{"_id":"5af5c7f14f1c1be4408b47e5","slug":"81526056945-bilaspur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"निजी स्कूलों को बताना होगा कितने गरीबों को दिया दाखिला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निजी स्कूलों को बताना होगा कितने गरीबों को दिया दाखिला
Updated Fri, 11 May 2018 10:33 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर।
शिक्षा का अधिकार-2009 नियम के तहत निजी स्कूलों ने कितने गरीब बच्चों को दाखिला दिया है, इसकी पूरी जानकारी निजी स्कूलों को एक सप्ताह के अंदर शिक्षा विभाग को देनी होगी। अगर किसी स्कूल ने गरीब बच्चों को प्रवेश नहीं दिया होगा तो ऐसे स्कूल संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक देवेंद्र पाल ने बताया कि अगर एक हफ्ते में निजी स्कूलों ने इसकी जानकारी नहीं दी तो इसके लिए निजी स्कूलों की जवाबदेही होगी।
हिमाचल प्रदेश में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए शिक्षा का अधिकार-2009 नियम के तहत निजी स्कूलों को दाखिला करवाने के आदेश दिए थे। इसके चलते निजी स्कूलों को पहली के साथ-साथ छठी कक्षा में 25 प्रतिशत दाखिले आरक्षित वर्ग और गरीब परिवारों के बच्चों को देने के आदेश सरकार की ओर से दिए गए हैं। इसके चलते गरीब परिवारों के बच्चों को भी अपने घर के पास अच्छी शिक्षा प्राप्त करने का मौका मिलना था। इसके तहत 25 प्रतिशत छात्रों की निजी स्कूलों में शिक्षा पूरी तरह से मुफ्त दी जानी है। इस पर जितना भी पैसा खर्च होगा, वह प्रदेश सरकार की ओर से दिया जाएगा।
शैक्षणिक सत्र 2018-19 में निजी स्कूलों को अपनी मनमानी करना और आरटीई के नियमों की अवहेलना करना खूब महंगा पड़ेगा। अगर किसी निजी स्कूल द्वारा 25 प्रतिशत सीटें एससी, एसटी, ओबीसी, बीपीएल और आईआरडीपी के छात्रों को प्रदान नहीं की गईं तो स्कूल संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक बिलासपुर देवेंद्र पाल ने बताया कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत पहली और छठीं कक्षा में निजी स्कूलों ने कितने बच्चों को दाखिला दिया है और अगर दाखिला नहीं दिया तो क्यों नहीं दिया, इसकी सारी जानकारी निजी स्कूलों को शिक्षा विभाग को देनी होगी। अगर यह सारी जानकारी निजी स्कूल शिक्षा विभाग को नहीं देते हैं तो निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बिलासपुर।
शिक्षा का अधिकार-2009 नियम के तहत निजी स्कूलों ने कितने गरीब बच्चों को दाखिला दिया है, इसकी पूरी जानकारी निजी स्कूलों को एक सप्ताह के अंदर शिक्षा विभाग को देनी होगी। अगर किसी स्कूल ने गरीब बच्चों को प्रवेश नहीं दिया होगा तो ऐसे स्कूल संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक देवेंद्र पाल ने बताया कि अगर एक हफ्ते में निजी स्कूलों ने इसकी जानकारी नहीं दी तो इसके लिए निजी स्कूलों की जवाबदेही होगी।
हिमाचल प्रदेश में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए शिक्षा का अधिकार-2009 नियम के तहत निजी स्कूलों को दाखिला करवाने के आदेश दिए थे। इसके चलते निजी स्कूलों को पहली के साथ-साथ छठी कक्षा में 25 प्रतिशत दाखिले आरक्षित वर्ग और गरीब परिवारों के बच्चों को देने के आदेश सरकार की ओर से दिए गए हैं। इसके चलते गरीब परिवारों के बच्चों को भी अपने घर के पास अच्छी शिक्षा प्राप्त करने का मौका मिलना था। इसके तहत 25 प्रतिशत छात्रों की निजी स्कूलों में शिक्षा पूरी तरह से मुफ्त दी जानी है। इस पर जितना भी पैसा खर्च होगा, वह प्रदेश सरकार की ओर से दिया जाएगा।
विज्ञापन
शैक्षणिक सत्र 2018-19 में निजी स्कूलों को अपनी मनमानी करना और आरटीई के नियमों की अवहेलना करना खूब महंगा पड़ेगा। अगर किसी निजी स्कूल द्वारा 25 प्रतिशत सीटें एससी, एसटी, ओबीसी, बीपीएल और आईआरडीपी के छात्रों को प्रदान नहीं की गईं तो स्कूल संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक बिलासपुर देवेंद्र पाल ने बताया कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत पहली और छठीं कक्षा में निजी स्कूलों ने कितने बच्चों को दाखिला दिया है और अगर दाखिला नहीं दिया तो क्यों नहीं दिया, इसकी सारी जानकारी निजी स्कूलों को शिक्षा विभाग को देनी होगी। अगर यह सारी जानकारी निजी स्कूल शिक्षा विभाग को नहीं देते हैं तो निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
विज्ञापन