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Bilaspur News: जिले में एक साल में टीबी से 92 मरीजों की मौत, 263 हाई रिस्क गांवों में चलेगा जांच अभियान

Thu, 16 Jul 2026 11:38 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jul 2026 11:38 PM IST
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92 TB patients died in the district over the past year; a screening drive will be conducted in 263 high-risk villages.
बिलासपुर बचत भवन में जिला स्तरीय टीबी मृत्यु समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त। स्रोत
समय पर जांच, नियमित इलाज और बेहतर पोषण पर फोकस, 1,000 पोषण किट वितरित होंगी
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देर से बीमारी का पता चलना, दवा बीच में छोड़ना, कुपोषण बने मौतों के प्रमुख कारण

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में पिछले एक वर्ष के दौरान टीबी से 92 मरीजों की मौत हुई है। इसके बाद जिला प्रशासन ने टीबी से होने वाली मौतों में कमी लाने के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत 263 उच्च जोखिम वाले गांवों के अलावा एसीसी संयंत्र के आसपास, खनन प्रभावित क्षेत्रों, शहरी संवेदनशील इलाकों और अन्य कार्यस्थलों पर विशेष जांच एवं जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। साथ ही मरीजों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग को एक हजार पोषण किट उपलब्ध कराई जाएंगी। जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को संभावित मरीजों की समय रहते पहचान सुनिश्चित करने के लिए जांच अभियान को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कोई भी मरीज उपचार बीच में न छोड़े। इसके लिए नियमित निगरानी, परामर्श और आवश्यक सहयोग दिया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि समय पर जांच और नियमित इलाज से टीबी से होने वाली अधिकांश मौतों को रोका जा सकता है।टीबी से जुड़े सामाजिक भेदभाव और भ्रांतियों को दूर करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। लोगों को बताया जाएगा कि टीबी पूरी तरह उपचार योग्य बीमारी है और निर्धारित अवधि तक नियमित दवा लेने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। उपचार के साथ पोषण पर भी विशेष जोर रहेगा। एक हजार पोषण किट कुपोषित और कमजोर मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर वितरित की जाएंगी। जिला मुख्यालय स्थित बचत भवन में वीरवार को उपायुक्त राहुल कुमार की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय टीबी मृत्यु समीक्षा बैठक में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत पिछले एक वर्ष में हुई टीबी से संबंधित मौतों की समीक्षा की गई। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि इस अवधि में जिले में 92 मरीजों की मौत हुई। समीक्षा में बीमारी का देर से पता चलना, दवाइयों का नियमित सेवन न करना, उपचार बीच में छोड़ देना और कुपोषण को मौत के प्रमुख कारणों के रूप में चिह्नित किया गया। उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। सभी विभागों और समाज की सक्रिय भागीदारी से ही इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शशि दत्त शर्मा सहित स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
पोर्टेबल एक्सरे मशीनों से टीबी के नौ नए मामले आए सामने
सीएसआर के तहत स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराई गई पोर्टेबल एक्सरे मशीनों से हाल ही में नौ नए टीबी मरीजों की पहचान हुई है। अब इन मशीनों का उपयोग दूरदराज और संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित जांच अभियान के लिए किया जाएगा, ताकि शुरुआती चरण में ही मरीजों की पहचान कर उनका उपचार शुरू किया जा सके।
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पंचायतों की होगी अहम भूमिका
टीबी उन्मूलन अभियान में पंचायत राज विभाग की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों और पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों को अभियान से जोड़कर उच्च जोखिम वाले मरीजों तक घर-घर पहुंच बनाई जाएगी। अभियान की प्रगति की निगरानी के लिए जिला और उपमंडल स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें भी आयोजित होंगी। उपायुक्त ने स्वयंसेवी संस्थाओं, औद्योगिक इकाइयों और आम नागरिकों से टीबी कोष में स्वैच्छिक योगदान देने की अपील भी की।
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