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Bilaspur News: शहर तो सारे भर गए मित्रों खाली हो गए सारे गांव...

Mon, 20 May 2024 11:01 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 20 May 2024 11:01 PM IST
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All the cities are filled, friends, all the villages are empty...
-भाषा एवं संस्कृति विभाग के बैठक कक्ष में हुई गोष्ठी
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भाषा एवं संस्कृति विभाग कार्यालय बिलासपुर के संस्कृति भवन के बैठक कक्ष में गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में डॉ. अनेक राम सांख्यान ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की, जबकि अध्यक्षता शिव पाल गर्ग ने की।

मंच संचालन साहित्यकार रविंद्र शर्मा ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना से किया गया। इसके बाद सभी साहित्यकारों ने अधिवक्ता आरएस परमार के आकस्मिक निधन पर दो मिनट का मौन रख कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। अमरनाथ धीमान ने कणक बी बड्डी, छलिया अस्से बी बाई ली, हूंण करी लेनी अस्सा मटर टमाटरा री करसाणीयां, सीता जसवाल ने प्रकृति रूपी धरोहर को बनाया था भगवान ने मनुष्य के जीने के लिए, कर्मवीर ने नजम बर्बादे इश्क, रविंद्र भट्टा ने सदकर्म ही मनुष्य के साथ नाते हैं, झूठ, फरेब, धोखा तो कुछ दिनों के साथी हैं रचना प्रस्तुत की। एसआर आजाद ने लिखी न जाए मन की बातें, समझी जाए इशारों से, रविंद्र शर्मा ने शहर तो सारे भर गए मित्रों खाली हो गए सारे गांव, पैसे देकर मिलता सब कुछ नहीं मिलती पीपल की छांव, शिवपाल गर्ग ने आओ करें कुछ यू ही आज बातें रचना प्रस्तुत की। सुरेंद्र मिन्हास ने धुप एहडी बरसी गई फुकी गई टौंटली ठंडी छांव बैठी ने ठंडी किती टौंटली, डॉ. अनेक राम सांख्यान ने गरीबी और भुखमरी शीर्षक से रचना प्रस्तुत की। रामपाल डोगरा ने यादों के झरोखे से, प्रदीप गुप्ता ने दृश्मां के आंचल का प्यार, पुलकित हो गया था मन, जब खुशनुमा लौटा था अपने शहर में, नरैणु राम हितैषी ने जब से बजा है बिगुल चुनाव का चल रहा है खेल पेच और दाव का, तृप्ता देवी ने एक नन्ही सी गुडिया जिसे मां बाप ने उंगली से पकडक़र चलना सिखाया, आज बड़ी हो गई रचना प्रस्तुत की। पूनम देवी ने ये महंगाई ले डूबी तुमको भी हमको भी, बृज लाल लखनपाल ने आऊं इक-गल्लां दो सुफना शीर्षक से रचना प्रस्तुत की। इस अवसर पर इंद्र सिंह चंदेल, मुनीश कुमार, कौशल्या देवी, राकेश कुमार, अंकित कुमार आदि उपस्थित रहे। अंत में जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने सभी साहित्यकारों का धन्यवाद किया।
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