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16 माह पहले आई शिकायतों का नहीं हुआ निपटारा
Updated Thu, 19 Jul 2018 11:02 PM IST
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बिलासपुर। किरतपुर-नेरचौक फोरलेन समिति ने 16 माह बाद भी 11 सदस्यीय टीम के पास आई शिकायतों पर कोई कार्रवाई न किए जाने को लेकर सीएम को शिकायत पत्र भेजा है। शिकायत पत्र में उन्होंने मुख्य सचिव और लोनिवि के संयुक्त सचिव की भी शिकायत की है।
समिति का आरोप है कि मुख्य सचिव इस विषय पर कोई भी बात करने से आनाकानी कर रहे हैं, जबकि लोनिवि के संयुक्त सचिव किसी भी पत्र का जवाब नहीं दे रहे हैं। अब उन्होंने सीएम से गुहार लगाई है कि मामले में हस्तक्षेप कर कार्रवाई की जाए।
समिति का कहना है कि किरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण में बरती गई अनियमितताओं पर 16 माह पहले नयनादेवी के विधायक रणधीर शर्मा ने विधानसभा में मामला उठाया था। इसके बाद तत्कालीन सीएम ने डीसी को टीम बनाकर लोगों की समस्याओं को सुनने के आदेश दिए थे। जिस पर डीसी ने 11 सदस्यों की टीम बनाई थी। तीन दिन में टीम के पास 2000 शिकायतें पहुंची थीं। इसकी रिपोर्ट लोनिवि के संयुक्त सचिव को भेजी। लोनिवि ने उस रिपोर्ट को एनएएचआई के रिजनल अधिकारी शिमला को भेजा। जहां से रिपोर्ट मंडी एनएचएआई के परियोजना निदेशक को भेज दी गई। लेकिन विडंबना यह है कि आज दिन तक उस रिपोर्ट पर कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि विस्थापित आज भी ब्लास्टिंग से टूटे हुए मकानों में रहने को विवश हैं। कोई भी कार्रवाई न होने पर समिति ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विरोध दर्ज करवाया है।
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समिति का कहना है कि जब मुख्य सचिव से बातचीत करने की कोशिश की तो मुख्य सचिव ने बात सुनने से इनकार कर दिया। इसकी शिकायत भी समिति ने सीएम से की है। उन्होंने मुख्यमंत्री से उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
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समिति का आरोप है कि मुख्य सचिव इस विषय पर कोई भी बात करने से आनाकानी कर रहे हैं, जबकि लोनिवि के संयुक्त सचिव किसी भी पत्र का जवाब नहीं दे रहे हैं। अब उन्होंने सीएम से गुहार लगाई है कि मामले में हस्तक्षेप कर कार्रवाई की जाए।
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समिति का कहना है कि किरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण में बरती गई अनियमितताओं पर 16 माह पहले नयनादेवी के विधायक रणधीर शर्मा ने विधानसभा में मामला उठाया था। इसके बाद तत्कालीन सीएम ने डीसी को टीम बनाकर लोगों की समस्याओं को सुनने के आदेश दिए थे। जिस पर डीसी ने 11 सदस्यों की टीम बनाई थी। तीन दिन में टीम के पास 2000 शिकायतें पहुंची थीं। इसकी रिपोर्ट लोनिवि के संयुक्त सचिव को भेजी। लोनिवि ने उस रिपोर्ट को एनएएचआई के रिजनल अधिकारी शिमला को भेजा। जहां से रिपोर्ट मंडी एनएचएआई के परियोजना निदेशक को भेज दी गई। लेकिन विडंबना यह है कि आज दिन तक उस रिपोर्ट पर कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि विस्थापित आज भी ब्लास्टिंग से टूटे हुए मकानों में रहने को विवश हैं। कोई भी कार्रवाई न होने पर समिति ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विरोध दर्ज करवाया है।
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समिति का कहना है कि जब मुख्य सचिव से बातचीत करने की कोशिश की तो मुख्य सचिव ने बात सुनने से इनकार कर दिया। इसकी शिकायत भी समिति ने सीएम से की है। उन्होंने मुख्यमंत्री से उचित कार्रवाई करने की मांग की है।