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जिला में दूध व गोमूत्र पर आधारित 10 उद्योग लगेंगे
Updated Thu, 22 Feb 2018 11:04 PM IST
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बिलासपुर। औद्योगिक क्षेत्र बिलासपुर की तस्वीर बदलने के लिए देसी गायों के उत्पादों दूध व गोमूत्र पर आधारित 10 उद्योगों की स्थापना होगी। इसमें कुछ प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत लगाए जाएंगे। जिस पर सरकार की ओर से 25 से 35 फीसदी तक का अनुदान दिया जाएगा। इसकी पुष्टि करते हुए महाप्रबंधक ज्ञान सिंह चौहान ने बताया कि जिला उद्योग केंद्र बिलासपुर और लघु उद्योग संघ बिलासपुर द्वारा इस विषय पर मंथन किया गया।
उन्होंने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र बिलासपुर में देसी गायों के गोबर, गोमूत्र और दूध पर आधारित लगभग 10 उत्पाद तैयार किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि इनमें गोमूत्र अर्क, दवाइयां, गोनाइल, धूप, अगरबत्ती, हवन सामग्री, कॉयल, गमले, उपले, साबुन, लकड़ी, आर्गेनिक पेस्टीसाइड, मूर्तियां, दहीं, प्रिंटिंग व पैकेजिंग आदि प्रमुख उत्पाद होंगे। कौन क्या उत्पाद तैयार करेगा इसका निर्धारण भी कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि इनमें से कुछ प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत स्वीकृत किए जाएंगे, जिसमें 25 से 35 फीसदी तक का अनुदान रहेगा। यह कार्य इसी वित्त वर्ष में पूरा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि इन सभी उत्पादों की मार्केटिंग के लिए संबंधित उद्यमियों का व्यास नंदिनी नामक एनजीओ गठित किया जाएगा। जो कामधेनु संस्था बिलासपुर, पतंजलि ट्रस्ट हरिद्वार और प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर इन उत्पादों की बिक्री में सहायता करने के लिए संबंधित जिला उपायुक्तों की मदद लेगा।
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उन्होंने बताया इस कलस्टर के तहत स्थापित होने वाले प्रोजेक्ट्स की लागत 2 लाख रुपये से लेकर 25 लाख तक होगी। इस प्रकार सभी प्रोजेक्ट की लागत लगभग 1 करोड़ होगी। इसमें लगभग 100 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट उपायुक्त बिलासपुर को प्रस्तुत किए गए 100 दिन एक्शन प्लान का हिस्सा हैं। जिसे हर हाल में साकार किया जाएगा। बताया कि आगामी नलवाड़ी मेले के दौरान उद्योग विभाग के स्टाल में इन प्रोजेक्ट की प्रदर्शनी लगाई जाएगी ताकि आम लोगों के बीच इस प्रोजेक्ट का प्रचार-प्रसार हो सके।
जीएम ज्ञान सिंह चौहान बताया कि यह प्रोजेक्ट राज्यपाल की प्रेरणा लेकर शुरू किया जा रहा है। इसकी सफलता से लोगों में देसी गाय की उपयोगिता समझ में आएगी। इस प्रकार के प्रोजेक्ट लगाकर स्वयं और प्रदेश की आर्थिक तरक्की में योगदान होगा। उद्योग विभाग बिलासपुर द्वारा प्लाट दुरुस्तीकरण अभियान का परिणाम है कि इस तरह का कलस्टर अस्तित्व में आ रहा है।
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उन्होंने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र बिलासपुर में देसी गायों के गोबर, गोमूत्र और दूध पर आधारित लगभग 10 उत्पाद तैयार किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि इनमें गोमूत्र अर्क, दवाइयां, गोनाइल, धूप, अगरबत्ती, हवन सामग्री, कॉयल, गमले, उपले, साबुन, लकड़ी, आर्गेनिक पेस्टीसाइड, मूर्तियां, दहीं, प्रिंटिंग व पैकेजिंग आदि प्रमुख उत्पाद होंगे। कौन क्या उत्पाद तैयार करेगा इसका निर्धारण भी कर दिया गया है।
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उन्होंने बताया कि इनमें से कुछ प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत स्वीकृत किए जाएंगे, जिसमें 25 से 35 फीसदी तक का अनुदान रहेगा। यह कार्य इसी वित्त वर्ष में पूरा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि इन सभी उत्पादों की मार्केटिंग के लिए संबंधित उद्यमियों का व्यास नंदिनी नामक एनजीओ गठित किया जाएगा। जो कामधेनु संस्था बिलासपुर, पतंजलि ट्रस्ट हरिद्वार और प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर इन उत्पादों की बिक्री में सहायता करने के लिए संबंधित जिला उपायुक्तों की मदद लेगा।
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उन्होंने बताया इस कलस्टर के तहत स्थापित होने वाले प्रोजेक्ट्स की लागत 2 लाख रुपये से लेकर 25 लाख तक होगी। इस प्रकार सभी प्रोजेक्ट की लागत लगभग 1 करोड़ होगी। इसमें लगभग 100 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट उपायुक्त बिलासपुर को प्रस्तुत किए गए 100 दिन एक्शन प्लान का हिस्सा हैं। जिसे हर हाल में साकार किया जाएगा। बताया कि आगामी नलवाड़ी मेले के दौरान उद्योग विभाग के स्टाल में इन प्रोजेक्ट की प्रदर्शनी लगाई जाएगी ताकि आम लोगों के बीच इस प्रोजेक्ट का प्रचार-प्रसार हो सके।
जीएम ज्ञान सिंह चौहान बताया कि यह प्रोजेक्ट राज्यपाल की प्रेरणा लेकर शुरू किया जा रहा है। इसकी सफलता से लोगों में देसी गाय की उपयोगिता समझ में आएगी। इस प्रकार के प्रोजेक्ट लगाकर स्वयं और प्रदेश की आर्थिक तरक्की में योगदान होगा। उद्योग विभाग बिलासपुर द्वारा प्लाट दुरुस्तीकरण अभियान का परिणाम है कि इस तरह का कलस्टर अस्तित्व में आ रहा है।