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Bilaspur News: टीबी से बचाव के लिए जागरूकता और समय पर जांच जरूरी
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ऋषिकेश स्कूल में विद्यार्थियों व एनसीसी कैडेट्स जानकारी देते चिकित्सा अधिकारी डॉ. केएस चंदेल। स
एनसीसी शिविर में विद्यार्थियों को क्षय रोग के लक्षण और उपचार की जानकारी
बुखार और वजन कम होने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने की दी सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश (बिलासपुर)। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ऋषिकेश में आयोजित एनसीसी शिविर के दौरान विद्यार्थियों को टीबी मुक्त भारत अभियान के प्रति जागरूक किया गया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ऋषिकेश के चिकित्सा अधिकारी डॉ. कार्तिकेय सिंह चंदेल ने विद्यार्थियों को क्षय रोग के लक्षण, बचाव, जांच, उपचार और बीमारी से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों की जानकारी दी।
डॉ. कार्तिकेय सिंह चंदेल ने बताया कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है, लेकिन समय पर इसकी पहचान और उचित उपचार से इसे प्रभावी ढंग से ठीक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक खांसी, बुखार, रात को पसीना आना, वजन कम होना, भूख में कमी और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण होने पर समय पर स्वास्थ्य केंद्र में जांच करवाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि टीबी के उन्मूलन के लिए जागरूकता, शीघ्र जांच और उपचार का पूरा होना बेहद महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वयं जागरूक होने के साथ अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी टीबी के लक्षणों और समय पर जांच के महत्व की जानकारी दें। चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि टीबी से पीड़ित व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। उसे उपचार पूरा करने के लिए सहयोग और प्रोत्साहन देना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को पौष्टिक आहार लेने, स्वच्छता बनाए रखने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने और टीबी मुक्त भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
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बुखार और वजन कम होने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने की दी सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश (बिलासपुर)। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ऋषिकेश में आयोजित एनसीसी शिविर के दौरान विद्यार्थियों को टीबी मुक्त भारत अभियान के प्रति जागरूक किया गया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ऋषिकेश के चिकित्सा अधिकारी डॉ. कार्तिकेय सिंह चंदेल ने विद्यार्थियों को क्षय रोग के लक्षण, बचाव, जांच, उपचार और बीमारी से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों की जानकारी दी।
डॉ. कार्तिकेय सिंह चंदेल ने बताया कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है, लेकिन समय पर इसकी पहचान और उचित उपचार से इसे प्रभावी ढंग से ठीक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक खांसी, बुखार, रात को पसीना आना, वजन कम होना, भूख में कमी और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण होने पर समय पर स्वास्थ्य केंद्र में जांच करवाना जरूरी है।
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उन्होंने कहा कि टीबी के उन्मूलन के लिए जागरूकता, शीघ्र जांच और उपचार का पूरा होना बेहद महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वयं जागरूक होने के साथ अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी टीबी के लक्षणों और समय पर जांच के महत्व की जानकारी दें। चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि टीबी से पीड़ित व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। उसे उपचार पूरा करने के लिए सहयोग और प्रोत्साहन देना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को पौष्टिक आहार लेने, स्वच्छता बनाए रखने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने और टीबी मुक्त भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
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