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श्रीनयनादेवी में मेलों के चलते चार आरतियां हो रहीं एक साथ
Updated Wed, 10 Oct 2018 08:16 PM IST
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श्रीनयनादेवी में मेलों के चलते चार आरतियां हो रहीं एक साथ
पहले दिन सुबह चार बजे खुले मां श्री नयना देवी के मंदिर के कपाट, हजारों ने माथा टेका
दूसरे नवरात्र में सुबह दो बजे ही खोल दिए जाएंगे मां के मंदिर के कपाट
तरूणेश शर्मा
श्री नयना देवी (बिलासपुर)। उत्तर भारत के शक्तिपीठ श्री नयना देवी में शारदीय नवरात्र शुरू हो गए हैं। पहले दिन मंदिर के कपाट सुबह चार बजे खोले गए। करीब आठ हजार श्रद्धालुओं ने मां श्री नयना देवी के दर्शन किए। जबकि दूसरे नवरात्र से मंदिर के कपाट सुबह अढ़ाई बजे से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। देर शाम तक भी मंदिर में श्रद्धालुओं का आनाजाना लगा रहा। आने वाले दिनों में भीड़ के ज्यादा बढ़ने की संभावनाएं हैं।
वहीं मां की होने वाली पांच आरतियों के समय में भी बदलाव हो गया है। मंदिर में होने वाली पांच आरतियों में से चार मेलों के चलते एक साथ रात 12 बजे से सुबह दो बजे तक की जा रही हैं, जबकि एक आरती दोपहर 12 बजे से 12:30 बजे तक की जा रही है। एक साथ होने वाली चार आरतियों में सायंकालीन आरती, शयन आरती, मंगल आरती व श्रृंगार आरती है। जबकि पांचवीं आरती ध्यान आरती है। इसके अलावा अलग-अलग आरतियों में भी अलग-अलग भोग मां को लगाया जा रहा है, जोकि मां की अलग रसोई में विशेष रसोइयों की ओर से तैयार किया जाता है। मां को बनने वाले हर पकवान में देसी घी का ही प्रयोग किया जाता है। सायंकालीन आरती में मां को चने व पूरी का प्रसाद, शयन आरती में दूध, बर्फी व फल का प्रसाद, मंगल आरती में सूखे मेवे का प्रसाद मां को चढ़ाया जाता है, जबकि श्रृंगार आरती में हलवा पुरी, बर्फी के प्रसाद का भोग मां को लगाया जाता है। इसके अलावा दोपहर को होने वाली आरती ध्यान आरती में मां को राजसी भोग लगाया जाता है जिसमें भांति-भांति के पकवान मां के लिए बनाए जाते हैं। भोग लगाने के बाद प्रसाद को श्रद्धालुओं में वितरित कर दिया जाता है। मेलों के चलते आरतियों के समय में बदलाव किया जाता है। बाकी के दिनों में हर एक आरती का समय अलग-अलग होता है।
मंदिर अधिकारी दुर्गा दास यादव ने बताया कि पहले दिन करीब 8 हजार श्रद्धालुओं ने माथा टेका है। दूसरे नवरात्र को सुबह दो बजे मंदिर कपाट खोल दिए जाएंगे।
इनसेट...
कब, कैसे और क्या होता है आरतियों में
1. मंगल आरती सुबह चार बजे से साढ़े चार बजे तक होती है। इसमें मां का रात को सोने के लिए सजाया गया शयन उठाया जाता है।
2. श्रृंगार आरती सुबह पांच बजे साढ़े छह बजे तक होती है। इसमें मां को स्नान होता है व रात वाले वस्त्र बदले जाते हैं।
3. मध्याहन आरती दोपहर 12 बजे से साढ़े 12 बजे तक होती है, इसमें मां की आरती होती है व राजसी भोग लगाया जाता है।
4. सायंकालीन आरती शाम साढ़े बजे से आठ बजे तक होती है। इसमें भी मां का स्नान व दिन के वस्त्र बदले जाते हैं।
5. शयन आरती रात साढ़े नौ बजे होती है, जो दस बजे तक चलती है। इसमें मां की सेज बिछाई जाती है व सोने के लिए बिस्तर सजाया जाता है।
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....खेमराज शर्मा।
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पहले दिन सुबह चार बजे खुले मां श्री नयना देवी के मंदिर के कपाट, हजारों ने माथा टेका
दूसरे नवरात्र में सुबह दो बजे ही खोल दिए जाएंगे मां के मंदिर के कपाट
तरूणेश शर्मा
श्री नयना देवी (बिलासपुर)। उत्तर भारत के शक्तिपीठ श्री नयना देवी में शारदीय नवरात्र शुरू हो गए हैं। पहले दिन मंदिर के कपाट सुबह चार बजे खोले गए। करीब आठ हजार श्रद्धालुओं ने मां श्री नयना देवी के दर्शन किए। जबकि दूसरे नवरात्र से मंदिर के कपाट सुबह अढ़ाई बजे से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। देर शाम तक भी मंदिर में श्रद्धालुओं का आनाजाना लगा रहा। आने वाले दिनों में भीड़ के ज्यादा बढ़ने की संभावनाएं हैं।
वहीं मां की होने वाली पांच आरतियों के समय में भी बदलाव हो गया है। मंदिर में होने वाली पांच आरतियों में से चार मेलों के चलते एक साथ रात 12 बजे से सुबह दो बजे तक की जा रही हैं, जबकि एक आरती दोपहर 12 बजे से 12:30 बजे तक की जा रही है। एक साथ होने वाली चार आरतियों में सायंकालीन आरती, शयन आरती, मंगल आरती व श्रृंगार आरती है। जबकि पांचवीं आरती ध्यान आरती है। इसके अलावा अलग-अलग आरतियों में भी अलग-अलग भोग मां को लगाया जा रहा है, जोकि मां की अलग रसोई में विशेष रसोइयों की ओर से तैयार किया जाता है। मां को बनने वाले हर पकवान में देसी घी का ही प्रयोग किया जाता है। सायंकालीन आरती में मां को चने व पूरी का प्रसाद, शयन आरती में दूध, बर्फी व फल का प्रसाद, मंगल आरती में सूखे मेवे का प्रसाद मां को चढ़ाया जाता है, जबकि श्रृंगार आरती में हलवा पुरी, बर्फी के प्रसाद का भोग मां को लगाया जाता है। इसके अलावा दोपहर को होने वाली आरती ध्यान आरती में मां को राजसी भोग लगाया जाता है जिसमें भांति-भांति के पकवान मां के लिए बनाए जाते हैं। भोग लगाने के बाद प्रसाद को श्रद्धालुओं में वितरित कर दिया जाता है। मेलों के चलते आरतियों के समय में बदलाव किया जाता है। बाकी के दिनों में हर एक आरती का समय अलग-अलग होता है।
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मंदिर अधिकारी दुर्गा दास यादव ने बताया कि पहले दिन करीब 8 हजार श्रद्धालुओं ने माथा टेका है। दूसरे नवरात्र को सुबह दो बजे मंदिर कपाट खोल दिए जाएंगे।
इनसेट...
कब, कैसे और क्या होता है आरतियों में
1. मंगल आरती सुबह चार बजे से साढ़े चार बजे तक होती है। इसमें मां का रात को सोने के लिए सजाया गया शयन उठाया जाता है।
2. श्रृंगार आरती सुबह पांच बजे साढ़े छह बजे तक होती है। इसमें मां को स्नान होता है व रात वाले वस्त्र बदले जाते हैं।
3. मध्याहन आरती दोपहर 12 बजे से साढ़े 12 बजे तक होती है, इसमें मां की आरती होती है व राजसी भोग लगाया जाता है।
4. सायंकालीन आरती शाम साढ़े बजे से आठ बजे तक होती है। इसमें भी मां का स्नान व दिन के वस्त्र बदले जाते हैं।
5. शयन आरती रात साढ़े नौ बजे होती है, जो दस बजे तक चलती है। इसमें मां की सेज बिछाई जाती है व सोने के लिए बिस्तर सजाया जाता है।
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....खेमराज शर्मा।