{"_id":"5b5ddba04f1c1b66428b4a10","slug":"161532877728-bilaspur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"न्यायिक कर्मचारी वर्ग को स्केल रिवाइज से रखा वंचित ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
न्यायिक कर्मचारी वर्ग को स्केल रिवाइज से रखा वंचित
Updated Sun, 29 Jul 2018 08:56 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
न्यायिक कर्मचारी वर्ग को स्केल रिवाइज से रखा वंचित
मांगे पूरी न होने पर आंदोलन का रूख अपनाएंगा संघ: मुकेश
बिलासपुर में प्रदेश न्यायिक कर्मचारी संघ की बैठक का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हिमाचल प्रदेश न्यायिक कर्मचारी कल्याण संघ ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी मांगों को नजर अंदाज करती है कि वे चरणबद्ध तरीके से अनशन का रास्ता अख्तियार करेंगे। इसकी सारी जिम्मेवारी प्रदेश सरकार की होगी। इस बाबत बाकायदा एक प्रस्ताव भी पास किया गया है।
यह बात बिलासपुर में आयोजित बैठक में हिमाचल प्रदेश न्यायिक कर्मचारी कल्याण संघ के प्रदेशाध्यक्ष मुकेश चौहान ने कही। कहाकि सरकार इस वर्ग की ग्रेड-पे को लेकर ढुलमुल रवैया अपना रही है। अन्य विभागों के कर्मचारियों को सुविधा देते हुए 1-1-2006 के बाद 1-10-2012 से स्केल रिवाइज किया गया लेकिन न्यायिक कर्मचारी वर्ग को इस लाभ से वंचित रखा और एक्ट में संशोधन का बहाना लगा दिया। एक्ट 2012 के बाद आया है ऐसे में न्यायिक कर्मचारियों से इस प्रकार का भेदभाव क्यों। इस एक्ट में जरूरी संशोधन कर न्यायिक कर्मचारियों को भी लाभान्वित किया जाए।
चौहान ने आरोप लगाया कि सरकार के साथ उच्च न्यायालय भी इस वर्ग के साथ सौतेला व्यवहार करती आई है लेकिन न्यायिक कर्मचारियों ने मांगें न मानने की सूरत में आंदोलन करने की रणनीति तैयार कर ली है। अवज्ञा याचिका को उच्च न्यायालय में वर्ष 2014 में दायर किया था लेकिन अभी तक लंबित है। आग्रह करने के बावजूद प्रदेश के 17 अधीनस्थ न्यायालयों में अधीक्षक ग्रेड-2 का पद ही सृजित नहीं किया गया है जिससे ओवर वर्क लोड से निपटने के लिए कर्मचारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लिहाजा सरकार को चाहिए कि हर जिले में ग्रेड-2 का पद सृजित किया जाए।
विज्ञापन
प्रदेशाध्यक्ष मुकेश चौहान ने कहा कि पेंशन को लेकर दो तरह की नीति नहीं होनी चाहिए सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम बहाल की जाए। हर जिले में प्रोटोकॉल ऑफिसर की तैनाती होना आवश्यक है, क्योंकि इस काम के लिए विशेष तौर से कार्यालय से स्टाफ को भेजा जाता है जिससे समय के साथ-साथ काम भी प्रभावित होता है। क्लास-3 के कर्मचारी बैलिफ को ग्रेड-पे के साथ 3200 रुपये मासिक दिया जाए। प्रोसेसर सर्वर को सरकारी नियमों के तहत दैनिक व यात्रा भत्ता के साथ 2500 रुपये की राशि फिक्स की जाए। इस दौरान प्रदेशाध्यक्ष नरेश चौहान के अलावा वरिष्ठ उपाध्यक्ष पवन ठाकुर, महासचिव परमानंद शर्मा, कोषाध्यक्ष विपिन शर्मा, चंबा से मुख्य प्रशासनिक अधिकारी भगत सिंह, पुरुषोत्तम शर्मा, विनीत मोदगिल, नवेंद्र कटोच, भुटेश्वर दत्त आदि मौजूद रहे।
-----------------
...खेमराज शर्मा।
मांगे पूरी न होने पर आंदोलन का रूख अपनाएंगा संघ: मुकेश
बिलासपुर में प्रदेश न्यायिक कर्मचारी संघ की बैठक का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हिमाचल प्रदेश न्यायिक कर्मचारी कल्याण संघ ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी मांगों को नजर अंदाज करती है कि वे चरणबद्ध तरीके से अनशन का रास्ता अख्तियार करेंगे। इसकी सारी जिम्मेवारी प्रदेश सरकार की होगी। इस बाबत बाकायदा एक प्रस्ताव भी पास किया गया है।
यह बात बिलासपुर में आयोजित बैठक में हिमाचल प्रदेश न्यायिक कर्मचारी कल्याण संघ के प्रदेशाध्यक्ष मुकेश चौहान ने कही। कहाकि सरकार इस वर्ग की ग्रेड-पे को लेकर ढुलमुल रवैया अपना रही है। अन्य विभागों के कर्मचारियों को सुविधा देते हुए 1-1-2006 के बाद 1-10-2012 से स्केल रिवाइज किया गया लेकिन न्यायिक कर्मचारी वर्ग को इस लाभ से वंचित रखा और एक्ट में संशोधन का बहाना लगा दिया। एक्ट 2012 के बाद आया है ऐसे में न्यायिक कर्मचारियों से इस प्रकार का भेदभाव क्यों। इस एक्ट में जरूरी संशोधन कर न्यायिक कर्मचारियों को भी लाभान्वित किया जाए।
विज्ञापन
चौहान ने आरोप लगाया कि सरकार के साथ उच्च न्यायालय भी इस वर्ग के साथ सौतेला व्यवहार करती आई है लेकिन न्यायिक कर्मचारियों ने मांगें न मानने की सूरत में आंदोलन करने की रणनीति तैयार कर ली है। अवज्ञा याचिका को उच्च न्यायालय में वर्ष 2014 में दायर किया था लेकिन अभी तक लंबित है। आग्रह करने के बावजूद प्रदेश के 17 अधीनस्थ न्यायालयों में अधीक्षक ग्रेड-2 का पद ही सृजित नहीं किया गया है जिससे ओवर वर्क लोड से निपटने के लिए कर्मचारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लिहाजा सरकार को चाहिए कि हर जिले में ग्रेड-2 का पद सृजित किया जाए।
विज्ञापन
प्रदेशाध्यक्ष मुकेश चौहान ने कहा कि पेंशन को लेकर दो तरह की नीति नहीं होनी चाहिए सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम बहाल की जाए। हर जिले में प्रोटोकॉल ऑफिसर की तैनाती होना आवश्यक है, क्योंकि इस काम के लिए विशेष तौर से कार्यालय से स्टाफ को भेजा जाता है जिससे समय के साथ-साथ काम भी प्रभावित होता है। क्लास-3 के कर्मचारी बैलिफ को ग्रेड-पे के साथ 3200 रुपये मासिक दिया जाए। प्रोसेसर सर्वर को सरकारी नियमों के तहत दैनिक व यात्रा भत्ता के साथ 2500 रुपये की राशि फिक्स की जाए। इस दौरान प्रदेशाध्यक्ष नरेश चौहान के अलावा वरिष्ठ उपाध्यक्ष पवन ठाकुर, महासचिव परमानंद शर्मा, कोषाध्यक्ष विपिन शर्मा, चंबा से मुख्य प्रशासनिक अधिकारी भगत सिंह, पुरुषोत्तम शर्मा, विनीत मोदगिल, नवेंद्र कटोच, भुटेश्वर दत्त आदि मौजूद रहे।
-----------------
...खेमराज शर्मा।