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सलवाड़ कृषि प्रसार भवन खस्ताहाल
Updated Wed, 22 Nov 2017 10:46 PM IST
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शाहतलाई (बिलासपुर)। पिछड़ा क्षेत्र कोटधार की पंचायत सलवाड़ में बने कृषि प्रसार भवन की हालत दिन-प्रतिदिन खस्ता होती जा रही है। इससे स्थानीय लोगों में विभाग व प्रशासन के प्रति रोष है। लोगों ने मांग की है कि यहां पर दोबारा से कृषि प्रसार कार्य चलाया जाए।
पंचायत सलवाड़ के उपप्रधान संजय कुमार, जेजवी पंचायत उपप्रधान राजेश कुमार, धनी पंचायत प्रधान जयनंद, बलवान, राजेश कुमार, ज्ञान चंद, अमृत लाल, नरवीर सिंह, पवन कुमार, प्रेमसिंह, श्रीराम व राकेश का कहना है कि करीब तीस वर्ष पहले कृषि विभाग ने लाखों रुपये खर्च करके किसानों की सुविधा के लिए कृषि प्रसार भवन का निर्माण करवाया था। इस भवन में लगे बिजली के उपकरण भी खराब हो चुके हैं जबकि खिड़की व दरवाजे बुरी तरह से टूट चुके हैं।
इस भवन में किसानों को फसलों के साथ-साथ बेमौसमी सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित किया जाता था। लेकिन, आज इस भवन की हालत दयनीय हो चुकी है। हैरानी की बात यह है कि विभाग के उच्चाधिकारियों व सरकार ने इस भवन की सुध नहीं ली। इसी वजह से इस भवन का कुछ हिस्सा गिर चुका है जबकि अन्य कमरे गिरने की कगार पर हैं।
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इस कृषि प्रसार भवन में सलवाड़, पपलोआ, धनी, मलरंाव, डूडिया, कलोल, भडोलीकलां, जेजवी के किसानों को बीज, औजार एवं कृषि संबंधी जानकारी मिलती थी। लेकिन आज उन्हें कृषि संबंधी औजार लेने के लिए दस से पंद्रह किलोमीटर दूर कलोल जाना पड़ता है। उन्होंने विभाग के उच्च अधिकारियों व सरकार से इस भवन की सुध लेने की मांग की है।
उधर, कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. डीएस पंत का कहना है कि इस भवन को जिस प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया था। वह काफी समय पहले समाप्त हो चुका है। अब विभाग कलोल में किसानों को सुविधाएं उपलब्ध करवाने का प्रयास कर रहा है। वहां पर स्टोर बनाया जा रहा है। इस भवन को यदि कोई अन्य विभाग लेना चाहे तो उसे उपायुक्त के माध्यम से आवेदन करना होगा।
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पंचायत सलवाड़ के उपप्रधान संजय कुमार, जेजवी पंचायत उपप्रधान राजेश कुमार, धनी पंचायत प्रधान जयनंद, बलवान, राजेश कुमार, ज्ञान चंद, अमृत लाल, नरवीर सिंह, पवन कुमार, प्रेमसिंह, श्रीराम व राकेश का कहना है कि करीब तीस वर्ष पहले कृषि विभाग ने लाखों रुपये खर्च करके किसानों की सुविधा के लिए कृषि प्रसार भवन का निर्माण करवाया था। इस भवन में लगे बिजली के उपकरण भी खराब हो चुके हैं जबकि खिड़की व दरवाजे बुरी तरह से टूट चुके हैं।
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इस भवन में किसानों को फसलों के साथ-साथ बेमौसमी सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित किया जाता था। लेकिन, आज इस भवन की हालत दयनीय हो चुकी है। हैरानी की बात यह है कि विभाग के उच्चाधिकारियों व सरकार ने इस भवन की सुध नहीं ली। इसी वजह से इस भवन का कुछ हिस्सा गिर चुका है जबकि अन्य कमरे गिरने की कगार पर हैं।
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इस कृषि प्रसार भवन में सलवाड़, पपलोआ, धनी, मलरंाव, डूडिया, कलोल, भडोलीकलां, जेजवी के किसानों को बीज, औजार एवं कृषि संबंधी जानकारी मिलती थी। लेकिन आज उन्हें कृषि संबंधी औजार लेने के लिए दस से पंद्रह किलोमीटर दूर कलोल जाना पड़ता है। उन्होंने विभाग के उच्च अधिकारियों व सरकार से इस भवन की सुध लेने की मांग की है।
उधर, कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. डीएस पंत का कहना है कि इस भवन को जिस प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया था। वह काफी समय पहले समाप्त हो चुका है। अब विभाग कलोल में किसानों को सुविधाएं उपलब्ध करवाने का प्रयास कर रहा है। वहां पर स्टोर बनाया जा रहा है। इस भवन को यदि कोई अन्य विभाग लेना चाहे तो उसे उपायुक्त के माध्यम से आवेदन करना होगा।