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गीता महाजन ही बनी रहेंगी नगर परिषद अध्यक्षा
Updated Tue, 11 Dec 2018 11:01 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं नगर परिषद की अध्यक्ष पद की कुर्सी को लेकर दो नेत्रियों की बीच चल रही खींचातानी फिलहाल समाप्त हो गई है। मामले को सुलझाने के लिए बनाई गई कांग्रेस की तीन सदस्यों की कमेटी ने फैसला लिया है कि गीता महाजन ही आने पूरे समय तक नगर परिषद की अध्यक्षा बनी रहेगी जिससे फिलहाल कुछ समय के लिए तो माहौल शांत हो गया है लेकिन अब यह आने वाला समय ही बताएगा कि यह शांति कितने दिनों तक रहेगी।
बेशक चुनावों के समय दो नेत्रियों के बीच अढ़ाई-अढ़ाई साल तक अध्यक्षा बनने की बात हुई थी लेकिन वह सिरे नहीं चढ़ पाई है। वहीं बताया जा रहा है कि अढ़ाई-अढ़ाई साल की बातें सिरे न चढ़ने का सबसे बड़ा कारण जो एग्रीमेंट बनाया गया था उस पर अध्यक्ष पद पर वर्तमान में मौजूद गीता महाजन के हस्ताक्षर नहीं है।
कांग्रेस की यह दोनों नेत्रियों में अपने हठ की लड़ाई और वर्चस्व की लड़ाई से कहीं दूसरे न फायदा ले यह कांग्रेस के लिए आम चिंतन का विषय है। दोनों नेत्रियों को अब कांग्रेस की पृष्ठभूमि से पहचाना जाता हैं, जबकि एक नेत्री निर्दलीय चुनाव जीतकर आई थी और फिर कांग्रेस में शामिल हुई थी। इसके ऊपर अगर कांग्रेस चिंतन नहीं करती हैं तो पछताने के अलावा हाथ पे हाथ धरे रहने को मजबूर रहना पड़ेगा।
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ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष व कमेटी अध्यक्ष जागीर सिंह मेहता ने कहा कि कुछ दिनों पहले कांग्रेस के सभी पार्षदों के साथ मिलकर बैठक हुई थी, जिसमें दोनों को समझाते हुए कहा गया है कि जिस-जिस पद पर काबिज हैं, दोनों उसी पर ही बनी रहेंगी। तीन सदस्यों की जो कमेटी गठित की गई है ने निर्णय दिया है कि गीता महाजन ही नगर परिषद की कुर्सी पर पांच सालों के लिए काबिज रहेंगी।
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घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं नगर परिषद की अध्यक्ष पद की कुर्सी को लेकर दो नेत्रियों की बीच चल रही खींचातानी फिलहाल समाप्त हो गई है। मामले को सुलझाने के लिए बनाई गई कांग्रेस की तीन सदस्यों की कमेटी ने फैसला लिया है कि गीता महाजन ही आने पूरे समय तक नगर परिषद की अध्यक्षा बनी रहेगी जिससे फिलहाल कुछ समय के लिए तो माहौल शांत हो गया है लेकिन अब यह आने वाला समय ही बताएगा कि यह शांति कितने दिनों तक रहेगी।
बेशक चुनावों के समय दो नेत्रियों के बीच अढ़ाई-अढ़ाई साल तक अध्यक्षा बनने की बात हुई थी लेकिन वह सिरे नहीं चढ़ पाई है। वहीं बताया जा रहा है कि अढ़ाई-अढ़ाई साल की बातें सिरे न चढ़ने का सबसे बड़ा कारण जो एग्रीमेंट बनाया गया था उस पर अध्यक्ष पद पर वर्तमान में मौजूद गीता महाजन के हस्ताक्षर नहीं है।
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कांग्रेस की यह दोनों नेत्रियों में अपने हठ की लड़ाई और वर्चस्व की लड़ाई से कहीं दूसरे न फायदा ले यह कांग्रेस के लिए आम चिंतन का विषय है। दोनों नेत्रियों को अब कांग्रेस की पृष्ठभूमि से पहचाना जाता हैं, जबकि एक नेत्री निर्दलीय चुनाव जीतकर आई थी और फिर कांग्रेस में शामिल हुई थी। इसके ऊपर अगर कांग्रेस चिंतन नहीं करती हैं तो पछताने के अलावा हाथ पे हाथ धरे रहने को मजबूर रहना पड़ेगा।
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ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष व कमेटी अध्यक्ष जागीर सिंह मेहता ने कहा कि कुछ दिनों पहले कांग्रेस के सभी पार्षदों के साथ मिलकर बैठक हुई थी, जिसमें दोनों को समझाते हुए कहा गया है कि जिस-जिस पद पर काबिज हैं, दोनों उसी पर ही बनी रहेंगी। तीन सदस्यों की जो कमेटी गठित की गई है ने निर्णय दिया है कि गीता महाजन ही नगर परिषद की कुर्सी पर पांच सालों के लिए काबिज रहेंगी।