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बारिश, सूखे और तना भेदक रोग से जिले में खत्म हुई मक्की की फसल

Thu, 03 Sep 2020 11:15 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Sep 2020 11:15 PM IST
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agriculture
शाहतलाई (बिलासपुर)। बदलते मौसम के मिजाज किसानों के लिए आफत बन गया है। बीते एक सप्ताह से क्षेत्र में बारिश किसानों के लिए आफत बन कर वर्ष रही है। किसानों के खेतों में पानी का ठहराव होने से मक्की की फसल तैयार होने से पहले ही सूख गई। जिस से फसल के बर्बाद होने का अंदेशा है।
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उल्लेखनीय है कि कभी सूखा, बीमारी और आंधी से पहले ही मक्की की फसल करीब 50 प्रतिशत बर्बाद हो चुकी थी। कृषि प्रधान जिले बिलासपुर में 65 हजार किसान परिवार 32 हजार हेक्टेयर में मक्की की फसल की बीजाई करते हैं। जब विकास खंड झंडूता में 18 हजार किसान परिवार 7500 हेक्टेयर पर खेती बाड़ी करके अपने परिवार का गुजर बसर करते हैं। लेकिन इस बार जिला भर में तना भेदक रोग और सूखे की मार से मक्की की फसल उभर नहीं पाई। वहीं जो फसल बची थी उसे पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश ने बर्बाद कर दिया। जिससे किसानों की रोजी रोटी पर बन गई है। किसान सोमदत्त, हेमराज, प्रकाश चंद, राजकुमार, जगदीश चंद, चंद्र कुमार, बलदेव कुमार, सुशील कुमार, प्रेम चंद, ज्ञान चंद, जोगिंद्र कुमार, मूलराज का कहना है कि इस बार समय पर मक्की की फसल की बीजाई कर दी थी। इस बीच फसल को एक कीड़े का हमला हो गया।
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किसानों ने कहा कि आंधी ने करीब 50 फीसदी फसल खेतों में बिछ गई है। उस के उपरांत बीते एक सप्ताह से मौसम ने तेवर बदले और लगातार बारिश से खेतों में पानी खड़ा होने से मक्की की पौध को तना सड़न रोग लग गया। जिस से किसानों के खेतों के खेत बर्बाद हो गए। किसानों का कहना है कि वह हर साल अपनी मक्की को बेच कर अच्छा खासा पैसा कमा कर अपने परिवार का गुजर बसर कर लेते थे लेकिन इस बार फसल को बेचना तो दूर की बात अपने परिवार की रोजी पर भी संकट आ गया है। झंडूता के कृषि विषयवाद अशोक कुमार ने बताया कि कृषि विशेषज्ञों की एक टीम क्षेत्र में किसानों की फसल को हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए भेजी जाएगी। जिस की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी जाएगी ताकि किसानों को उनकी फसल का मुआवजा मिल सके।
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