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वरिष्ठ नेताओं के टिकट कटने पर भाजपा में गुटबाजी हुई हावी
Updated Tue, 17 Oct 2017 11:36 PM IST
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राजनीति
- फोटो : demo pic
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अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर।
विस चुनावों को लेकर जिस प्रकार से वरिष्ठ नेताओं को भाजपा हाशिये पर धकेल कर आगे बढ़ी है, उसका पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। जिला के पूर्व सांसद सुरेश चंदेल, झंडूता से पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक रिखीराम कौंडल का टिकट कटने के बाद जिला में भाजपा के समीकरण बिगड़ सकते हैं। हालांकि माना जा रहा है पार्टी डैमेज कंट्रोल करने के लिए भी रूपरेखा तैयार कर चुकी है। वहीं इस संबंध में सोमवार देर शाम को बैठक भी रखी गई है। वहीं फैसला लेने से पहले पार्टी ने सर्वे भी करवाया है। मगर जिस तरह से पार्टी के नेताओं को लेकर सोशल मीडिया में खुलकर गुटबाजी सामने आ रही है, वह अच्छे संकेत नहीं माने जा रहा है। अभी तक माना जा रहा है कि एक ओर सदर विस से जहां सुभाष ठाकुर के स्वागत के लिए मंगलवार को कोठी चौक में भाजपा के सैकड़ों कार्यकर्ता पहुंचे। वहीं दूसरे ओर पूर्व सांसद सुरेश चंदेल साफ कर चुके हैं कि जो कार्यकर्ता कहेंगे वह उनके फैसले का सम्मान करेंगे। इससे साफ संकेत है कि अगर कार्यकर्ता कहेंगे तो पूर्व सांसद आजाद उम्मीदवार के रूप में भी मैदान में उतर सकते हैं। वहीं पूर्व सांसद के बेटे ने भी फेसबुक में लिखा है कि वह एक दो दिनों में कार्यकर्ताओं में पहुंचकर आगे की रणनीति तैयार करेंगे। झंडूता के विधायक रिखी राम कौंडल ने सोमवार को कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रूपरेखा तैयार कर ली है। इसमें उन्होंने साफ कर दिया है कि वह आजाद चुनाव लड़ेंगे। इस मौके पर उन्होंने पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल और उनके बेटे स्थानीय सांसद पर भी उनके साथ छल करने का आरोप लगाया है। इसके बाद भाजपा झंडूता मंडल सेएक साथ त्याग पत्र देने तक की बात सामने आई है। इस संबंध में बाकायदा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी पत्र लिखा गया है। हालांकि भाजपा पहले ही साफ कर चुकी है कि जो पार्टी विरोधी गतिविधियां करेगा या फिर गुटबाजी करेगा उसका यह अंतिम गुट होगा। ऐसे में अब बड़ा सवाल बना हुआ है कि भाजपा पार्टी से के विरोध में जा रहे इन नेताओं के खिलाफ क्या कार्रवाई करेगी? वहीं इन नेताओं की गुटबाजी और आजाद उम्मीदवार उतरने पर सीटों के नजीतों पर क्या असर पड़ेगा।
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बिलासपुर।
विस चुनावों को लेकर जिस प्रकार से वरिष्ठ नेताओं को भाजपा हाशिये पर धकेल कर आगे बढ़ी है, उसका पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। जिला के पूर्व सांसद सुरेश चंदेल, झंडूता से पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक रिखीराम कौंडल का टिकट कटने के बाद जिला में भाजपा के समीकरण बिगड़ सकते हैं। हालांकि माना जा रहा है पार्टी डैमेज कंट्रोल करने के लिए भी रूपरेखा तैयार कर चुकी है। वहीं इस संबंध में सोमवार देर शाम को बैठक भी रखी गई है। वहीं फैसला लेने से पहले पार्टी ने सर्वे भी करवाया है। मगर जिस तरह से पार्टी के नेताओं को लेकर सोशल मीडिया में खुलकर गुटबाजी सामने आ रही है, वह अच्छे संकेत नहीं माने जा रहा है। अभी तक माना जा रहा है कि एक ओर सदर विस से जहां सुभाष ठाकुर के स्वागत के लिए मंगलवार को कोठी चौक में भाजपा के सैकड़ों कार्यकर्ता पहुंचे। वहीं दूसरे ओर पूर्व सांसद सुरेश चंदेल साफ कर चुके हैं कि जो कार्यकर्ता कहेंगे वह उनके फैसले का सम्मान करेंगे। इससे साफ संकेत है कि अगर कार्यकर्ता कहेंगे तो पूर्व सांसद आजाद उम्मीदवार के रूप में भी मैदान में उतर सकते हैं। वहीं पूर्व सांसद के बेटे ने भी फेसबुक में लिखा है कि वह एक दो दिनों में कार्यकर्ताओं में पहुंचकर आगे की रणनीति तैयार करेंगे। झंडूता के विधायक रिखी राम कौंडल ने सोमवार को कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रूपरेखा तैयार कर ली है। इसमें उन्होंने साफ कर दिया है कि वह आजाद चुनाव लड़ेंगे। इस मौके पर उन्होंने पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल और उनके बेटे स्थानीय सांसद पर भी उनके साथ छल करने का आरोप लगाया है। इसके बाद भाजपा झंडूता मंडल सेएक साथ त्याग पत्र देने तक की बात सामने आई है। इस संबंध में बाकायदा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी पत्र लिखा गया है। हालांकि भाजपा पहले ही साफ कर चुकी है कि जो पार्टी विरोधी गतिविधियां करेगा या फिर गुटबाजी करेगा उसका यह अंतिम गुट होगा। ऐसे में अब बड़ा सवाल बना हुआ है कि भाजपा पार्टी से के विरोध में जा रहे इन नेताओं के खिलाफ क्या कार्रवाई करेगी? वहीं इन नेताओं की गुटबाजी और आजाद उम्मीदवार उतरने पर सीटों के नजीतों पर क्या असर पड़ेगा।