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रेलवे गेट बंद करने आए कर्मियों को ग्रामीणों ने दौड़ाया
Updated Sat, 14 Apr 2018 12:45 AM IST
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रेलवे गेट बंद करने आए कर्मियों को ग्रामीणों ने दौड़ाया
बिलासपुर/केमरी (रामपुर)।
जनूनागर-सुहागनगला के बीच मानव रहित रेलवे गेट बंद करने पहुंचे रेलवे कर्मियों को ग्रामीणों ने जमकर खरीखेांटी सुनाई। ग्रामीणों का कहना है कि भूमिगत रास्ता बनने से पीलाखार नदी की बाढ़ उनके गांव को तबाह कर देगी। ग्रामीणों ने रेलवे के कर्मियों को नया रास्ता नहीं बनाने दिया, बल्कि विरोध स्वरुप दौड़ा दिया।
शुक्रवार की अपराह्न रेलवे विभाग के कुछ कर्मचारी साइट इंजीनियर के नेतृत्व में ग्राम जनूनागर-सुहागनगला के मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर पहुंचे और क्रासिंग के पास कर्मियों ने भूमिगत रास्ता बनाना शुरु कर दिया। इस दौरान जानकारी होने पर जनूनगार, सुहागनगलाद्व स्वार खुर्द आदि गांव के तमाम लोग मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने रेलवे लाइन के नीचे रास्ता बनाने का विरोध करना शुरु कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर विभाग को फाटक लगाना चाहिए, ताकि कोई घटना न घटे।
भूमिगत रास्ता बनने से समीप में बहने वाली पीलाखार नदी का पानी बरसात के दिनों में भूमिगत रास्ते से उनके गांव में घुस जाएगा और पूरी नदी की बाढ़ उनके गांवों को तबाह कर देगी, जिसे कोई भी ग्रामीण बर्दाश्त नहीं करेगा। रेलवे कर्मियों ने ग्रामीणों को एक सप्ताह का समय देते हुए कहा कि वह एक सप्ताह में अपना इंतजाम कर लें, बर्ना वह एक सप्ताह बाद भूमिगत रास्ता बना देंगे। ग्रामीणों के विरोध के कारण रेलवे के कर्मचारी बैरंग ही लोट गए। ग्रामीणों का कहना है कि वह इस संबंध में अपनी समस्या सिंचाई मंत्री के सामने रखेंगे।
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बिलासपुर/केमरी (रामपुर)।
जनूनागर-सुहागनगला के बीच मानव रहित रेलवे गेट बंद करने पहुंचे रेलवे कर्मियों को ग्रामीणों ने जमकर खरीखेांटी सुनाई। ग्रामीणों का कहना है कि भूमिगत रास्ता बनने से पीलाखार नदी की बाढ़ उनके गांव को तबाह कर देगी। ग्रामीणों ने रेलवे के कर्मियों को नया रास्ता नहीं बनाने दिया, बल्कि विरोध स्वरुप दौड़ा दिया।
शुक्रवार की अपराह्न रेलवे विभाग के कुछ कर्मचारी साइट इंजीनियर के नेतृत्व में ग्राम जनूनागर-सुहागनगला के मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर पहुंचे और क्रासिंग के पास कर्मियों ने भूमिगत रास्ता बनाना शुरु कर दिया। इस दौरान जानकारी होने पर जनूनगार, सुहागनगलाद्व स्वार खुर्द आदि गांव के तमाम लोग मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने रेलवे लाइन के नीचे रास्ता बनाने का विरोध करना शुरु कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर विभाग को फाटक लगाना चाहिए, ताकि कोई घटना न घटे।
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भूमिगत रास्ता बनने से समीप में बहने वाली पीलाखार नदी का पानी बरसात के दिनों में भूमिगत रास्ते से उनके गांव में घुस जाएगा और पूरी नदी की बाढ़ उनके गांवों को तबाह कर देगी, जिसे कोई भी ग्रामीण बर्दाश्त नहीं करेगा। रेलवे कर्मियों ने ग्रामीणों को एक सप्ताह का समय देते हुए कहा कि वह एक सप्ताह में अपना इंतजाम कर लें, बर्ना वह एक सप्ताह बाद भूमिगत रास्ता बना देंगे। ग्रामीणों के विरोध के कारण रेलवे के कर्मचारी बैरंग ही लोट गए। ग्रामीणों का कहना है कि वह इस संबंध में अपनी समस्या सिंचाई मंत्री के सामने रखेंगे।
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