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नौ प्रवासी मजदूरों को किया सहारनपुर रवाना
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स्वारघाट(बिलासपुर)। प्रदेश में रह रहे प्रवासी मजदूरों को प्रदेश सरकार की इच्छानुसार अपने-अपने प्रदेशो में भेजा जा रहा है। इसी कड़ी में स्वारघाट उपमंडल प्रशासन ने उत्तर प्रदेश राज्य के सहारनपुर जिले में नौ प्रवासी मजदूरों को शनिवार देर शाम घरों के लिए रवाना किया गया। सभी मजदूर देर रात अपने घर में सकुशल पहुंचे। ये प्रवासी मजदूर लॉकडाउन के दौरान ग्राम पंचायत बैहल में फंसे थे और अपने घर जाना चाहते थे।
स्थानीय प्रशासन ने इनके ई-कोविड पास बनाकर और स्वास्थ्य जांच के बाद शनिवार को एक ट्रेवलर वाहन से घर भेज दिया है। यहां से रवाना करने से पहले सभी प्रवासी मजदूरों को सफर में खाने के लिए फूड पैकेट तथा पानी आदि की व्यवस्था करके भेजा गया।
विकास खंड स्वारघाट के नोडल ऑफिसर एवं बीडीओ अनिल कक्कड़ ने बताया कि पिछले कल 9 प्रवासी मजदूरों को घर भेजा गया है। उन्होंने बताया कि स्वारघाट उपमंडल की सभी पंचायतों में मनरेगा के कार्य शुरू हो चुके है और लगभग 600 करीब मजदूर कार्य कर रहे है। इस क्वार्टर के लिए 120 के करीब मस्टरोल निकाले गए है। प्रवासी मजदूरों को मोटीवेट किया जा रहा है कि हिमाचल में रह कर भी वे रोजगार प्राप्त कर सकते है। क्योंकि पूरे देश में लॉकडाउन की स्थिति है अगर वे वापस घर भी जाएंगे तो उन्हें एकदम से रोजगार नहीं मिल सकेगा। इसलिए इन प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने के लिए स्वारघाट प्रशासन वचनबद्ध है।
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बीडीओ अनिल कक्कड़ ने बताया कि देशभर से रेडजोन से आने वाले लोगों के लिए प्रशासन द्वारा उपमंडल स्वारघाट में पंचायत स्तर पर 23 संस्थागत क्वारंटीन सेंटर बनाए गए है। इनमे से 22 संस्थागत क्वारंटीन सेंटर स्कूलों को बनाया गया है।
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स्थानीय प्रशासन ने इनके ई-कोविड पास बनाकर और स्वास्थ्य जांच के बाद शनिवार को एक ट्रेवलर वाहन से घर भेज दिया है। यहां से रवाना करने से पहले सभी प्रवासी मजदूरों को सफर में खाने के लिए फूड पैकेट तथा पानी आदि की व्यवस्था करके भेजा गया।
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विकास खंड स्वारघाट के नोडल ऑफिसर एवं बीडीओ अनिल कक्कड़ ने बताया कि पिछले कल 9 प्रवासी मजदूरों को घर भेजा गया है। उन्होंने बताया कि स्वारघाट उपमंडल की सभी पंचायतों में मनरेगा के कार्य शुरू हो चुके है और लगभग 600 करीब मजदूर कार्य कर रहे है। इस क्वार्टर के लिए 120 के करीब मस्टरोल निकाले गए है। प्रवासी मजदूरों को मोटीवेट किया जा रहा है कि हिमाचल में रह कर भी वे रोजगार प्राप्त कर सकते है। क्योंकि पूरे देश में लॉकडाउन की स्थिति है अगर वे वापस घर भी जाएंगे तो उन्हें एकदम से रोजगार नहीं मिल सकेगा। इसलिए इन प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने के लिए स्वारघाट प्रशासन वचनबद्ध है।
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बीडीओ अनिल कक्कड़ ने बताया कि देशभर से रेडजोन से आने वाले लोगों के लिए प्रशासन द्वारा उपमंडल स्वारघाट में पंचायत स्तर पर 23 संस्थागत क्वारंटीन सेंटर बनाए गए है। इनमे से 22 संस्थागत क्वारंटीन सेंटर स्कूलों को बनाया गया है।