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Bilaspur News: मानदेय वृद्धि नवंबर से लागू करने पर भड़कीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
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झंडूता में एसडीएम को ज्ञापन सौंपतीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता। स्रोत: जागरूक पाठक
झंडूता में 100 कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
अप्रैल से एरियर देने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
झंडूता (बिलासपुर)। आंगनबाड़ी वर्कर्ज एवं हेल्पर्स यूनियन संबंधित सीटू ने मानदेय वृद्धि एक नवंबर से लागू करने के फैसले के विरोध में शुक्रवार को झंडूता में प्रदर्शन किया। यूनियन ने सरकार से मानदेय वृद्धि अप्रैल 2026 से लागू करने और सात महीने का बकाया एरियर जारी करने की मांग उठाई। प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने एसडीएम झंडूता अर्शिया शर्मा को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में करीब 100 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल रहीं।
प्रोजेक्ट जिला अध्यक्ष सुषमा देवी और महासचिव इंदुबाला की अध्यक्षता में हुए प्रदर्शन में यूनियन की राज्य अध्यक्ष नीलम जस्वाल और राज्य महासचिव वीना शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने बजट सत्र 2026-27 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में एक हजार रुपये प्रतिमाह बढ़ोतरी की घोषणा की थी। इसके बावजूद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने 22 अक्तूबर को जारी अधिसूचना में बढ़ा हुआ मानदेय एक नवंबर 2026 से देने का फैसला किया है। इससे अप्रैल से अक्तूबर तक के बकाया एरियर पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब सरकार ने बजट में मानदेय बढ़ाने की घोषणा की थी, तो इसका लाभ अप्रैल से क्यों नहीं दिया जा रहा है। घोषणा और क्रियान्वयन में अंतर से कार्यकर्ताओं में रोष है। अधिसूचना के अनुसार, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मासिक मानदेय 10,500 से बढ़ाकर 11,500 रुपये और सहायिकाओं का 5,800 से बढ़ाकर 6,800 रुपये किया गया है।
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यूनियन नेताओं ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के पोषण, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और मातृ-शिशु कल्याण से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाती हैं। इसके बावजूद उन्हें महंगाई के दौर में कम मानदेय पर काम करना पड़ रहा है। सरकार को उनकी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए घोषित बढ़ोतरी का पूरा लाभ देना चाहिए।
यूनियन ने मांग की कि अधिसूचना में संशोधन कर मानदेय वृद्धि की प्रभावी तिथि अप्रैल 2026 तय की जाए और अप्रैल से 31 अक्तूबर तक का बकाया एरियर जारी किया जाए। साथ ही भुगतान के लिए स्पष्ट आदेश और समयसीमा निर्धारित की जाए। नेताओं ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कर्मियों को उनका अधिकार देना सरकार की जिम्मेदारी है, कोई एहसान नहीं।
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अप्रैल से एरियर देने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
झंडूता (बिलासपुर)। आंगनबाड़ी वर्कर्ज एवं हेल्पर्स यूनियन संबंधित सीटू ने मानदेय वृद्धि एक नवंबर से लागू करने के फैसले के विरोध में शुक्रवार को झंडूता में प्रदर्शन किया। यूनियन ने सरकार से मानदेय वृद्धि अप्रैल 2026 से लागू करने और सात महीने का बकाया एरियर जारी करने की मांग उठाई। प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने एसडीएम झंडूता अर्शिया शर्मा को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में करीब 100 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल रहीं।
प्रोजेक्ट जिला अध्यक्ष सुषमा देवी और महासचिव इंदुबाला की अध्यक्षता में हुए प्रदर्शन में यूनियन की राज्य अध्यक्ष नीलम जस्वाल और राज्य महासचिव वीना शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने बजट सत्र 2026-27 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में एक हजार रुपये प्रतिमाह बढ़ोतरी की घोषणा की थी। इसके बावजूद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने 22 अक्तूबर को जारी अधिसूचना में बढ़ा हुआ मानदेय एक नवंबर 2026 से देने का फैसला किया है। इससे अप्रैल से अक्तूबर तक के बकाया एरियर पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
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उन्होंने कहा कि जब सरकार ने बजट में मानदेय बढ़ाने की घोषणा की थी, तो इसका लाभ अप्रैल से क्यों नहीं दिया जा रहा है। घोषणा और क्रियान्वयन में अंतर से कार्यकर्ताओं में रोष है। अधिसूचना के अनुसार, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मासिक मानदेय 10,500 से बढ़ाकर 11,500 रुपये और सहायिकाओं का 5,800 से बढ़ाकर 6,800 रुपये किया गया है।
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यूनियन नेताओं ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के पोषण, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और मातृ-शिशु कल्याण से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाती हैं। इसके बावजूद उन्हें महंगाई के दौर में कम मानदेय पर काम करना पड़ रहा है। सरकार को उनकी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए घोषित बढ़ोतरी का पूरा लाभ देना चाहिए।
यूनियन ने मांग की कि अधिसूचना में संशोधन कर मानदेय वृद्धि की प्रभावी तिथि अप्रैल 2026 तय की जाए और अप्रैल से 31 अक्तूबर तक का बकाया एरियर जारी किया जाए। साथ ही भुगतान के लिए स्पष्ट आदेश और समयसीमा निर्धारित की जाए। नेताओं ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कर्मियों को उनका अधिकार देना सरकार की जिम्मेदारी है, कोई एहसान नहीं।