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पशुओं के हमले से मर रहे है लोग, सरकार बेखबर

Mon, 11 Apr 2016 11:43 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिलासपुर।
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिलासपुर। Updated Mon, 11 Apr 2016 11:43 PM IST
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adminstration not take action against dangeres animal.
एनएच में वाहनों में मध्य चल रही लावारिस गोवंश - फोटो : अमर उजाला

 लावारिस पशुओं के हमलों से लोगों की जान जा रही है। आए दिन कई लोग अस्पताल पहुंच रहे है। लेकिन इसके बाद भी सरकार गो सदनों के निर्माण के लिए गंभीर नहीं है। न ही पशुओं को छोड़ने वालों पर कार्रवाई हो रही है।

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हालांकि हाईकोर्ट ने भी सरकार को आदेश जारी किए थे की लावारिस पशुओं के लिए गोसदनों का निर्माण पंचायत से लेकर नगर परिषद के क्षेत्रों में किया जाए। इसके लिए मई 2015 तक का समय दिया गया था।
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अदालत ने कहा था कि इसके बाद कहीं भी लावारिस पशु मिलेंगे तो संबंधित क्षेत्र के पंचायत प्रधान, नप अध्यक्ष, लोनिवि के अधिकारी, वन विभाग के अधिकारी जिसके भी अधीन उक्त क्षेत्र आएगा उसके खिलाफ कोर्ट की अवमानना का केस दर्ज कर सस्पेंड करने का प्रावधान किया था। लेकिन प्रदेश सरकार है कि उसे लोगों की जान की कोई परवाह ही नहीं है।
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अकेले बिलासपुर जिला में ही आवारा पशुओं के हमले से आधा दर्जन लोगों की जान जा चुकी है। जबकि कई लोग आए दिन पशुओं के हमलों से अस्पताल पहुंच रहे हैं। लेकिन कोर्ट के आदेशों के बाद भी सरकार और प्रशासन गंभीर नहीं है।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आवारा पशुओं के हमलों का जिम्मेवार कौन है? प्रदेश सरकार या फिर प्रशासन? क्योंकि सरकार ने भी एक योजना शुरू कर पशुओं को टैग लगाए थे। जिससे पता चल सके की पशु किसके हैं। लेकिन सड़कों और गलियों में टैग लगे पशु भी लावारिस घूम रहे है।

इससे साफ होता है कि सरकारी तंत्र ने पशुओं को टैग लगा कर रस्म तो अदा कर दी है। लेकिन पशुओं को छोड़ने वालों पर कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। ऐसा नहीं है कि पशुओं को जंगलों में छोड़ा गया है। लोगों ने पशुओं को सड़क पर छोड़ दिया जाता है। सैकड़ों पशु सड़कों के साथ बाजारों में घूम रहे हैं। जहां से हर रोज जिला के आला अधिकारी, सरकार के मंत्री और विधायक गुजरते है। लेकिन सब ने आंखें मूंद कर रखी है। मानों कोई कुछ देखना ही नहीं चाह रहा है।

क्या कहना है उपायुक्त का
उपायुक्त बिलासपुर मानसी सहाय ठाकुर ने बताया कि जिला में 6 गोशालाओं का निर्माण किया जा रहा है। इसका काम चला है। उन्होंने कहा कि गोशालाओं का निर्माण जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

क्या कहा था हाईकोर्ट ने
प्रदेश उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि मई 2015 तक हर पंचायत जहां जरूरत है नगर परिषद, नगर पंचायत में गोसदन बनाने के निर्देश दिए थे। लेकिन यह गो सदन आज तक बनकर तैयार नहीं हुए हैं।

ये होनी थी कार्रवाई
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मई के बाद आवारा पशु घूमते हुए मिले तो पंचायत प्रधान, नप अध्यक्ष, जिप चेयरमैन, बीडीसी सदस्य, नगर पंचायत सदस्य को सीधे सस्पेंड कर दिया जाएगा। अगर आवारा पशु राज्य मार्ग या फिर नेशनल हाइवे पर पाए गए तो उक्त विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

कमेटियों का भी किया गया था गठन
हर जिले में गौ सदन निर्माण के लिए कमेटियों का गठन किया गया था। जिसमें जिला उपायुक्त को अध्यक्ष, एसपी को सदस्य और उप निदेशक पशु पालन विभाग को मेबंर सचिव बनाया गया था।


गौशालाओं के बनने के बाद ये रहेंगी दिक्कतें
अगर हर जिले में गोसदनों का निर्माण कार्य हो भी गया तो भी उनका संचालक करना आसान नहीं रहेगा। क्योंकि गो सदन चलाने के लिए चारा कहां से आएगा, केयर टेकर कौन होगा। वहीं सब से बड़ी बात गो सदन के संचालन के लिए धन कहां से आएगा?

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