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चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के रिक्त पदों पर मांगी नियुक्ति

Wed, 09 Jan 2019 10:42 PM IST
Devender Devender Kumar Kumar
Updated Wed, 09 Jan 2019 10:42 PM IST
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चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के रिक्त पदों पर मांगी नियुक्ति
अमर उजाला ब्यूरो
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बिलासपुर। एटक से संबंधित मिड-डे-मील वर्कर यूनियन जिला बिलासपुर ने अपनी मांगों के संबंध में शिक्षा उपनिदेशक से मिलकर एक ज्ञापन सौंपा। मिड-डे-मील वर्कर्स स्वस्थ भारत शिक्षित भारत सरकार के मिशन को पूरा करने में लगी हुई है। सरकार की अपनी रिपोर्ट यह कहती है कि बच्चों का स्कूलों में ड्राप आउट केस पहले के मुकाबले अब कम हुए हैं। बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है और सरकार अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रही है। इन योजनाओं को धरातल पर पूरा करने वाली मिड-डे-मील वर्करों की स्थिति बद से बदतर हो गई है। मिड-डे-मील वर्करों को महंगाई के इस दौर में केवल 1800 रुपये मासिक पर अपना तथा अपने परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो गया है जोकि बहुत ही अमानवीय है।
सरकारें एक ओर तो नेताओं को वेतन व भत्ते बढ़ा कर दे रही हैं लेकिन देश के निर्माण में जुटे करोड़ों मेहनतकश लोगों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल को मिड-डे-मील वर्करों की ओर से पूरा सहयोग देने की बात करते हुए मिड-डे-मील वर्करों ने कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुई तो कर्मी संघर्ष का रास्ता अख्तियार करेंगे। उनकी प्रमुख मांगें हैं कि मिड-डे-मील वर्करों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए।
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न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये मासिक किया जाए। मिड-डे-मील वर्क रों के लिए 25 बच्चों की शर्त को हटाया जाए। मिड-डे-मील वर्करों को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के रिक्त पड़े पदों पर नियुक्त किया जाए। तमाम सरकारी स्कूलों में शुरू की गई नर्सरी कक्षाएं शुरू करने से बढ़ी बच्चों की संख्या को ध्यान में रखते हुए उनके अलग से मिड-डे-मील वर्कर रखे जाएं और स्कूलों का बजट बढ़ाया जाए। मिड-डे-मील स्कीमों का निजीकरण बंद किया जाए। मिड-डे-मील वर्करों को तमाम सरकारी छुट्टियां, राखी, भैया दूज, करवा चौथ व अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की छुट्टियां दी जाएं। मिड-डे-मील वर्कर व उनके परिवारों को ग्रुप इश्योरेंस स्कीमों से जोड़ा जाए और हादसे के शिकार हुए लोगों को पूरे आर्थिक लाभ दिए जाएं।
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