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जिला अस्पताल में अब मरीजों को ठंड से मिलेगी राहत
Updated Fri, 12 Jan 2018 11:15 PM IST
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बिलासपुर। जिला अस्पताल में ठंड से ठिठुरते मरीजों को राहत देने की कवायद चल रही है। अस्पताल प्रशासन विभिन्न वार्डों में हीटर के बजाए ब्लोअर लगाने की तैयारी में है। लेकिन मरीजों को इस राहत के लिए अगले सीजन तक का इंतजार करना होगा। क्योंकि यह प्रस्ताव रोगी कल्याण समिति की बैठक में लाया जाना है जो अप्रैल में होनी प्रस्तावित है। जिला अस्पताल में सर्जरी, मेडिकल, शिशु, गायनी, जर्नल, ऑर्थो के वार्ड हैं। सबसे ज्यादा भीड़ मेडिकल, शिशु व गायनी वार्ड में होती है। गायनी वार्ड में तो हर समय करीब 30 से 40 महिलाएं भर्ती रहती हैं। इसके अलावा मेडिकल व जर्नल वार्ड में भी मरीजों की तादाद ज्यादा रहती है। बड़े-बड़े हॉल होने के कारण यहां पर सभी मरीजों को हीटर उपलब्ध नहीं हो पाता। जिससे कई बार मरीजों को ठंड से ठिठुरना पड़ता है। वहीं, ज्यादा संख्या में हीटरों के चलने से बिजली के तार जलने का भी खतरा बना रहता है। ब्लोअर लगने से कई सारे झंझटों से छुटकारा मिलेगा।
ब्लोअर लगने से सबसे ज्यादा लाभ गायनी वार्ड में महिलाओं को मिलेगा। क्योंकि डिलीवरी के वक्त महिलाओं केे आसपास का वातावरण गर्म होना चाहिए। जिसकेे लिए हीटर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में एक साथ चार या पांच से ज्यादा हीटरों को लगा पाना मुमकिन नहीं होता। ब्लोअर से गायनी वार्ड के कमरे व डिलीवरी रूम गर्म रहेंगे। जिससे उन्हें ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
एसएमओ व शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश शर्मा ने बताया कि जिला अस्पताल में हीटर प्रथा को बंद कर वार्डों में ब्लोअर लगाने पर विचार किया जा रहा है। अप्रैल माह में होने वाली आरकेएस की बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा। प्रस्ताव के पास होने के बाद इसका कार्य जल्द शुरू कर दिया जाएगा।
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ब्लोअर लगने से सबसे ज्यादा लाभ गायनी वार्ड में महिलाओं को मिलेगा। क्योंकि डिलीवरी के वक्त महिलाओं केे आसपास का वातावरण गर्म होना चाहिए। जिसकेे लिए हीटर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में एक साथ चार या पांच से ज्यादा हीटरों को लगा पाना मुमकिन नहीं होता। ब्लोअर से गायनी वार्ड के कमरे व डिलीवरी रूम गर्म रहेंगे। जिससे उन्हें ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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एसएमओ व शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश शर्मा ने बताया कि जिला अस्पताल में हीटर प्रथा को बंद कर वार्डों में ब्लोअर लगाने पर विचार किया जा रहा है। अप्रैल माह में होने वाली आरकेएस की बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा। प्रस्ताव के पास होने के बाद इसका कार्य जल्द शुरू कर दिया जाएगा।
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