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चार साल में डंपिंग साइटें तय नहीं कर पाया विभाग
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किमखोला के पास मलबा हटाती जेसीबी
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के शेष बचे कार्य का मलबा कहां डंप किया जाएगा इस संबंध में वन विभाग के पास कोई जानकारी नहीं है। जबकि 2015 में एनजीटी की टीम जिसके सदस्य डीएफओ और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी भी सदस्य थे टीम ने साफ पूछा था कि 60 फीसदी बचे कार्य का मलबा कहां डंप किया जाएगा, कितनी डंपिंग साइटें बनाई जाएंगी और सड़क निर्माण में कितना मलबा खपत होगा लेकिन अभी तक संबंधित विभाग यह तय नहीं कर पाया है कि मलबा कहां डंप होगा। इसका खुलासा सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी से हुआ है। हालांकि वर्तमान में सड़क निर्माण कार्य बंद पड़ा है।
उल्लेखनीय है कि एनजीटी की टीम ने 2015 में एक शिकायत पर उक्त फोरलेन का निरीक्षण किया था। पूरा का पूरा कार्य कोर्ट के आदेश पर हुआ था। इस दौरान टीम ने मौके पर परियोजना निदेशक से पूछा था कि कितना निर्माण पूरा हुआ है और शेष कितना बचा है जिस पर अधिकारी ने बताया था कि 60 फीसदी कार्य अभी शेष है। इस दौरान एनजीटी की टीम ने कहा कि संबंधित विभाग को इस बारे में रिपोर्ट देने को कहा था जिसमें यह बताना था कि शेष कार्य से कितना मलबा निकलेगा। मलबा कहां डंप होगा और सड़क निर्माण में कितना खपत होगा। इसकी कमेटी ने पूरी जानकारी मांगी थी।
अब जब करीब पांच साल बाद फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने इस संबंध में वन विभाग और पर्यावरण विभाग से जानकारी मांगी तो वन विभाग की ओर से डीएफओ बिलासपुर सरोज भाई पटेल ने पत्र संख्या 9865 के तहत बताया कि यह सूचना कार्य में नहीं है। इसके बाद अब इस संबंध में दायर अपील की सुनवाई करते हुए अरण्यपाल आरएस पटियाल ने आदेश दिए कि डीएफओ इस संबंध में पूरी जानकारी दस दिनों के अंदर दें।
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बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के शेष बचे कार्य का मलबा कहां डंप किया जाएगा इस संबंध में वन विभाग के पास कोई जानकारी नहीं है। जबकि 2015 में एनजीटी की टीम जिसके सदस्य डीएफओ और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी भी सदस्य थे टीम ने साफ पूछा था कि 60 फीसदी बचे कार्य का मलबा कहां डंप किया जाएगा, कितनी डंपिंग साइटें बनाई जाएंगी और सड़क निर्माण में कितना मलबा खपत होगा लेकिन अभी तक संबंधित विभाग यह तय नहीं कर पाया है कि मलबा कहां डंप होगा। इसका खुलासा सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी से हुआ है। हालांकि वर्तमान में सड़क निर्माण कार्य बंद पड़ा है।
उल्लेखनीय है कि एनजीटी की टीम ने 2015 में एक शिकायत पर उक्त फोरलेन का निरीक्षण किया था। पूरा का पूरा कार्य कोर्ट के आदेश पर हुआ था। इस दौरान टीम ने मौके पर परियोजना निदेशक से पूछा था कि कितना निर्माण पूरा हुआ है और शेष कितना बचा है जिस पर अधिकारी ने बताया था कि 60 फीसदी कार्य अभी शेष है। इस दौरान एनजीटी की टीम ने कहा कि संबंधित विभाग को इस बारे में रिपोर्ट देने को कहा था जिसमें यह बताना था कि शेष कार्य से कितना मलबा निकलेगा। मलबा कहां डंप होगा और सड़क निर्माण में कितना खपत होगा। इसकी कमेटी ने पूरी जानकारी मांगी थी।
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अब जब करीब पांच साल बाद फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने इस संबंध में वन विभाग और पर्यावरण विभाग से जानकारी मांगी तो वन विभाग की ओर से डीएफओ बिलासपुर सरोज भाई पटेल ने पत्र संख्या 9865 के तहत बताया कि यह सूचना कार्य में नहीं है। इसके बाद अब इस संबंध में दायर अपील की सुनवाई करते हुए अरण्यपाल आरएस पटियाल ने आदेश दिए कि डीएफओ इस संबंध में पूरी जानकारी दस दिनों के अंदर दें।
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