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विस्थापितों को रोजगार के नाम पर नहीं मिला कुछ

Wed, 12 Dec 2018 10:51 PM IST
Updated Wed, 12 Dec 2018 10:51 PM IST
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विस्थापितों को रोजगार के नाम पर नहीं मिला कुछ
सरोज पाठक
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बरमाणा(बिलासपुर)। विधानसभा में कोलबांध परियोजना पर पूछे गए सवाल पर बहुउद्देश्यीय ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा के जवाब पर विस्थापितों ने रोष व्यक्त किया है। विस्थापितों का कहना है कि सदन में अनिल शर्मा ने विस्थापितों पर गलत जानकारी देकर सदन को गुमराह किया है। वहीं विस्थापितों का आरोप है कि उन्हें अभी तक परियोजना से किसी प्रकार की कोई भी सुविधा नहीं मिली है। मंत्री की अधूरी जानकारी के साथ सदन में जवाब देना यह दर्शाता है कि सरकार जनहित को लेकर संजीदा नहीं है।
विस्थापितों में अनूप, सुरेंद्र, बाबू राम, इंद्र सिंह, सुमन कुमार, परमा देवी, रचना शर्मा, रविंद्र, मनोज, रोशन लाल, सदा राम, रामपाल, सोमा देवी, ईश्वर दास, कमलेश कुमार सहित सभी विस्थापितों का कहना है कि सरकार विस्थापितों को दर किनार कर सदन को झूठी जानकारी देकर गुमराह न करे। हकीकत को देखकर विस्थापितों के हितों के लिए काम करें ताकि विस्थापितों की समस्याओं का समाधान हो सके।
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सोमवार को सदर विधायक ने तपोवन में कोलबांध परियोजना से जुड़े विस्थापितों को लेकर मंत्री अनिल शर्मा से सवाल किया जिसके जवाब में मंत्री ने बताया कि कोलबांध परियोजना में कुल 474 परिवार विस्थापित हैं जिनमें से 70 लोगों को कंपनी ने रोजगार दिया है लेकिन मंत्री का यह जवाब विस्थापितों को रास नहीं आया। उनका कहना है कि जिला बिलासपुर से ही 647 परिवार विस्थापित हैं।
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जबकि जिला मंडी, सोलन और शिमला के विस्थापितों को मिलाकर इसकी संख्या बढ़ जाती है। उनका यह भी आरोप है कि अनिल शर्मा ने गैर जिम्मेदाराना जवाब दिया है। विस्थापितों की स्थिति जाने बिना उन्होंने यह बताया कि 70 विस्थापितों को रोजगार मिला है। जबकि जमीनी स्तर विस्थापितों को दूर तक कोलबांध में रोजगार से कोई नाता नहीं है। कुछ एक लोगों को छोड़ कर यहां विस्थापित रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं लेकिन कंपनी गैर विस्थापितों को रोजगार देकर विस्थापितों को दर किनार कर रही है।

हालात यह है कि 2015 से बिजली बनना शुरू हुई है लेकिन अभी तक विस्थापितों को बिजली के कुल लाभ का 1 प्रतिशत नहीं मिला है और न ही 100 यूनिट बिजली मुफ्त मिली है। पुनर्वास कॉलोनी में कंपनी द्वारा मुहैया करवाई गई कई प्लॉट के डंगे कई सालों से गिरे हुए हैं। हजार शिकायत दर्ज करवाने के बाद भी कंपनी ने उनकी मरम्मत नहीं करवाई है। रोजगार देना तो दूर की बात। अपने हक के लिए हड़ताल करने वाले वर्करों को भी कंपनी के तानाशाही दिखाते हुए बाहर का रास्ता दिखाया है।
 
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