{"_id":"5bf99241bdec224173175dff","slug":"181543082561-bilaspur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीस दिन के भीतर मुहैया करवाएं 70 मामलों का राजस्व रिकॉर्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीस दिन के भीतर मुहैया करवाएं 70 मामलों का राजस्व रिकॉर्ड
Updated Sat, 24 Nov 2018 11:32 PM IST
विज्ञापन
निर्माणाधीन बारहमासी सड़क पर शुरू हुआ डामरीकरण का कार्य।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। बिलासपुर में बन रहे कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन भू-अधिग्रहण के राजस्व से संबंधित 70 मामलों के सभी तरह के रिकॉर्ड 30 दिन में मुहैया करवाने के आदेश हुए हैं। यह आदेश भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई के भू-अर्जन अधिकारी को सोशल विकास लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी ने दिए हैं, अगर 30 दिन में भू-मालिकों को इसकी जानकारी नहीं मिली तो 30 दिन बाद फोरलेन विस्थापित मुख्य राज्य सूचना आयुक्त के समक्ष अपील दायर करेंगे।
गौरतलब है कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण में बरती गई अनियमितताओं में सबसे बड़ी परेशानी लोगों को यह आ रही थी कि जो रिकॉर्ड अधिकृत किए गए नंबर खसरा से शेष बच रही निजी भूमि का जो राजस्व रिकॉर्ड बनाया गया था वह विस्थापितों को पढ़ने में नहीं आ रहा है। इसकी विभिन्न तहसीलों के पटवार वृत्तों के पटवारी हलकों ने आरटीआई के तहत फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति को जानकारी दी है।
इन रिकॉर्ड को दुरुस्त करने के लिए पूर्व में रहे तत्कालीन उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर ने भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई के तहसीलदार को संबंधित उपमंडलाधिकारियों से नियमानुसार अनुमति लेकर एक महीने के अंदर दुरुस्ती करने के आदेश दिए थे लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की है। इसकी शिकायत जिला राजस्व अधिकारी को की जा चुकी है।
विज्ञापन
वहीं विभिन्न गांवों के बागठेड़ू, पल्थी, औहर, दड़याणा, कल्लर, कोठी, बैहना जट्टा, समलेटू, धराड़सानी, छत, जकातखाना, सुन्हण, जब्बल, मैहला, थापना, पट्टा, तुन्नू, कल्लर-दो आदि के भू-मालिकों ने आरटीआई के तहत अपनी निजी भूमि की जानकारी मांगी थी। इस पर उक्त इकाई ने पटवार वृत्तों के नकल शाखा या राजस्व पटवारी से फीस नकुलात देकर अपनी जानकारी देने बारे लिखा था। इस संबंध में पटवारी हलकों ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि कुछ पढ़ने योग्य है कुछ नहीं। इसी से असंतुष्ट होकर उपरोक्त गांवों के भू-मालिकों ने शिमला में प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष नियमानुसार अपील दायर की थी, जिसका फैसला करते हुए लोनिवि के चीफ इंजीनियर ने अपने पत्र संख्या (एचपी-आरआईडीसी /एसडीओ /आरटीआई -2018 हि.प्र. लोनिवि 706-07) दिनांक 8-10-2018 को 30 दिन के भीतर भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई के भू-अर्जन अधिकारी को जानकारी देने को कहा है।
विज्ञापन
बिलासपुर। बिलासपुर में बन रहे कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन भू-अधिग्रहण के राजस्व से संबंधित 70 मामलों के सभी तरह के रिकॉर्ड 30 दिन में मुहैया करवाने के आदेश हुए हैं। यह आदेश भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई के भू-अर्जन अधिकारी को सोशल विकास लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी ने दिए हैं, अगर 30 दिन में भू-मालिकों को इसकी जानकारी नहीं मिली तो 30 दिन बाद फोरलेन विस्थापित मुख्य राज्य सूचना आयुक्त के समक्ष अपील दायर करेंगे।
गौरतलब है कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण में बरती गई अनियमितताओं में सबसे बड़ी परेशानी लोगों को यह आ रही थी कि जो रिकॉर्ड अधिकृत किए गए नंबर खसरा से शेष बच रही निजी भूमि का जो राजस्व रिकॉर्ड बनाया गया था वह विस्थापितों को पढ़ने में नहीं आ रहा है। इसकी विभिन्न तहसीलों के पटवार वृत्तों के पटवारी हलकों ने आरटीआई के तहत फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति को जानकारी दी है।
विज्ञापन
इन रिकॉर्ड को दुरुस्त करने के लिए पूर्व में रहे तत्कालीन उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर ने भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई के तहसीलदार को संबंधित उपमंडलाधिकारियों से नियमानुसार अनुमति लेकर एक महीने के अंदर दुरुस्ती करने के आदेश दिए थे लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की है। इसकी शिकायत जिला राजस्व अधिकारी को की जा चुकी है।
विज्ञापन
वहीं विभिन्न गांवों के बागठेड़ू, पल्थी, औहर, दड़याणा, कल्लर, कोठी, बैहना जट्टा, समलेटू, धराड़सानी, छत, जकातखाना, सुन्हण, जब्बल, मैहला, थापना, पट्टा, तुन्नू, कल्लर-दो आदि के भू-मालिकों ने आरटीआई के तहत अपनी निजी भूमि की जानकारी मांगी थी। इस पर उक्त इकाई ने पटवार वृत्तों के नकल शाखा या राजस्व पटवारी से फीस नकुलात देकर अपनी जानकारी देने बारे लिखा था। इस संबंध में पटवारी हलकों ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि कुछ पढ़ने योग्य है कुछ नहीं। इसी से असंतुष्ट होकर उपरोक्त गांवों के भू-मालिकों ने शिमला में प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष नियमानुसार अपील दायर की थी, जिसका फैसला करते हुए लोनिवि के चीफ इंजीनियर ने अपने पत्र संख्या (एचपी-आरआईडीसी /एसडीओ /आरटीआई -2018 हि.प्र. लोनिवि 706-07) दिनांक 8-10-2018 को 30 दिन के भीतर भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई के भू-अर्जन अधिकारी को जानकारी देने को कहा है।