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19130 बच्चों के पालनहार बने आंगनबाड़ी केंद्र
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बिलासपुर। बीते कुछ वर्षों के दौरान जिले के 19130 बच्चों को पालनहार एवं मातृत्व के रूप में 11110 आंगनबाड़ी केंद्र के रूप बड़ी छाया मिली है। इनके अतिरिक्त 5300 से अधिक गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को भी उनके स्वास्थ्य एवं विकास पर भी जोर दिया गया है। जिससे कोई भी गरीब एवं आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति कुपोषित एवं भूख के कारण न मरना पड़े ।
जिला में 1111 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से 6 माह से 6 वर्ष तक की आयु के 19130 बच्चों तथा 5300 गर्भवती व धात्री महिलाओं को लाभान्वित किया जा रहा है। महिलाओं एवं बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों एवं योजनाओं को क्रियान्वित किया जा रहा है।
समेकित बाल विकास योजना के अंतर्गत गर्भवती, दूध पिलाने वाली माताएं तथा 6 माह से लेकर 6 वर्ष की आयु तक के बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण में सुधार लाने के लिए सेवाएं प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत महिलाओं तथा बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए आगंनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषाहार प्रदान किया जाता है। बच्चों के संर्वागीण विकास के लिए पूर्वशाला शिक्षा, स्वास्थ्य जांच तथा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से टीकाकरण भी करवाया जाता है। कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से 6 सेवाएं जिसमें पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा, टीकाकरण, अनुपूरक पोषाहार, शालापूर्वक शिक्षा तथा संदर्भ सेवाएं बच्चों, गर्भवती/धात्री माताओं को प्रदान की जा रही है।
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प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य संबंधी विशिष्ट शर्तों की पूर्ति पर परिवार में पहले जीवित बच्चे के लिए गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं के खाते में सीधे 5 हजार रुपये की नकद राशि प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान की जाएगी। यह योजना 1 जनवरी 2017 से लागू की गई है। इस योजना के अंतर्गत चालू वर्ष में अब तक 40 लाख 95 हजार रुपये व्यय कर 764 लाभार्थियों को लाभान्वित किया जा चुका है। जिला अपराधिक क्षति राहत एवं पुर्नवास योजना के अंतर्गत चालू वित्त वर्ष में अभी तक में 2 पात्र महिलाओं को लाभान्वित किया गया है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अंजू बाला ने बताया कि जिला में तीन बाल विकास परियोनाओं के अंतर्गत 1 हजार 111 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से 6 माह से 6 वर्ष तक की आयु के बच्चों तथा गर्भवती तथा धात्री महिलाओं को लाभान्वित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि महिलाओं को स्वयं का रोजगार स्थापित करने के लिए स्वयं रोजगार सहायता योजना के अंतर्गत ऐसी महिलाएं जिनकी वार्षिक आय 35 हजार रुपये से अधिक न हो तथा वे अपना कोई छोटा कार्य करना चाहती हों उन्हें 5 हजार रुपये तक की अनुदान राशि प्रदान की जाती है।
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जिला में 1111 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से 6 माह से 6 वर्ष तक की आयु के 19130 बच्चों तथा 5300 गर्भवती व धात्री महिलाओं को लाभान्वित किया जा रहा है। महिलाओं एवं बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों एवं योजनाओं को क्रियान्वित किया जा रहा है।
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समेकित बाल विकास योजना के अंतर्गत गर्भवती, दूध पिलाने वाली माताएं तथा 6 माह से लेकर 6 वर्ष की आयु तक के बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण में सुधार लाने के लिए सेवाएं प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत महिलाओं तथा बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए आगंनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषाहार प्रदान किया जाता है। बच्चों के संर्वागीण विकास के लिए पूर्वशाला शिक्षा, स्वास्थ्य जांच तथा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से टीकाकरण भी करवाया जाता है। कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से 6 सेवाएं जिसमें पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा, टीकाकरण, अनुपूरक पोषाहार, शालापूर्वक शिक्षा तथा संदर्भ सेवाएं बच्चों, गर्भवती/धात्री माताओं को प्रदान की जा रही है।
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प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य संबंधी विशिष्ट शर्तों की पूर्ति पर परिवार में पहले जीवित बच्चे के लिए गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं के खाते में सीधे 5 हजार रुपये की नकद राशि प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान की जाएगी। यह योजना 1 जनवरी 2017 से लागू की गई है। इस योजना के अंतर्गत चालू वर्ष में अब तक 40 लाख 95 हजार रुपये व्यय कर 764 लाभार्थियों को लाभान्वित किया जा चुका है। जिला अपराधिक क्षति राहत एवं पुर्नवास योजना के अंतर्गत चालू वित्त वर्ष में अभी तक में 2 पात्र महिलाओं को लाभान्वित किया गया है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अंजू बाला ने बताया कि जिला में तीन बाल विकास परियोनाओं के अंतर्गत 1 हजार 111 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से 6 माह से 6 वर्ष तक की आयु के बच्चों तथा गर्भवती तथा धात्री महिलाओं को लाभान्वित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि महिलाओं को स्वयं का रोजगार स्थापित करने के लिए स्वयं रोजगार सहायता योजना के अंतर्गत ऐसी महिलाएं जिनकी वार्षिक आय 35 हजार रुपये से अधिक न हो तथा वे अपना कोई छोटा कार्य करना चाहती हों उन्हें 5 हजार रुपये तक की अनुदान राशि प्रदान की जाती है।