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कोटधार में अपर हिमाचल से दो माह पहले तैयार हो जाएगा सेब
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कोटधार क्षेत्र में सेब के पौधों पर मार्च में ही खिले फूल।
- फोटो : BILASPUR
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शाहतलाई (बिलासपुर)। कोटधार क्षेत्र में आम के बाद अब सेब बागवानों की पसंद बन रहा है। क्षेत्र में जनवरी-फरवरी में ही तापमान बढ़ने लगता है। इसके चलते ऊपरी हिमाचल की सेब की फसल आने से दो माह पहले ही मई-जून में सेब की फसल तैयार हो जाती है।
फरवरी माह के अंतिम सप्ताह और मार्च शुरू होते ही क्षेत्र में सेब के पौधों पर फूल आने से बागवान गदगद हैं। बागवान आम के साथ सेब के उत्पादन में रुचि दिखाने लगे हैं। जिले में करीब दस हजार बागवान 32 सौ हेक्टेयर भूमि पर बागवानी करते हैं।
बागवान चंद्र कुमार, बलदेव कुमार, रमेश चंद, जोगराज, अमरनाथ, मस्तराम, राजकुमार, सुशील कुमार, रतन चंद का कहना है कि आम की फसल दो साल में आती है। जबकि सेब के पौधे हर साल पैदावार देते हैं। आम के पौधों पर कोहरे का प्रभाव अधिक पड़ता है, जिसका सीधा असर पैदावार पर पड़ता है। जबकि क्षेत्र में जनवरी-फरवरी में वातावरण में गर्मी होने से तापमान बढ़ता है जो सेब के पौधों में फूल खिलाने में मददगार रहता है। सेब पौधों में एक साथ फूल खिलने से फलों की सेटिंग अच्छी होती है।
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मई, जून में सेब की फसल तैयार होने से मार्केट में दाम भी अच्छे मिल सकते हैं। उधर, झबोल के उद्यान प्रसार केंद्र के प्रभारी पवन शर्मा ने बताया कि कोटधार क्षेत्र में जनवरी-फरवरी में तापमान बढ़ जाता है जिससे सेब के पौधों पर फूल आने शुरू हो जाते हैं तथा सेब की सेटिंग भी अच्छी हो जाती है। उन्होंने कहा कि तापमान कम होने से सेब के पौधों में फूल आने में दिक्कत होगी। सेब की सेटिंग पर भी विपरीत असर पड़ता है। फूल खिलने के लिए अधिक तापमान सहायक रहता है। कोटधार में समय से पहले सेब पर फूल आने शुरू हो जाते हैं। संवाद
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फरवरी माह के अंतिम सप्ताह और मार्च शुरू होते ही क्षेत्र में सेब के पौधों पर फूल आने से बागवान गदगद हैं। बागवान आम के साथ सेब के उत्पादन में रुचि दिखाने लगे हैं। जिले में करीब दस हजार बागवान 32 सौ हेक्टेयर भूमि पर बागवानी करते हैं।
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बागवान चंद्र कुमार, बलदेव कुमार, रमेश चंद, जोगराज, अमरनाथ, मस्तराम, राजकुमार, सुशील कुमार, रतन चंद का कहना है कि आम की फसल दो साल में आती है। जबकि सेब के पौधे हर साल पैदावार देते हैं। आम के पौधों पर कोहरे का प्रभाव अधिक पड़ता है, जिसका सीधा असर पैदावार पर पड़ता है। जबकि क्षेत्र में जनवरी-फरवरी में वातावरण में गर्मी होने से तापमान बढ़ता है जो सेब के पौधों में फूल खिलाने में मददगार रहता है। सेब पौधों में एक साथ फूल खिलने से फलों की सेटिंग अच्छी होती है।
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मई, जून में सेब की फसल तैयार होने से मार्केट में दाम भी अच्छे मिल सकते हैं। उधर, झबोल के उद्यान प्रसार केंद्र के प्रभारी पवन शर्मा ने बताया कि कोटधार क्षेत्र में जनवरी-फरवरी में तापमान बढ़ जाता है जिससे सेब के पौधों पर फूल आने शुरू हो जाते हैं तथा सेब की सेटिंग भी अच्छी हो जाती है। उन्होंने कहा कि तापमान कम होने से सेब के पौधों में फूल आने में दिक्कत होगी। सेब की सेटिंग पर भी विपरीत असर पड़ता है। फूल खिलने के लिए अधिक तापमान सहायक रहता है। कोटधार में समय से पहले सेब पर फूल आने शुरू हो जाते हैं। संवाद