{"_id":"5a31234e4f1c1b86698c1509","slug":"91513169742-bilaspur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हर हाल में पंजीकरण करवाएं संस्थाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हर हाल में पंजीकरण करवाएं संस्थाएं
Updated Wed, 13 Dec 2017 06:29 PM IST
विज्ञापन
हर हाल में पंजीकरण करवाएं संस्थाएं
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर।
प्रदेश के सभी सरकारी गैर सरकारी संस्थाएं या स्वैच्छिक संगठन जो बाल देख-रेख संस्थाएं चला रही हैं उन्हें किशोर न्याय अधिनियम 2015 के अंतर्गत पंजीकरण करवाना जरूरी है। जिला कार्यक्रम अधिकारी वीरेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय में दायर रिट याचिका (फौजीदारी) में फैसला सुनाते हुए दिए हैं। इसके तहत प्रदेश के सभी सरकारी, गैर सरकारी संस्थाएं या स्वैच्छिक संगठन जो बाल देख रेख संस्थाएं चला रही हैं उन्हें किशोर न्याय अधिनियम 2015 के अंर्तगत करवाना अनिवार्य किया गया है।
उन्होंने बताया कि बिना पंजीकरण के संस्थान चलाना गैर कानूनी है। जो किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 41(1) का पालन नहीं करता है उसे एक साल तक का कारावास या कम से कम एक लाख रुपये अथवा दोनों के दंड का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि इसकी विस्तृत जानकारी और आवेदन के प्रपत्र के लिए निदेशालय की साइट पर देखा जा सकता है।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर।
प्रदेश के सभी सरकारी गैर सरकारी संस्थाएं या स्वैच्छिक संगठन जो बाल देख-रेख संस्थाएं चला रही हैं उन्हें किशोर न्याय अधिनियम 2015 के अंतर्गत पंजीकरण करवाना जरूरी है। जिला कार्यक्रम अधिकारी वीरेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय में दायर रिट याचिका (फौजीदारी) में फैसला सुनाते हुए दिए हैं। इसके तहत प्रदेश के सभी सरकारी, गैर सरकारी संस्थाएं या स्वैच्छिक संगठन जो बाल देख रेख संस्थाएं चला रही हैं उन्हें किशोर न्याय अधिनियम 2015 के अंर्तगत करवाना अनिवार्य किया गया है।
उन्होंने बताया कि बिना पंजीकरण के संस्थान चलाना गैर कानूनी है। जो किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 41(1) का पालन नहीं करता है उसे एक साल तक का कारावास या कम से कम एक लाख रुपये अथवा दोनों के दंड का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि इसकी विस्तृत जानकारी और आवेदन के प्रपत्र के लिए निदेशालय की साइट पर देखा जा सकता है।
विज्ञापन