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Bilaspur News: सड़क हादसे के आरोपी को पासपोर्ट नवीनीकरण की अनुमति, विदेश जाने पर रोक
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घुमारवीं कोर्ट ने 30 हजार के निजी मुचलके पर दी राहत, हर सुनवाई में पेश होने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सड़क दुर्घटना के एक विचाराधीन मामले में आरोपी मनोज कुमार को घुमारवीं न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-3 घुमारवीं की अदालत ने आरोपी को अपना पासपोर्ट नवीनीकरण कराने की अनुमति दे दी है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह अनुमति केवल पासपोर्ट के नवीनीकरण तक सीमित रहेगी और आरोपी न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना भारत से बाहर नहीं जा सकेगा।
न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आरोपी की ओर से दायर आवेदन में बताया गया कि उसका पासपोर्ट 27 मई 2025 को समाप्त हो चुका है। पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए आवेदन करने पर पुलिस थाना नादौन, जिला हमीरपुर की ओर से आपत्ति दर्ज की गई, जिसके चलते उसे न्यायालय की अनुमति की आवश्यकता पड़ी। आवेदन में पासपोर्ट नवीनीकरण के साथ-साथ विदेश यात्रा की अनुमति भी मांगी गई थी। राज्य की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक ने आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ वर्ष 2024 की एफआईआर के तहत भारतीय न्याय संहिता से पूर्व लागू भारतीय दंड संहिता के तहत मामला विचाराधीन है। ऐसे में यदि उसे पासपोर्ट नवीनीकरण और विदेश जाने की अनुमति दी जाती है तो उसके न्यायिक प्रक्रिया से बचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। राज्य ने यह भी दलील दी कि आरोपी विदेश यात्रा के लिए कोई अत्यावश्यक, विशेष अथवा असाधारण कारण भी प्रस्तुत नहीं कर सका है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि राज्य की ओर से ऐसा कोई ठोस साक्ष्य या सामग्री प्रस्तुत नहीं की गई, जिससे यह साबित हो कि पासपोर्ट के नवीनीकरण से मुकदमे की सुनवाई प्रभावित होगी। आदेश में कहा गया कि केवल मुकदमे का लंबित होना किसी व्यक्ति को पासपोर्ट के नवीनीकरण से वंचित करने का आधार नहीं हो सकता, विशेषकर तब जब यह आरोप भी न हो कि आरोपी ने पहले कभी अदालत की ओर से दी गई राहत का दुरुपयोग किया हो या सुनवाई से बचने का प्रयास किया हो।
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हालांकि अदालत ने विदेश यात्रा की अनुमति देने से इन्कार करते हुए कहा कि आरोपी अपने आवेदन में विदेश जाने के लिए कोई आपात या असाधारण परिस्थिति साबित नहीं कर सका है। न्यायालय ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के लिए आरोपी की अदालत में उपस्थिति अनिवार्य है। इसलिए फिलहाल विदेश यात्रा की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने आवेदन को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए आरोपी को 30 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की जमानत पर पासपोर्ट नवीनीकरण की अनुमति प्रदान की। साथ ही शर्त लगाई कि आरोपी न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना भारत से बाहर नहीं जाएगा, प्रत्येक सुनवाई पर अदालत में उपस्थित रहेगा तथा यदि भविष्य में विदेश यात्रा करता है तो उसकी जानकारी भी न्यायालय को देगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सड़क दुर्घटना के एक विचाराधीन मामले में आरोपी मनोज कुमार को घुमारवीं न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-3 घुमारवीं की अदालत ने आरोपी को अपना पासपोर्ट नवीनीकरण कराने की अनुमति दे दी है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह अनुमति केवल पासपोर्ट के नवीनीकरण तक सीमित रहेगी और आरोपी न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना भारत से बाहर नहीं जा सकेगा।
न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आरोपी की ओर से दायर आवेदन में बताया गया कि उसका पासपोर्ट 27 मई 2025 को समाप्त हो चुका है। पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए आवेदन करने पर पुलिस थाना नादौन, जिला हमीरपुर की ओर से आपत्ति दर्ज की गई, जिसके चलते उसे न्यायालय की अनुमति की आवश्यकता पड़ी। आवेदन में पासपोर्ट नवीनीकरण के साथ-साथ विदेश यात्रा की अनुमति भी मांगी गई थी। राज्य की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक ने आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ वर्ष 2024 की एफआईआर के तहत भारतीय न्याय संहिता से पूर्व लागू भारतीय दंड संहिता के तहत मामला विचाराधीन है। ऐसे में यदि उसे पासपोर्ट नवीनीकरण और विदेश जाने की अनुमति दी जाती है तो उसके न्यायिक प्रक्रिया से बचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। राज्य ने यह भी दलील दी कि आरोपी विदेश यात्रा के लिए कोई अत्यावश्यक, विशेष अथवा असाधारण कारण भी प्रस्तुत नहीं कर सका है।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि राज्य की ओर से ऐसा कोई ठोस साक्ष्य या सामग्री प्रस्तुत नहीं की गई, जिससे यह साबित हो कि पासपोर्ट के नवीनीकरण से मुकदमे की सुनवाई प्रभावित होगी। आदेश में कहा गया कि केवल मुकदमे का लंबित होना किसी व्यक्ति को पासपोर्ट के नवीनीकरण से वंचित करने का आधार नहीं हो सकता, विशेषकर तब जब यह आरोप भी न हो कि आरोपी ने पहले कभी अदालत की ओर से दी गई राहत का दुरुपयोग किया हो या सुनवाई से बचने का प्रयास किया हो।
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हालांकि अदालत ने विदेश यात्रा की अनुमति देने से इन्कार करते हुए कहा कि आरोपी अपने आवेदन में विदेश जाने के लिए कोई आपात या असाधारण परिस्थिति साबित नहीं कर सका है। न्यायालय ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के लिए आरोपी की अदालत में उपस्थिति अनिवार्य है। इसलिए फिलहाल विदेश यात्रा की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने आवेदन को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए आरोपी को 30 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की जमानत पर पासपोर्ट नवीनीकरण की अनुमति प्रदान की। साथ ही शर्त लगाई कि आरोपी न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना भारत से बाहर नहीं जाएगा, प्रत्येक सुनवाई पर अदालत में उपस्थित रहेगा तथा यदि भविष्य में विदेश यात्रा करता है तो उसकी जानकारी भी न्यायालय को देगा।