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किस नियम के तहत हटाए मकान 15 दिन में दें जानकारी
Updated Wed, 20 Dec 2017 10:52 PM IST
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बिलासपुर। कीरतपुर से नेरचौक तक फोरलेन निर्माण के दौरान 324 मकानों को किस नियम के तहत जबरन हटाया गया है और कितने मकान अभी तक खड़े हैं, इस संबंध में एनएचएआई को पूरी जानकारी देनी होगी।
उपायुक्त बिलासपुर ने इस संबंध में एनएचआई व तहसीलदार भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई को आदेश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रार्थी को इस संबंध में मद बाइज पूरी जानकारी निशुल्क मुहैया करवाई जाए। ताकि किस नियम को आधार मानकर कब्जे हटाए गए हैं यह साफ हो सके।
गौर रहे कि 2016 में तत्कालीन उपायुक्त ने 324 मकानों को हटाने का फरमान जारी किया था। हालांकि लोग अपने स्तर पर कब्जे छोड़ने को तैयार थे। लेकिन, लोगों की मांग थी कि पहले सेंटर लाइन को तय किया जाए। वहीं दायें और बायें की चौड़ाई को कागजों और भूतल पर बताया जाए। इसके बाद अगर मकान इस दायरे में आते हैं तो उन्हें हटाया जाए। इसके बाद भी संबंधित विभाग ने लोगों की एक बात नहीं सुनी। उपायुक्त के आदेश पर पहले बिजली पानी के कनेक्शन काटे गए उसके बाद पुलिस बल के साथ जबरन कब्जे हटाए गए। जबरन की गई कार्रवाई से कई लोग बेघर हो गए थे। अब प्रभावितों ने इस संबंध में सूचना मांगी है। जिस पर उपायुक्त ने संबंधित विभाग को इस मामले में पूरी सूचना देने को कहा है।
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उधर, उपायुक्त बिलासपुर ऋग्वेद ठाकुर का कहना है कि प्रार्थी की मांग के बाद इस बारे में संबंधित विभाग को 15 दिन के अंदर सही सूचना देने को कहा गया है।
विस्थापितों का कहना था कि घर उखाड़ने से पहले उन्हें सेंटर लाइन को तय किया जाए। उसके बाद दायें और बायें की चौड़ाई बताई जाए। वहीं चौड़ाई कागजों में भी अंकित होनी चाहिए। उसके अनुसार अगर ये मकान सड़क निर्माण में आते हैं तो उन्हें हटाया जाए। लेकिन तत्कालीन उपायुक्त ने इस संबंध में लोगों की बात नहीं सुनी और जबरन घर गिराए गए थे।
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उपायुक्त बिलासपुर ने इस संबंध में एनएचआई व तहसीलदार भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई को आदेश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रार्थी को इस संबंध में मद बाइज पूरी जानकारी निशुल्क मुहैया करवाई जाए। ताकि किस नियम को आधार मानकर कब्जे हटाए गए हैं यह साफ हो सके।
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गौर रहे कि 2016 में तत्कालीन उपायुक्त ने 324 मकानों को हटाने का फरमान जारी किया था। हालांकि लोग अपने स्तर पर कब्जे छोड़ने को तैयार थे। लेकिन, लोगों की मांग थी कि पहले सेंटर लाइन को तय किया जाए। वहीं दायें और बायें की चौड़ाई को कागजों और भूतल पर बताया जाए। इसके बाद अगर मकान इस दायरे में आते हैं तो उन्हें हटाया जाए। इसके बाद भी संबंधित विभाग ने लोगों की एक बात नहीं सुनी। उपायुक्त के आदेश पर पहले बिजली पानी के कनेक्शन काटे गए उसके बाद पुलिस बल के साथ जबरन कब्जे हटाए गए। जबरन की गई कार्रवाई से कई लोग बेघर हो गए थे। अब प्रभावितों ने इस संबंध में सूचना मांगी है। जिस पर उपायुक्त ने संबंधित विभाग को इस मामले में पूरी सूचना देने को कहा है।
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उधर, उपायुक्त बिलासपुर ऋग्वेद ठाकुर का कहना है कि प्रार्थी की मांग के बाद इस बारे में संबंधित विभाग को 15 दिन के अंदर सही सूचना देने को कहा गया है।
विस्थापितों का कहना था कि घर उखाड़ने से पहले उन्हें सेंटर लाइन को तय किया जाए। उसके बाद दायें और बायें की चौड़ाई बताई जाए। वहीं चौड़ाई कागजों में भी अंकित होनी चाहिए। उसके अनुसार अगर ये मकान सड़क निर्माण में आते हैं तो उन्हें हटाया जाए। लेकिन तत्कालीन उपायुक्त ने इस संबंध में लोगों की बात नहीं सुनी और जबरन घर गिराए गए थे।