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Bilaspur News: बंदला धार और बहादुरपुर धार बनेंगी ईको-टूरिज्म हब

Sun, 19 Jul 2026 11:40 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jul 2026 11:40 PM IST
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Bandla Dhar and Bahadurpur Dhar will become eco-tourism hubs.
बंदला धार
वन विभाग ने प्रदेश की 50 ईको-टूरिज्म साइटों में किया शामिल,स्थानीय युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए अवसर
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निजी संचालकों के माध्यम से होगा दोनो स्थलों का विकास, 20 साल के लिए होगा संचालन

संवाद न्यूज एजेंसी

बिलासपुर। प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में जिले को बड़ी सौगात मिली है। वन विभाग ने प्रदेश की 50 ईको टूरिज्म साइटों के आवंटन में बिलासपुर की बंदला धार और बहादुरपुर धार को भी शामिल किया है। इन दोनों स्थलों का विकास निजी संचालकों के माध्यम से किया जाएगा, जिन्हें निर्धारित शर्तों के तहत 20 वर्षों के लिए संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इससे जिले में पर्यटन गतिविधियों को नई रफ्तार मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

चयनित संचालकों को अविकसित भूमि उपलब्ध कराई जाएगी, जहां पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप ईको फ्रेंडली पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनमें कैंपिंग, ट्रैकिंग, नेचर ट्रेल, एडवेंचर स्पोर्ट्स, फूड कोर्ट, स्थानीय व्यंजनों के स्टॉल और पर्यटकों के लिए अन्य आवश्यक सुविधाएं शामिल होंगी। सभी निर्माण कार्य वन विभाग के दिशा-निर्देशों और पर्यावरण संरक्षण के नियमों के तहत किए जाएंगे। बंदला धार पहले से ही प्रदेश के प्रमुख पैराग्लाइडिंग स्थलों में शामिल है। यहां से उड़ान भरने वाले पायलट गोबिंद सागर झील के किनारे स्थित लुहणू मैदान में लैंडिंग करते हैं। अनुकूल मौसम और बेहतर वायु परिस्थितियों के कारण यह स्थल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिताओं की मेजबानी भी कर चुका है। वहीं, बहादुरपुर धार अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यहां ट्रैकिंग, बर्ड वॉचिंग, नेचर वॉक और कैंपिंग जैसी गतिविधियों की व्यापक संभावनाएं हैं। ईको-टूरिज्म परियोजना शुरू होने के बाद यह क्षेत्र भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन सकता है। इस परियोजना से स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षक, कैंप संचालक, होम-स्टे, टैक्सी सेवा, होटल और स्थानीय उत्पादों की बिक्री जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि गोबिंद सागर झील, जल क्रीड़ाओं, बंदला धार की पैराग्लाइडिंग और बहादुरपुर धार के ईको-टूरिज्म विकास के साथ बिलासपुर आने वाले वर्षों में हिमाचल के प्रमुख एडवेंचर और नेचर टूरिज्म केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
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इतिहास की धरोहरें उपेक्षा का शिकार

बिलासपुर को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध माना जाता है। कोट कहलूर, बछरेटू किला, बहादुरपुर धार किला, छंजियार किला और त्यून-सरयून किला कभी क्षेत्र की सुरक्षा और शासन व्यवस्था के महत्वपूर्ण केंद्र रहे हैं। आज इनमें से अधिकांश धरोहरें संरक्षण के अभाव में धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होती जा रही हैं। कई स्थानों पर किलों की दीवारें दरक चुकी हैं, जबकि कुछ संरचनाएं पूरी तरह ढहने की कगार पर हैं। समय-समय पर इन ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर लाने और संरक्षण के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन अधिकांश योजनाएं फाइलों से आगे नहीं बढ़ सकीं। पुरातत्व, पर्यटन और वन विभाग के बीच स्पष्ट जिम्मेदारी तय न होने से संरक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। यदि इन किलों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण और पर्यटन विकास किया जाए तो न केवल जिले की ऐतिहासिक विरासत सुरक्षित रहेगी, बल्कि पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी नई दिशा मिल सकती है।

बंदला धार

बंदला धार

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