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फ्लावरिंग न होने से 10 हजार बागवानों पर मंडराया संकट
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फ्लावरिंग न होने से 10 हजार बागवानों पर मंडराया संकट
यहां हो रही लगातार बारिश से कारण पैदा हुआ है उक्त संकट
जिले में करीब पांच हजार हेक्टेयर जमीन पर हो रही है बागवानी
रामनाथ शर्मा
शाहतलाई(बिलासपुर)। जिले में लगातार दो महीने से हो रही बारिश के कारण सैकड़ों बागवानों पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। फरवरी महीने में बागीचों में फ्लावरिंग शुरू हो जाती थी लेकिन इस बार मार्च महीने तक फ्लावरिंग पूरी नहीं हो पा रही है जिस कारण सैकड़ों बागवानों को आने वाले समय में आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। वर्तमान में जिला में 10 हजार बागवान परिवार नकदी फसलों पर निर्भर हैं, जो पांच हजार हेक्टेयर जमीन पर बागवानी का कार्य करते हैं।
जिले में करीब दो माह से हो रही बारिश से बागीचों में नमी बनी हुई है। मौसम फरवरी माह से ही गर्म होने लग पड़ता है तथा फरवरी माह से बागीचों में लगे फलदार पेड़ों में फ्लावरिंग का समय शुरू हो जाता है लेकिन मार्च का दूसरा सप्ताह भी बीत गया है लेकिन सेब, आडू, गलगल, नीबू सहित आम के पेड़ों पर फरवरी माह से भले ही कलियां खिल गई हों लेकिन आसमान में बादल रहने व बेमौसमी बारिश के कारण फ्लावरिंग प्रभावित हो रही है।
मार्च माह में जहां फलों का साइज मटर दाना के बराबर हो जाता था और जून तक फलों की फसल बाजार में पहुंच जाती थी लेकिन इस बार ऐसा कुछ भी होता नजर नहीं आ रहा है।
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उधर आम की फ्लावरिंग का समय भी बीतने लगा है। जिले में एक दिन धूप खिलने के बाद दो दिन बादल उमड़ आने से आम उत्पादकों को भी उन की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। बागवानों में बलदेव कुमार, चंद्र कुमार, अमर नाथ, विनोद कुमार, आशा देवी, अशोक कुमार, प्रेम चंद, प्रकाश चंद, बर्फी राम, शक्ति चंद, हरिदास का कहना है कि जनवरी माह में बारिश होने से उन्हें उम्मीद थी कि इस बार समय पर बारिश होने से बागवानी के लिए मौसम अनुकूल रहेगा लेकिन फरवरी-मार्च में हो रही बरसात अब बागवानी में बाधा बन गई है।
इधर, जिला बिलासपुर के उद्यान विभाग के उपनिदेशक विनोद कुमार शर्मा का कहना है कि फलों की पैदावार के लिए मौसम का अनुकूल रहना आवश्यक है। अगर ऐसा होता है तो बागवानी की फसलें प्रभावित हो सकती हैं।
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यहां हो रही लगातार बारिश से कारण पैदा हुआ है उक्त संकट
जिले में करीब पांच हजार हेक्टेयर जमीन पर हो रही है बागवानी
रामनाथ शर्मा
शाहतलाई(बिलासपुर)। जिले में लगातार दो महीने से हो रही बारिश के कारण सैकड़ों बागवानों पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। फरवरी महीने में बागीचों में फ्लावरिंग शुरू हो जाती थी लेकिन इस बार मार्च महीने तक फ्लावरिंग पूरी नहीं हो पा रही है जिस कारण सैकड़ों बागवानों को आने वाले समय में आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। वर्तमान में जिला में 10 हजार बागवान परिवार नकदी फसलों पर निर्भर हैं, जो पांच हजार हेक्टेयर जमीन पर बागवानी का कार्य करते हैं।
जिले में करीब दो माह से हो रही बारिश से बागीचों में नमी बनी हुई है। मौसम फरवरी माह से ही गर्म होने लग पड़ता है तथा फरवरी माह से बागीचों में लगे फलदार पेड़ों में फ्लावरिंग का समय शुरू हो जाता है लेकिन मार्च का दूसरा सप्ताह भी बीत गया है लेकिन सेब, आडू, गलगल, नीबू सहित आम के पेड़ों पर फरवरी माह से भले ही कलियां खिल गई हों लेकिन आसमान में बादल रहने व बेमौसमी बारिश के कारण फ्लावरिंग प्रभावित हो रही है।
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मार्च माह में जहां फलों का साइज मटर दाना के बराबर हो जाता था और जून तक फलों की फसल बाजार में पहुंच जाती थी लेकिन इस बार ऐसा कुछ भी होता नजर नहीं आ रहा है।
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उधर आम की फ्लावरिंग का समय भी बीतने लगा है। जिले में एक दिन धूप खिलने के बाद दो दिन बादल उमड़ आने से आम उत्पादकों को भी उन की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। बागवानों में बलदेव कुमार, चंद्र कुमार, अमर नाथ, विनोद कुमार, आशा देवी, अशोक कुमार, प्रेम चंद, प्रकाश चंद, बर्फी राम, शक्ति चंद, हरिदास का कहना है कि जनवरी माह में बारिश होने से उन्हें उम्मीद थी कि इस बार समय पर बारिश होने से बागवानी के लिए मौसम अनुकूल रहेगा लेकिन फरवरी-मार्च में हो रही बरसात अब बागवानी में बाधा बन गई है।
इधर, जिला बिलासपुर के उद्यान विभाग के उपनिदेशक विनोद कुमार शर्मा का कहना है कि फलों की पैदावार के लिए मौसम का अनुकूल रहना आवश्यक है। अगर ऐसा होता है तो बागवानी की फसलें प्रभावित हो सकती हैं।
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