनाया है। आठ साल बाद दो आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका।
मामला 29 जून 2018 को बरमाणा थाना में दर्ज हुआ था। आरोप था कि 28-29 जून 2018 की रात शिकायतकर्ता के घर के बाहर विवाद हुआ और फायरिंग की गई। इसमें शिकायतकर्ता को छर्रे लगे थे। पुलिस ने जांच के बाद दो लोगों को आरोपी बनाकर अदालत में चालान पेश किया। अभियोजन पक्ष ने 18 गवाह पेश किए थे। घायल शिकायतकर्ता की गवाही अहम थी, पर वह हमलावरों को पहचान नहीं पाया। उसने आरोपियों की मौजूदगी या फायरिंग में उनकी भूमिका की पुष्टि नहीं की। अन्य गवाह भी आरोपियों की पहचान नहीं कर सके। अदालत ने कहा कि केवल संदेह के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। दोष सिद्ध करने के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी हैं।
अदालत ने माना कि प्रत्यक्ष गवाह आरोपियों की पहचान नहीं कर पाए। ऐसे में केवल अन्य परिस्थितियों से दोषसिद्धि नहीं हो सकती। जांच में हथियार और कारतूस बरामद हुए थे। पर यह साबित नहीं हुआ कि घटना में इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल हुआ। विश्वसनीय साक्ष्य के बिना हथियार बरामदगी महत्वपूर्ण नहीं होती।
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पुलिस जांच में कमियां
अदालत ने फैसले में पुलिस जांच की कमियों का भी उल्लेख किया। जांच अधिकारी ने फोरेंसिक जांच, फिंगरप्रिंट और पहचान प्रक्रिया नहीं करवाई थी। अदालत ने कहा कि ये कमियां तब महत्वपूर्ण हो जाती हैं, जब गवाह पहचान से इन्कार करें। अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपियों ने हत्या की नीयत से फायरिंग की थी। अपराध किसने किया, यह साबित करना अभियोजन की जिम्मेदारी थी।
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घायल शिकायतकर्ता ने अदालत में नहीं की हमलावरों की पहचान
गवाहों के मुकरने से कमजोर हुआ अभियोजन पक्ष का मामला
अदालत ने कहा,संदेह नहीं,दोष साबित करने के लिए चाहिए ठोस सबूत
-2018 में बरमाणा थाना क्षेत्र में दर्ज हुआ था फायरिंग का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बरमाणा थाना क्षेत्र में वर्ष 2018 की फायरिंग घटना में अतिरिक्त सत्र न्यायालय बिलासपुर ने फैसला सुनाया है। आठ साल बाद दो आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका।
मामला 29 जून 2018 को बरमाणा थाना में दर्ज हुआ था। आरोप था कि 28-29 जून 2018 की रात शिकायतकर्ता के घर के बाहर विवाद हुआ और फायरिंग की गई। इसमें शिकायतकर्ता को छर्रे लगे थे। पुलिस ने जांच के बाद दो लोगों को आरोपी बनाकर अदालत में चालान पेश किया। अभियोजन पक्ष ने 18 गवाह पेश किए थे। घायल शिकायतकर्ता की गवाही अहम थी, पर वह हमलावरों को पहचान नहीं पाया। उसने आरोपियों की मौजूदगी या फायरिंग में उनकी भूमिका की पुष्टि नहीं की। अन्य गवाह भी आरोपियों की पहचान नहीं कर सके। अदालत ने कहा कि केवल संदेह के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। दोष सिद्ध करने के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी हैं।
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अदालत ने माना कि प्रत्यक्ष गवाह आरोपियों की पहचान नहीं कर पाए। ऐसे में केवल अन्य परिस्थितियों से दोषसिद्धि नहीं हो सकती। जांच में हथियार और कारतूस बरामद हुए थे। पर यह साबित नहीं हुआ कि घटना में इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल हुआ। विश्वसनीय साक्ष्य के बिना हथियार बरामदगी महत्वपूर्ण नहीं होती।
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पुलिस जांच में कमियां
अदालत ने फैसले में पुलिस जांच की कमियों का भी उल्लेख किया। जांच अधिकारी ने फोरेंसिक जांच, फिंगरप्रिंट और पहचान प्रक्रिया नहीं करवाई थी। अदालत ने कहा कि ये कमियां तब महत्वपूर्ण हो जाती हैं, जब गवाह पहचान से इन्कार करें। अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपियों ने हत्या की नीयत से फायरिंग की थी। अपराध किसने किया, यह साबित करना अभियोजन की जिम्मेदारी थी।