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लोगों में जागरूकता का आभाव बन रहा सर्पदंश का कारण
Updated Wed, 29 Aug 2018 12:12 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। जिले में पिछले कई वर्षों से निरंतर हर वर्ष जून महीने से लेकर अगस्त महीने तक गर्मी व बरसात के इन तीन महीनों में सांपों के काटने से हर साल दर्जनों लोग अपनी जान गवां रहे हैं। वहीं इस वर्ष भी जिला में इस माह के पिछले सप्ताह एक के बाद एक चार मौतें सर्पदंश से होने से लोगों में डर का भय पैदा हो गया है। प्रशासन व विभाग की ओर से कोई भी जागरूकता अभियान सर्पदंश को लेकर नहीं चलाया जा रहा है। न ही डॉक्टरों को इस बारे में उचित ट्रेनिंग ही दी जाती है, जिस कारण अधिकांश लोग मौत का शिकार हो रहे हैं।
चूहों की तलाश में सांप लोगों के घरों के अंदर घुस जाते हैं। इसके बारे में लोगों को पता नहीं चलता और जब रात के समय सांप बाहर निकलते हैं तो वह लोगों द्वारा हलकी सी आहट करने पर उन्हें काट लेते हैं। इससे लोग मौत का ग्रास बन जाते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि हालांकि सरकार ने काटने वाले सांपों की प्रजातियों का पता लगाकर उसका टीका लगाने का प्रशिक्षण कुछ डॉक्टरों को दे रखा है, जबकि यह संक्षिप्त प्रशिक्षण सभी डॉक्टरों को करवाया जाना अति आवश्यक है। जिले में पिछले दो-तीन दिनों में ही सांप के काटने से चार मौतें हुई हैं।
उधर विशेषज्ञ कहते हैं कि विश्व में पाई जाने वाली और चिन्हित सांपों की 33 हजार प्रजातियों में से केवल चार प्रजातियां ही ऐसी हैं जो बहुत जहरीली होती हैं। बिलासपुर में इनमें से तीन जहरीली प्रजातियां कोबरा, वाइपर और क्रेट यहां पाई जाती हैं।
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चूहे के बिलों को बंद करे और आसपास सफाई रखें
लोगों को सांपों को घरों के अंदर आने से रोकने के लिए चूहों के बिलों को बंद करना तथा दरवाजे, खिड़कियों व रोशनदानों के रास्ते से उनके अंदर आने के सभी मार्ग बंद करना भी अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा घर के आसपास का घास व झाड़ियां काट कर मकान के चारों ओर साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए।
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बिना समय गवाए पीड़ित व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुंचाए
डॉ. राजेश आहलुवालिया, एमएस बिलासपुर का कहना है कि बिना समय गवाए सांप के काटे हुए व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुंचाएं और झाडफ़ूंक के चक्कर में न पड़ें। साथ ही बिना कुछ खिलाए-पिलाए तथा किसी लोकल दवाई का प्रयोग किए नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। रात को नंगे पांव और बिना रोशनी के बाहर न निकलें। --
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बिलासपुर। जिले में पिछले कई वर्षों से निरंतर हर वर्ष जून महीने से लेकर अगस्त महीने तक गर्मी व बरसात के इन तीन महीनों में सांपों के काटने से हर साल दर्जनों लोग अपनी जान गवां रहे हैं। वहीं इस वर्ष भी जिला में इस माह के पिछले सप्ताह एक के बाद एक चार मौतें सर्पदंश से होने से लोगों में डर का भय पैदा हो गया है। प्रशासन व विभाग की ओर से कोई भी जागरूकता अभियान सर्पदंश को लेकर नहीं चलाया जा रहा है। न ही डॉक्टरों को इस बारे में उचित ट्रेनिंग ही दी जाती है, जिस कारण अधिकांश लोग मौत का शिकार हो रहे हैं।
चूहों की तलाश में सांप लोगों के घरों के अंदर घुस जाते हैं। इसके बारे में लोगों को पता नहीं चलता और जब रात के समय सांप बाहर निकलते हैं तो वह लोगों द्वारा हलकी सी आहट करने पर उन्हें काट लेते हैं। इससे लोग मौत का ग्रास बन जाते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि हालांकि सरकार ने काटने वाले सांपों की प्रजातियों का पता लगाकर उसका टीका लगाने का प्रशिक्षण कुछ डॉक्टरों को दे रखा है, जबकि यह संक्षिप्त प्रशिक्षण सभी डॉक्टरों को करवाया जाना अति आवश्यक है। जिले में पिछले दो-तीन दिनों में ही सांप के काटने से चार मौतें हुई हैं।
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उधर विशेषज्ञ कहते हैं कि विश्व में पाई जाने वाली और चिन्हित सांपों की 33 हजार प्रजातियों में से केवल चार प्रजातियां ही ऐसी हैं जो बहुत जहरीली होती हैं। बिलासपुर में इनमें से तीन जहरीली प्रजातियां कोबरा, वाइपर और क्रेट यहां पाई जाती हैं।
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चूहे के बिलों को बंद करे और आसपास सफाई रखें
लोगों को सांपों को घरों के अंदर आने से रोकने के लिए चूहों के बिलों को बंद करना तथा दरवाजे, खिड़कियों व रोशनदानों के रास्ते से उनके अंदर आने के सभी मार्ग बंद करना भी अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा घर के आसपास का घास व झाड़ियां काट कर मकान के चारों ओर साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए।
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बिना समय गवाए पीड़ित व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुंचाए
डॉ. राजेश आहलुवालिया, एमएस बिलासपुर का कहना है कि बिना समय गवाए सांप के काटे हुए व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुंचाएं और झाडफ़ूंक के चक्कर में न पड़ें। साथ ही बिना कुछ खिलाए-पिलाए तथा किसी लोकल दवाई का प्रयोग किए नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। रात को नंगे पांव और बिना रोशनी के बाहर न निकलें। --
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