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समागम में जत्थों के सबद कीर्तन सुन संगत हुई निहाल
Updated Mon, 26 Nov 2018 12:13 AM IST
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बिलासपुर/खजुरिया। श्री गुरु तेगबहादुर महाराज के शहीदी समागम में विभिन्न जत्थों ने दूसरे दिन रविवार को भी सबद-कीर्तन कर संगत को निहाल किया। गुरु का अटूट लंगर भी पूरे दिन बरताया गया।
गुरु तेग बहादुर सेवा समिति एवं इलाका की संगत बेगमाबाद सैंजना के तत्वावधान में रविवार को दूसरे दिन बेगमाबाद गांव में गुुरु तेगबहादुर का शहीदी समागम मनाया गया। रविवार की सुबह आसा दी वार का कीर्तन हुआ, इसके बाद गुरुद्वारे से पंडाल बिच श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज की पालकी नगर कीर्तन के साथ पहुंची और परंपरागत ढंग से श्री गुरुग्रंथ साहिब की स्थापना की गई।
भाई खजान सिंह के हजूरी रागी जत्थे, भाई ज्ञानी दलवीर सिंह गिल पंजाब के कविशरी जत्थे, बीवी बलविंद्र कौर पंजाब के ढाढी जत्थे और स्कूली बच्चों के जत्थों ने अलग- अलग सबद-कीर्तन कर संगत को घंटों निहाल किया।
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गुरु का अटूट लंगर दिन भर बरताया गया। इसके अलावा समागम स्थल पर ज्ञानवर्द्धक पुस्तकों और अन्य सामग्री के स्टाल भी लगाए गए थे तथा पंडाल के बाहर रोड किनारे मेला भी लगा था, जहां श्रद्धालुओं ने खरीदारी की।
दीवान शाम चार बजे तक चला। अरदास के बाद दीवान के समाप्ति की घोषणा की गई। दीवान का संचालन मस्तान सिंह ने किया। व्यवस्था में डा. जनकराज सिंह, गुरदयाल सिंह, राजेंद्र सिंह मिंटू, हरजीत सिंह पड्डा, बलवीर सिंह, महल सिंह, दलवीर सिंह, सचिन समेत पूरे इलाके की संगत मौजूद रही।
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गुरु तेग बहादुर सेवा समिति एवं इलाका की संगत बेगमाबाद सैंजना के तत्वावधान में रविवार को दूसरे दिन बेगमाबाद गांव में गुुरु तेगबहादुर का शहीदी समागम मनाया गया। रविवार की सुबह आसा दी वार का कीर्तन हुआ, इसके बाद गुरुद्वारे से पंडाल बिच श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज की पालकी नगर कीर्तन के साथ पहुंची और परंपरागत ढंग से श्री गुरुग्रंथ साहिब की स्थापना की गई।
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भाई खजान सिंह के हजूरी रागी जत्थे, भाई ज्ञानी दलवीर सिंह गिल पंजाब के कविशरी जत्थे, बीवी बलविंद्र कौर पंजाब के ढाढी जत्थे और स्कूली बच्चों के जत्थों ने अलग- अलग सबद-कीर्तन कर संगत को घंटों निहाल किया।
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गुरु का अटूट लंगर दिन भर बरताया गया। इसके अलावा समागम स्थल पर ज्ञानवर्द्धक पुस्तकों और अन्य सामग्री के स्टाल भी लगाए गए थे तथा पंडाल के बाहर रोड किनारे मेला भी लगा था, जहां श्रद्धालुओं ने खरीदारी की।
दीवान शाम चार बजे तक चला। अरदास के बाद दीवान के समाप्ति की घोषणा की गई। दीवान का संचालन मस्तान सिंह ने किया। व्यवस्था में डा. जनकराज सिंह, गुरदयाल सिंह, राजेंद्र सिंह मिंटू, हरजीत सिंह पड्डा, बलवीर सिंह, महल सिंह, दलवीर सिंह, सचिन समेत पूरे इलाके की संगत मौजूद रही।