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Bilaspur News: 6.25 ग्राम चिट्टा मामले में कथित सप्लायर को मिली जमानत
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बिलासपुर विशेष न्यायाधीश द्वितीय की अदालत ने दिया आदेश
कहा, केवल सह आरोपियों के बयानों के आधार पर लंबे समय तक हिरासत उचित नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। विशेष न्यायाधीश द्वितीय बिलासपुर की अदालत ने 6.25 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामदगी मामले में कथित सप्लायर को जमानत दे दी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी के खिलाफ मुख्य आधार केवल सह आरोपियों के बयान हैं। आरोपी से कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ है। जांच के दौरान ऐसा कोई स्वतंत्र साक्ष्य भी सामने नहीं आया है जिससे उसे सीधे तौर पर बरामद चिट्टे की खरीद-फरोख्त से जोड़ता हो।
अदालत ने आरोपी को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक जमानती पर रिहा करने का आदेश दिया है। अभियोजन के अनुसार, 4 जुलाई की शाम स्वारघाट क्षेत्र के कैंची मोड़ पर पुलिस यातायात जांच कर रही थी। इसी दौरान एक मोटरसाइकिल को रोककर उसकी तलाशी ली गई। पुलिस का दावा है कि बाइक की सीट के नीचे से 6.25 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। एक आरोपी के कब्जे से 48 हजार रुपये नकद भी मिले। मौके पर मौजूद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस जांच के दौरान सह आरोपियों के बयानों के आधार पर तीसरे व्यक्ति को इस मामले में कथित सप्लायर बताया गया। उसे गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, वह बरामदगी के समय मौके पर मौजूद नहीं था। उसके कब्जे या उसके घर से कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ। बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि आरोपी एक छात्र है। उसे केवल सह आरोपियों के बयानों के आधार पर फंसाया गया है। उसका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है।
राज्य ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी का नाम सह आरोपियों ने सप्लायर के रूप में लिया है। इस स्तर पर उसे रिहा करना जांच के लिए प्रतिकूल हो सकता है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि बरामद हेरोइन की मात्रा 6.25 ग्राम है। यह छोटी मात्रा से अधिक है लेकिन वाणिज्यिक मात्रा से कम है। ऐसे मामलों में एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 के कड़े प्रावधान लागू नहीं होते। जमानत का निर्णय सामान्य सिद्धांतों के आधार पर किया जाता है। अदालत ने यह भी कहा कि जांच रिपोर्ट में कोई स्वतंत्र साक्ष्य नहीं दर्शाया गया है। इसमें वित्तीय लेन-देन, कॉल विवरण या इलेक्ट्रॉनिक संचार जैसी सामग्री शामिल नहीं है। वर्तमान में उसके खिलाफ मुख्य आधार सह आरोपियों के बयान हैं, जिनका साक्ष्य मूल्य सीमित होता है। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी की पुलिस रिमांड पूरी हो चुकी है। उससे आगे किसी बरामदगी की आवश्यकता नहीं बताई गई है। उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने नहीं आया है।
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कहा, केवल सह आरोपियों के बयानों के आधार पर लंबे समय तक हिरासत उचित नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। विशेष न्यायाधीश द्वितीय बिलासपुर की अदालत ने 6.25 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामदगी मामले में कथित सप्लायर को जमानत दे दी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी के खिलाफ मुख्य आधार केवल सह आरोपियों के बयान हैं। आरोपी से कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ है। जांच के दौरान ऐसा कोई स्वतंत्र साक्ष्य भी सामने नहीं आया है जिससे उसे सीधे तौर पर बरामद चिट्टे की खरीद-फरोख्त से जोड़ता हो।
अदालत ने आरोपी को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक जमानती पर रिहा करने का आदेश दिया है। अभियोजन के अनुसार, 4 जुलाई की शाम स्वारघाट क्षेत्र के कैंची मोड़ पर पुलिस यातायात जांच कर रही थी। इसी दौरान एक मोटरसाइकिल को रोककर उसकी तलाशी ली गई। पुलिस का दावा है कि बाइक की सीट के नीचे से 6.25 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। एक आरोपी के कब्जे से 48 हजार रुपये नकद भी मिले। मौके पर मौजूद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस जांच के दौरान सह आरोपियों के बयानों के आधार पर तीसरे व्यक्ति को इस मामले में कथित सप्लायर बताया गया। उसे गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, वह बरामदगी के समय मौके पर मौजूद नहीं था। उसके कब्जे या उसके घर से कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ। बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि आरोपी एक छात्र है। उसे केवल सह आरोपियों के बयानों के आधार पर फंसाया गया है। उसका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है।
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राज्य ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी का नाम सह आरोपियों ने सप्लायर के रूप में लिया है। इस स्तर पर उसे रिहा करना जांच के लिए प्रतिकूल हो सकता है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि बरामद हेरोइन की मात्रा 6.25 ग्राम है। यह छोटी मात्रा से अधिक है लेकिन वाणिज्यिक मात्रा से कम है। ऐसे मामलों में एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 के कड़े प्रावधान लागू नहीं होते। जमानत का निर्णय सामान्य सिद्धांतों के आधार पर किया जाता है। अदालत ने यह भी कहा कि जांच रिपोर्ट में कोई स्वतंत्र साक्ष्य नहीं दर्शाया गया है। इसमें वित्तीय लेन-देन, कॉल विवरण या इलेक्ट्रॉनिक संचार जैसी सामग्री शामिल नहीं है। वर्तमान में उसके खिलाफ मुख्य आधार सह आरोपियों के बयान हैं, जिनका साक्ष्य मूल्य सीमित होता है। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी की पुलिस रिमांड पूरी हो चुकी है। उससे आगे किसी बरामदगी की आवश्यकता नहीं बताई गई है। उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने नहीं आया है।
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